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Nine To Five Series Review: जीत के करीब पहुंचकर भी, पीछे रह जाने वालों की कहानी है 'नाइन टू फाइव'

'नाइन टू फाइव' सिर्फ ऑफिस की राजनीति और कामकाज की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की जिंदगी भी दिखाती है जो जीत के करीब पहुंचकर पीछे रह जाते हैं. सीरीज में महत्वाकांक्षा, संघर्ष और सफलता की दौड़ के बीच रिश्तों और भावनाओं को भी जगह दी गई है.

Nine To Five Series Review: जीत के करीब पहुंचकर भी, पीछे रह जाने वालों की कहानी है 'नाइन टू फाइव'
Image Credit: सोशल मीडिया

Nine To Five Web Series

कलाकार: प्रीत कमानी, राजेश कुमार, भाग्यश्री लिमये, अजितेश गुप्ता, तान्या शर्मा

प्लेटफॉर्म: ऑल राइट यूट्यूब चैनल

रेटिंग: 3 स्टार्स

Nine To Five Web Series: जिंदगी में कुछ लोग ऐसे होते हैं,जो हर बार मंजिल के बेहद करीब पहुंचते हैं, लेकिन आखिरी कदम पर पीछे रह जाते हैं. कभी पढ़ाई में दूसरा स्थान,कभी प्यार में अधूरी कामयाबी और कभी करियर में अपनी पहचान बनाने की जद्दोजहद.‘नाइन टू फाइव’ का अनुज भी ऐसा ही एक युवा है,जिसकी जिंदगी में ‘ऑलमोस्ट’ शब्द ने जैसे स्थायी जगह बना ली है. एक स्टार्टअप में नौकरी मिलने के बाद उसे लगता है कि शायद अब उसकी जिंदगी बदलने वाली है, लेकिन आगे बढ़ने की चाह में उसे ऐसे फैसलों और परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जिनका असर उसके रिश्तों पर भी पड़ता है. आइए,जानते हैं कैसी है ‘नाइन टू फाइव’.

कहानी

कहानी की शुरुआत अनुज (प्रीत कमानी) के नौकरी के इंटरव्यू से होती है. किवी एप नाम के स्टार्टअप में इंटरव्यू देने पहुंचा अनुज घबराया हुआ है. वह बार-बार अपनी टाई ठीक करता है,माथे का पसीना पोंछता है और अपनी बारी आने का इंतजार करता है. कंपनी के मार्केटिंग और स्ट्रैटेजी हेड दीपक (राजेश कुमार) अपने दिलचस्प अंदाज में उसका इंटरव्यू लेते हैं और अनुज को नौकरी मिल जाती है.

इंटरव्यू के दौरान अनुज अपनी जिंदगी के एक दिलचस्प पहलू का जिक्र करता है. उसका दोस्त सूजल उसे ‘ऑलमोस्ट कुमार’ कहकर बुलाता है, क्योंकि वह बचपन से लेकर अब तक लगभग हर काम में सफलता के करीब पहुंचकर भी थोड़ा पीछे रह जाता है. यही बात इस सीरीज की कहानी को एक अलग पहचान देती है. अनुज की जिंदगी में बार-बार दोहराया जाने वाला यह अनुभव कहानी का मुख्य आधार बनता है.नई नौकरी मिलने पर अनुज को लगता है कि आखिरकार उसकी किस्मत बदल रही है. वह इस खुशी को मनाने के लिए बीयर लेकर अपने किराये के फ्लैट पर पहुंचता है, लेकिन वहां उसका फ्लैटमेट सूजल उसे बताता है कि मकान मालिक ने घर खाली करने के लिए कह दिया है. खुशियों के बीच अचानक आई यह परेशानी अनुज के लिए एक और झटका बन जाती है.

ऑफिस में अगले दिन उसकी मुलाकात यशस्विनी उर्फ यश (भाग्यश्री लिमये) से होती है. यश कंपनी की तेज-तर्रार और जिम्मेदार कर्मचारियों में से एक है और अपने वरिष्ठ अधिकारियों के बीच अच्छी पहचान रखती है.एक दिन काम के दौरान निराश अनुज को दीपक समझाते हैं कि उसे नौकरी शुरू किए अभी एक महीना ही हुआ है
लेकिन अनुज की परेशानी इससे कहीं बड़ी है. वह बताता है कि यह सिर्फ एक महीने की बात नहीं, बल्कि उसकी पूरी जिंदगी का अनुभव है. वह हर बार जीत के करीब पहुंचकर भी पीछे रह जाता है.

