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ललन सिंह मौन, अनंत सिंह Gone: वोटिंग से पहले तय हो गई थी कार्रवाई, MLC नतीजों से पहले हो गया निष्कासन

अनंत सिंह पर अब मुसीबतों का पहाड़ टूटने वाला है. सोमवार को ही अनंत सिंह और नीलम देवी को झटके पर झटके लगे. सबसे बड़ी बात यह है कि नीलम देवी का सरकारी आवास छिन गया तो फिर उनकी राजनीति कहां से संचालित होगी?

ललन सिंह मौन, अनंत सिंह Gone: वोटिंग से पहले तय हो गई थी कार्रवाई, MLC नतीजों से पहले हो गया निष्कासन
Image Credit: अनंत सिंह पर कार्रवाई की टाइमिंग (AI Image)

अनंत सिंह के निष्कासन के दो दिन बाद जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने स्पीकर से विधायकी भी रद्द करने की मांग की. इसके लिए सोमवार को उमेश कुशवाहा विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय पहुंचे और पार्टी की ओर से मांगपत्र सौंपा. इस पर अंतिम फैसला स्पीकर को लेना है. इस बीच, सोमवार को सरकार की ओर से अनंत सिंह को दो और झटके दिए गए. उनकी पत्नी नीलम देवी को 20 सूत्रीय समिति के सदस्य के पद से हटा दिया गया है. 20 सूत्रीय समिति के सदस्य के रूप में नीलम देवी को राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था, जो अब वापस हो गया है. दूसरी ओर, अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी के नाम आवंटित पटना का सरकारी आवास खाली करने को लेकर नोटिस भेजा गया है. 25 नवंबर, 2026 तक उन्हें आवास खाली करना होगा. इन सब कवायदों के बीच यह सवाल उठता है कि अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई करनी है, यह कब फिक्स हुआ और किसके बीच फिक्स हुआ, उसकी टाइमिंग कब तय की गई और कार्रवाई का स्वरूप क्या रहेगा, इस पर किसके किसके बीच बातचीत हुई थी?

मतदान से एक दिन पहले तय हो गई थी कार्रवाई

बिहार एमएलसी चुनाव के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था. उससे एक दिन पहले यह तय कर लिया गया था कि मोकामा के विधायक अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई करनी है. हालांकि, सूत्रों के अनुसार जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार जनता दल यूनाइटेड के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और ललन सिंह के बीच अनंत सिंह को नोटिस देने को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन जब कार्रवाई हुई तो सीधे निष्कासन का लेटर जारी कर दिया गया. इसमें अनंत सिंह का बड़बोलापन उन्हीं के खिलाफ चला गया. दरअसल, अनंत सिंह ने ललन सिंह को लेकर कहा था- 'कौन ललन सिंह. हम किसी ललन सिंह को नहीं जानते. बिहार में एक लाख लोगों का नाम ललन सिंह है.' यह बात कहते ही अनंत सिंह ने खुद के लिए सुरक्षा कवच तोड़ दिया और मतदान के अगले ही दिन उन्हें फायर कर दिया गया.

ले डूबा अनंत सिंह का बड़बोलापन

23 अक्टूबर को मतदान हुआ और 24 अक्टूबर को जनता दल यूनाइटेड ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था. निष्कासन का लेटर जारी होने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने ललन सिंह से मुलाकात भी की थी और कार्रवाई को लेकर उन्हें विश्वास में लिया था. चूंकि, अनंत सिंह ने ललन सिंह को लेकर भी 'कौन ललन सिंह' वाला बयान दिया था, लिहाजा वो भी मौन हो गए और इसलिए अनंत सिंह Gone हो गए. अनंत सिंह अगर ललन सिंह को लेकर बड़बोलापन न दिखाते तो शायद इतनी कड़ी कार्रवाई उनके खिलाफ न हो पाती.

