)
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अंबेडकर अस्पताल से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में पिछले दो महीनों में गर्भाशय फटने के 12 केस आने की सूचना मिली है. बता दें कि यह गर्भावस्ता या प्रसव के दौरा होने वाली गंभीर समस्या है.
गर्भाशय फटने से महिला को ज्यादा रक्तस्राव हो सकता है. साथ ही, बच्चे तक ऑक्सीजन नहीं पहुंचने से उसकी भी जान पर खतरा हो सकता है. ऐसी स्थिति में तुरंत ऑपरेशन या फिर किसी विशेषज्ञ से इलाज नहीं करवाया तो जच्चा-बच्चा दोनों की मौत होने के चांस ज्यादा बढ़ जाते हैं.
अंबेडकर अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल ने बताया कि जिन महिलाओं का पहले सीजेरियन ऑपरेशन यानी C-Section हो चुका है या फिर गर्भाशय की कोई अन्य सर्जरी हुई है, उनमें गर्भाशय फटने का खतरा ज्यादा रहता है.
उन्होंने आगे बताया कि प्रसव के दौरान गर्भाशय में संकुचन और दबाव बढ़ने के कारण पुराना हुआ ऑपरेशन का निशान वाला हिस्सा फट सकता है. हालांकि, पहले पहले सीजेरियन करा चुकी महिला को यह समस्या होने के चांस बहुत ही कम होते हैं. उन्होंने कहा कि सामान्य प्रसव के दौरान भी गर्भाशय फट सकता है. कई बार ऐसा होता है कि ज्यादा बार प्रसव होने के चलते यह समस्या हो सकती है.
डॉक्टर का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच नहीं कराना भी इस समस्या का कारण हो सकता है. साथ उन्होंने यह भी बताया कि बार-बार डॉक्टर या अस्पताल बदलना और पर्याप्त चिकित्सा सविधाओं के बिना प्रसव कराना भी परेशानी बढ़ा सकती है.
उन्होंने गर्भवती महिलाओं को सलाह दी है कि शुरुआत से ही प्रसूति विशेषज्ञ की निगरानी में रहना चाहिए. पहले सीजेरियन या गर्भाशय की सर्जरी हुई हो तो इसकी जानकारी डॉक्टर को जरूर दें, ताकि पुराने ऑपरेशन और मौजूद गर्भावस्ता की स्थिति के आधार पर सुरक्षित प्रसव की योजना बनाई जा सके.
डॉक्टर ज्योति जायसवाल ने गर्भाशय फटने के लक्षणों के बारे में विस्तार से बताया.
1. पेट में अचानक दर्द या लगातार दर्द
2. योनि से रक्तस्त्राव
3. चक्कर और बेहोशी
डॉक्टर ने कहा कि अगर गर्भावस्था के दौरान इनमें से कोई लक्षण दिखाई देता है. तो ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल में जाना चाहिए. हालांकि, हर मामलों में पहले से इस तरह के लक्षण नहीं दिखाई देते हैं. इसलिए जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का प्रसव ऐसे अस्पताल में कराना चाहिए, जहां आपातकालीन ऑपरेशन, रक्त चढ़ाने और नवजात को तत्काल उपचार देने की व्यवस्था हो.