दीपक उसे इसी सोच से बाहर निकलने का रास्ता दिखाता है.उसका कहना है कि ‘ऑलमोस्ट’ होना भी किसी उपलब्धि से कम नहीं, क्योंकि इसका मतलब है कि मंजिल बहुत दूर नहीं है.इसके बाद वह दोबारा काम पर ध्यान लगाता है और अपनी समस्या का समाधान खोजने में सफल होता है. इसी दौरान अनुज की दोस्ती पड़ोस में रहने वाली एक खूबसूरत लड़की (तान्या शर्मा) से होती है. उसकी जिंदगी धीरे-धीरे आगे बढ़ती दिखाई देती है, लेकिन तीसरे एपिसोड में कहानी एक अप्रत्याशित मोड़ लेती है. अनुज को अपनी गर्लफ्रेंड के पास कुछ ऐसे डिजाइन और कागजात दिखाई देते हैं, जिन्हें देखकर वह चौंक जाता है. आखिर इन कागजात का राज क्या है और इसका अनुज की जिंदगी से क्या संबंध है? यह जानने के लिए सीरीज के सभी एपिसोड देखने होंगे.

अभिनय

प्रीत कमानी सीरीज के केंद्र में हैं और अनुज के किरदार को सहजता से निभाते हैं. वह एक ऐसे युवक की मानसिक उलझन,असुरक्षा और महत्वाकांक्षा को सामने लाते हैं, जो लगातार खुद को साबित करने की कोशिश कर रहा है. उनके अभिनय में एक आम युवा की बेचैनी और आगे बढ़ने की जिद दिखाई देती है. यही वजह है कि अनुज का किरदार दर्शकों से जुड़ने में सफल रहता है.

भाग्यश्री लिमये यश के किरदार में प्रभावशाली हैं. उनकी सहज संवाद अदायगी, आत्मविश्वास और चेहरे के भाव किरदार को आकर्षक बनाते हैं. राजेश कुमार दीपक के रूप में अपनी छाप छोड़ते हैं.उनका सहज अंदाज और संवादों की अदायगी किरदार को विश्वसनीय बनाती है. वह जहां जरूरत होती है, वहां हास्य का पुट लाते हैं, वहीं अनुज को समझाने वाले दृश्यों में भावनात्मक गहराई भी नजर आती है. उनके किरदार के जरिए सीरीज काम और जिंदगी को देखने का एक सकारात्मक नजरिया सामने रखती है.सीरीज में ऑफिस की चुनौतियों के साथ हास्य, रोमांस और भावनात्मक प्रसंग भी शामिल हैं. इससे कहानी का दायरा बढ़ता है और अनुज का संघर्ष केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहता. उसके अनुभव यह भी दिखाते हैं कि कामयाबी पाने की कोशिश में इंसान किस तरह अपनी निजी जिंदगी और रिश्तों को प्रभावित कर सकता है.

सीरीज का संदेश भी इसकी कहानी की तरह सीधा है...कामयाबी का मतलब हमेशा पहला स्थान हासिल करना नहीं होता. कई बार मंजिल के करीब पहुंचना भी इस बात का संकेत है कि आप सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. जरूरी है कि इंसान अपनी गलतियों से सीखे, खुद पर भरोसा बनाए रखे और कोशिश करना न छोड़े.रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कहानी और सकारात्मक सोच वाला मनोरंजन पसंद करने वालों के लिए यह वेब सीरीज एक अच्छा विकल्प है।

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About the Author

Swati Singh

Swati Singh

स्वाति सिंह एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह Zee News Hindi की डिजिटल टीम के एंटरटेनमेंट (मनोरंजन) सेक्शन में काम कर रही हैं. स्वाति की एक्सपर्टीज बॉलीवुड न्यूज़, सिनेमा, एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ट्रेंड्स और सेलेब्स की इन-डेप्थ रिपोर्टिंग में है.अपने करियर के दौरान स्वाति ने आयुष्मान खुराना, नीना गुप्ता, गजराज राव और ध्वनि भानुशाली जैसी कई जानी-मानी बॉलीवुड और म्यूजिक इंडस्ट्री की हस्तियों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं. Zee News से पहले उन्होंने अमर उजाला, लाइव हिंदुस्तान और लोकमत जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं, जहां काम के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया है.माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से मास कम्युनिकेशन और सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की डिग्री हासिल करने वाली स्वाति, मनोरंजन जगत की खबरों को पाठकों तक रोचक और सटीक ढंग से पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.आप स्वाति सिंह से swati.kumari@india.com पर सीधे ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
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