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राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने जा रही विपक्ष की बड़ी रैली का मुकाबला करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने एक बहुत बड़ा सियासी प्लान तैयार किया है. विपक्ष के इस शक्ति प्रदर्शन को बेअसर करने के लिए बीजेपी किसी भी तरह की कसर नहीं छोड़ना चाहती. इसके लिए पार्टी पूरे देश में बड़े पैमाने पर पदयात्राएं निकालने जा रही है, ताकि अपनी बात सीधे जनता तक पहुंचाई जा सके.
बीजेपी की इस राष्ट्रव्यापी योजना में पार्टी के लगभग सभी बड़े और प्रभावशाली चेहरे जमीन पर नजर आएंगे. जनता से सीधा संवाद कायम करने के लिए पार्टी ने अपने केंद्रीय मंत्रियों और राज्यों के मुख्यमंत्रियों को अलग-अलग शहरों में तैनात किया है. विचार यह है कि अपने सबसे प्रमुख नेताओं को जनता के बीच भेजकर विपक्ष की रैली से बनने वाले माहौल का मजबूती से जवाब दिया जाए.
बीजेपी का यह पदयात्रा अभियान सिर्फ एक या दो दिन का नहीं होगा, बल्कि पूरे एक महीने तक चलेगा. 1 नवंबर से शुरू होकर यह पदयात्राएं 30 नवंबर तक देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित की जाएंगी. इस लंबे अभियान के ज़रिए बीजेपी देश के कोने-कोने तक अपनी पहुंच बनाना चाहती है.
1 नवंबर को पदयात्रा की शुरुआत के साथ ही दिग्गज नेता अपनी-अपनी जिम्मेदारियां संभालेंगे:
योगी आदित्यनाथ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1 नवंबर को राजधानी लखनऊ में पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे.
हिमंता बिस्वा शर्मा: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पदयात्रा में शामिल होंगे.
BJP के अन्य बड़े चेहरे: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी 1 नवंबर को देश के अलग-अलग प्रमुख शहरों में जनता के बीच सड़कों पर उतरेंगे.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस अभियान में प्रमुख भूमिका निभाएंगे. वे 2 नवंबर को तेलंगाना के हैदराबाद में होने वाली पदयात्रा में हिस्सा लेंगे. इसके बाद 5 नवंबर को वे हरियाणा के करनाल पहुंचेंगे और वहां आयोजित पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे.
सियासी हलचल के बीच, 1 नवंबर के दिन ही सिख समुदाय द्वारा भी एक विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई गई है. इस वजह से 1 नवंबर का दिन देश की राजनीति और सामाजिक गतिविधियों के लिहाज से बेहद अहम रहने वाला है.