9 मर्डर... वाली बात से भाजपा ने भी बनाया था दबाव

अनंत सिंह ने जिस तरह से पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशी नीरज कुमार के बदले जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार किया था, उसके बाद से पार्टी में माहौल लगातार उनके खिलाफ होता चला गया. सूत्र बता रहे हैं कि अनंत सिंह ने जब 9 मर्डर... वाली बात कही थी, उसके बाद से भारतीय जनता पार्टी की ओर से भी कार्रवाई का दबाव बढ़ गया था. ललन सिंह ने अनंत सिंह से सक्रियता न दिखाने को कहा था, जिसे अनंत सिंह ने अनसुना कर दिया था. चुनाव प्रचार के बीच में जनता दल यूनाइटेड की ओर से पार्टी के निर्देशों को मानने के लिए कहा गया था, जिसे अनंत सिंह ने अनसुना कर दिया था.

नोटिस को लेकर बनी थी सहम​ति, हो गया निष्कासन

अब सवाल उठता है कि जब संजय कुमार झा और ललन सिंह के बीच में नोटिस देने को लेकर सहमति बनी थी, तब निष्कासन की कार्रवाई क्यों की गई? सूत्र बताते हैं कि अगर अनंत सिंह ने ललन सिंह को लेकर बयानबाजी न की होती तो उन्हें नोटिस ही दिया जाता, लेकिन जब अनंत सिंह ने 'कौन ललन सिंह...' वाली बात कही, तब वे भी मौन हो गए और फिर पार्टी ने निष्कासन की कार्रवाई कर दी. शायद आलाकमान ने यह तय कर लिया था कि अनंत सिंह पर बड़ी कार्रवाई ही करनी है. सूत्र यह भी बताते हैं कि अनंत सिंह के निष्कासन का फैसला तब लिया गया, जब नीतीश कुमार ने 24 अक्टूबर को ललन सिंह से मुलाकात की थी.

पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने एमएलसी चुनावों के दौरान अनंत सिंह को पार्टी के निर्देशों के पालन करने को कहा था, लेकिन अनंत सिंह नहीं माने और अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार करते रहे. बताया जा रहा है कि अनंत सिंह पर कार्रवाई करके यह संदेश देना था कि अनुशासन तोड़ने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. दूसरी तरफ, संजय कुमार झा की बादशाहत को स्थापित करने की कोशिश के रूप में भी इस कार्रवाई को देखा जा रहा है. यह कार्रवाई अनंत सिंह पर कम, संदेश देने के लिए ज्यादा अहम था.

आईजी स्तर के अधिकारी को अनंत ​की फाइलें खोलने का निर्देश

इस कड़ी में सबसे बड़ी और अहम खबर यह है कि सरकार की ओर से बिहार पुलिस के तेजतर्रार आईपीएस और आईजी स्तर के अधिकारी को अनंत सिंह के खिलाफ तमाम फाइलों को खोलने का निर्देश दे दिया गया है. सूत्रों के ​अनुसार, यह अनंत सिंह मामले में अब तक की सबसे बड़ी खबर है. इसके बाद से समर्थकों और परिजन को अनंत सिंह की गिरफ्तारी की आशंका फिर से सताने लगी है. हालांकि, अनंत सिंह की तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी, क्योंकि किसी भी फाइल को ओपन कर प्रक्रिया में लाने में समय तो लगेगा ही.

कुल मिलाकर अनंत सिंह पर कार्रवाई के मामले में जनता दल आलाकमान के बीच कोई मतभेद नहीं था. संजय कुमार झा और ललन सिंह दोनों में सहमति थी, लेकिन सहमति केवल नोटिस देने को लेकर थी. कुछ सूत्र बताते हैं कि अनंत सिंह को लेकर ललन सिंह इसलिए नरम रुख रखते हैं, क्योंकि लोकसभा चुनाव, 2024 में अनंत सिंह ने पैरोल पर बाहर आकर ललन सिंह के पक्ष में प्रचार किया था. निष्कासन की बात जब ललन सिंह तक पहुंची, तो वे आश्चर्य में पड़ गए और बोले कि मुझे तो नोटिस के बारे में ही जानकारी थी. उसके बाद अनंत सिंह के समर्थकों की ओर से यह शिगूफा छोड़ा गया कि विधायक को निकालने से पहले नोटिस देना चाहिए और जारी पत्र में यह कहा जाना चाहिए कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की इसमें सहमति है. अनंत सिंह के समर्थक इसे पार्टी बायलॉज का उल्लंघन मान रहे हैं.

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About the Author

Sunil Mishra

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इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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