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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी अब नए कलेवर में आने की तैयारी कर रही है. दरअसल, पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने 'जनता दल युनाइटेड' (JDU) का नाम बदलकर अब 'जनता दल नीतीश' करने का प्रस्ताव रखा है. 9 सितंबर को खगड़िया में फरक्का जल संधि पर 'नीतीश संवाद' कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ही जेडीयू की पूंजी हैं और पार्टी के सर्वमान्य नेता हैं, इसलिए अब समय आ गया है कि 'जनता दल यूनाइटेड' (JDU) का नाम बदलकर ‘जनता दल नीतीश’ कर देना चाहिए. उनके इस बयान पर सियासत भी देखने को मिल सकती है.
लालू यादव को छोड़कर बनाई थी समता पार्टी
जनता दल (यूनाइटेड) का का राजनीतिक सफर लगभग 30 वर्षों का है. कभी लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार जनता दल के बैनर तले ही अपनी राजनीति किया करते थे. लगभग दो दशक तक दोनों की दोस्ती चली, लेकिन लालू यादव के कथित तानाशाही से नीतीश कुमार सहमत नहीं थे. यही वजह रही कि 1994 में दोनों की दोस्ती टूट गई. 12 अप्रैल 1994 में नीतीश कुमार ने जॉर्ज फर्नांडिस के साथ मिलकर जनता दल (जार्ज) नाम से एक नई पार्टी बनाई. जॉर्ज फर्नांडिस को इसका अध्यक्ष बनाया गया. लगभग 6 महीने ही जनता दल (जार्ज) का नाम बदलकर 'समता पार्टी' कर दिया गया. इस पार्टी के गठन के अगले ही साल यानी 1995 में बिहार विधानसभा चुनाव होना था. दोनों नेताओं ने खूब मेहनत की, लेकिन 310 प्रत्याशियों में से सिर्फ 7 ही जीत सके. पार्टी को सिर्फ 7.37 फीसदी वोट मिले थे और 270 सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी. दूसरी ओर लालू यादव और ज्यादा ताकतवर बनकर उभरे.
बीजेपी के साथ कब और कैसे हुआ गठबंधन?
समता पार्टी की करारी हार ने नीतीश कुमार को अपनी रणनीति पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया था. यही वजह है कि नीतीश ने बीजेपी के साथ करीबी बढ़ानी शुरू की. उधर, बीजेपी के नेता भी जानते थे कि बिहार में लालू यादव को हराने के लिए नीतीश कुमार को मजबूत करना बेहद जरूरी है. उदय कांत अपनी किताब 'नीतीश कुमार: अंतरंग दोस्तों की नजर से' में लिखते हैं कि 1995 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के कुछ दिनों बाद जॉर्ज फर्नांडिस की तबीयत खराब हो गई और उनको मुंबई के एक हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ा. यहां अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी भी जॉर्ज का हालचाल लेने पहुंचे. नीतीश कुमार वहां पहले से मौजूद थे. अगले ही दिन मुंबई में बीजेपी की एक जनसभा होनी थी. वाजपेयी और आडवाणी ने नीतीश कुमार को भी इस जनसभा में निमंत्रित किया. इस जनसभा में नीतीश ने भी जनता को संबोधित किया था. इसके बाद साल 1996 के लोकसभा चुनाव में समता पार्टी और बीजेपी ने मिलकर चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में बीजेपी को 18, समता पार्टी को 6 सीटें मिली थीं. समता पार्टी ने यूपी-उड़िसा में भी एक-एक सीट जीती थी.
वाजपेयी सरकार में रेल मंत्री नीतीश कुमार
इस चुनाव में लालू यादव की पार्टी को 22 सीटों हासिल हुई थीं. इस चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार प्रधानमंत्री बने थे. 16 मई को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने की वजह से उन्हें 13वें दिन ही प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था. जिसके बाद कांग्रेस के सहयोग से एचडी देवगौड़ा की सरकार बनी, लेकिन देवगौड़ा के प्रधानमंत्री बनने के 10 महीने बाद ही कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई. फिर 21 अप्रैल 1997 को इंद्र कुमार गुजराल को प्रधानमंत्री बनाया गया. करीब 11 महीनों के बाद मार्च 1998 में गुजराल की सरकार भी गिर गई. 1998 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के खाते में 182 सीटें आईं और फिर से अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में एनडीए की सरकार बनी. इस सरकार में नीतीश कुमार को रेल मंत्री बनाया गया. 17 अप्रैल 1999 को केंद्र में वाजपेयी सरकार गिर गई.
2000 में नीतीश कुमार पहली बार बने CM
1998 के लोक चुनाव में बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी को 18 और उसकी सहयोगी बीजेपी को 23 सीटों पर जीत मिली थी. वहीं, लालू यादव की पार्टी आरजेडी सिर्फ 7 लोकसभा सीटों पर सिमट गई थी. यह पहला चुनाव था जब बिहार में नीतीश कुमार बीजेपी के सामने बराबर के सहयोगी बनकर उभरे थे. केंद्र में वाजपेयी की तीसरी बार सरकार बनी और नीतीश कुमार को कृषि मंत्री बनाया गया. इसके बाद 2000 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की समता पार्टी को 34 सीटों पर और सहयोगी बीजेपी को 67 सीटों पर जीत मिली थी. सबसे अधिक 124 सीटों पर लालू प्रसाद की आरजेडी को जीत मिली थी, लेकिन राज्यपाल विनोद पांडे ने लालू यादव की जगह नीतीश कुमार को सरकार बनाने का न्योता दिया. नीतीश कुमार ने 3 मार्च 2000 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन सिर्फ 7 दिन में उनकी सरकार गिर गई और राबड़ी देवी दोबारा सीएम बनीं.
JDU की स्थापना कब और कैसे हुई?
30 अक्टूबर 2003 को शरद यादव गुट की 'जनता दल' और 'समता पार्टी' का आपस में विलय हुआ और आधिकारिक तौर पर जनता दल (यूनाइटेड) का उदय हुआ. इसके बाद 2005 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए ने फिर चुनाव लड़ा और सबसे बड़े गठबंधन के रूप में उभरकर सामने आया. हालांकि, किसी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने पर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया. इसी साल फिर चुनाव हुए और नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए को पूर्ण बहुमत आया और नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री बने. इसके बाद से 15 अप्रैल 2026 तक वह बिहार के मुख्यमंत्री रहे और वर्तमान में उनके सहयोग से बीजेपी के सम्राट चौधरी सरकार चला रहे हैं. वहीं, दूसरी ओर आजतक लालू यादव की पार्टी सत्ता में नहीं आ सकी.