बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट पर चुनाव से पहले जेडीयू में अनंत सिंह और नीरज कुमार का विवाद थमता नजर आ रहा है. नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद ललन सिंह ने विवाद समाप्त होने के संकेत दिए हैं.
अनंत सिंह-नीरज कुमार विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है. अगर अब अनंत सिंह के तेवर नरम पड़ते हैं, तो पार्टी में ललन सिंह का कद और बढ़ सकता है.
मोकामा से पार्टी विधायक अनंत सिंह ने विधान परिषद चुनाव में अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी नीरज कुमार ने खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और खुलेआम जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन कर रहे हैं. इतना ही नहीं उन्होंने पार्टी के अंदर की तनातनी को भी सार्वजनिक कर दिया है.
मोकामा विधायक अनंत सिंह के विरोध के बीच नीरज कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की और उनसे पार्टी का समर्थन पत्र हासिल किया. नीतीश कुमार के हाथों से नीरज कुमार को समर्थन पत्र दिला कर पार्टी ने अनंत सिंह को बड़ा मैसेज भेज दिया है.
अनंत सिंह के नामांकन में जिस तरह समर्थकों की भीड़ उमड़ी और जिस अंदाज में नारे लगे, उसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी. अब देखना यह होगा कि नीतीश कुमार इसे कैसे शांत करते हैं और अनंत सिंह पर किसी तरह से लगाम लगाई जाएगी?
सोनिया गांधी के बयान पर ललन सिंह ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है. सोनिया गांधी ने नीतीश कुमार जी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की, हमें तो आश्चर्य होता है.
CWC की बैठक के दौरान लोकसभा चुनाव 2024 की समीक्षा और विपक्षी गठबंधन इंडिया के भविष्य पर तीखी चर्चा देखने को मिली. कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के इस बयान पर कि चुनाव से पहले नीतीश कुमार को गठबंधन में रोके रखना चाहिए था, सोनिया गांधी ने कड़ा एतराज जताया. उन्होंने सीधे शब्दों में नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए उन्हें गद्दार करार दिया.
एएनएम छात्राओं ने अपनी मांगों को लेकर आज जेडीयू कार्यालय पर प्रदर्शन किया. छात्राओं के प्रदर्शन के कारण पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को वहां से बैरंग लौटना पड़ा. वहीं, प्रदर्शनकारी छात्राओं ने परिवहन मंत्री दामोदर रावत की गाड़ी का घेराव किया.
अनंत सिंह और नीरज कुमार के झगड़े को सुलझाने के लिए पूर्व सीएम नीतीश कुमार को मैदान में उतरना पड़ा है. सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले संजय झा से लेकर निशांत कुमार तक अपना प्रयास कर चुके हैं, लेकिन असफल रहे थे.
दबाव की राजनीति कोई नई चीज नहीं है. सभी दल चाहते हैं कि उसे विस्तार का मौका मिले और जेडीयू भी ऐसा करना चाहती है तो इसमें कोई वैसी बात नहीं है. जेडीयू की कोशिश कुछ सीटों पर चुनाव लड़ने और कम से कम खाता खोलने की है और इसके लिए वह भाजपा से गठबंधन के तहत मैदान में उतरना चाहती है.
नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच सुलह कराने के लिए नीतीश कुमार खुद मैदान में उतर चुके हैं. उन्होंने जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और बिहार सरकार में मंत्री श्रवण कुमार को अपने आवास पर बुलाया है.
जमुई कांड और बिहार विधान परिषद चुनाव की हलचल के बीच सीएम सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार से पटना में उनके आवास पर मुलाकात की. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई.
बीजेपी के साथ तनातनी के बीच जेडीयू ने आज (शुक्रवार, 18 सितंबर) अपने सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों की एक बैठक बुलाई है. इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हो सकते हैं. बैठक को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है.
जो भी व्यक्ति राजनीति को थोड़ा बहुत समझता है, उसे पता होगा कि भाई वीरेंद्र की अभी राजद में वो हैसियत नहीं है कि वो नीतीश कुमार को महागठबंधन में आने का न्यौता दे सकें. यह सब कवायद पार्टी में अपनी स्थिति मजबूत करने की हो सकती है.
सबसे पहले 2017, 2022 और 2024 में नीतीश कुमार पाला बदल चुके हैं. 2013 में उन्होंने पहली बार एनडीए से नाता तोड़ा था और 2014 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू अकेले मैदान में थी. 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव से हाथ मिलाकर महागठबंधन की नींव रखी थी.
पिछले 2 से 3 महीनों में खासतौर से दिल्ली में सीजेपी प्रोटेस्ट के बाद बीजेपी एक तरह से बैकफुट पर आई है और उसके कद्दावर मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा तक देना पड़ा. उसके बाद आरक्षण के मुद्दे पर भी बीजेपी सांसत में है. बहुत संभव है कि पिछले कुछ सालों में बीजेपी की हर बात में हां कहने वाले सहयोगी दलों को आंख दिखाने का एक मौका हाथ लगा हो.
मोदी 3.0 में ऐसा पहली बार हुआ है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर जनता दल यूनाइटेड की ओर से इतना तगड़ा रिएक्शन दिया गया. चाहे श्याम रजक हों, नीरज कुमार हों या फिर नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार, सभी के तेवर यूसीसी के खिलाफ रहे हैं.
बीजेपी और जेडीयू के बीच मचे घमासान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर पार्टी नेताओं का जमघट लगने लगा है. आज (मंगलवार, 15 सितंबर) की सुबह-सुबह केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने 7 सर्कुलर रोड आवास पर जाकर नीतीश कुमार से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद बिहार की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है.
बिहार के पूर्व सीएम नीतीश कुमार के नाम पर उनकी पार्टी का नाम हो सकता है. पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने जनता दल यूनाइटेड के साथ नीतीश का नाम जोड़ने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि ‘जनता दल नीतीश’ पार्टी का नाम कर देना चाहिए.
बिहार की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए साल 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जीविका दीदी योजना की शुरुआत की थी. आज बिहार की जीविका दीदियों का कुल कारोबार 10 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. इस सफलता को देखते हुए दुनिया के तमाम देश इस योजना की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
1994 में नीतीश कुमार ने जॉर्ज फर्नांडिस के साथ मिलकर समता पार्टी की स्थापना की थी. 30 अक्टूबर 2003 को यही पार्टी जेडीयू में बदल गई थी. अब नीतीश संवाद कार्यक्रम में जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने पार्टी का नाम बदलकर ‘जनता दल नीतीश’ करने का प्रस्ताव रखा है.
बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि बख्तियारपुर बने नीतीशपुर. यह केवल एक नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि उस मिट्टी के गौरव और इतिहास को सम्मान देने का प्रयास होगा.