उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. सभी दल अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं. नीतियां और रणनीतियां बन रही हैं. सामने वाली पार्टी को घायल करने के लिए बयानों के तीर छोड़े जा रहे हैं. दावे और प्रतिदावे का सिलसिला सा चल पड़ा है. इस बीच बिहार से खबर आ रही है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड भी 60 सीटों पर दावा ठोक सकती है. पार्टी नेता और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री का अक्टूबर महीने में वाराणसी में एक बड़ा जलसा करने का कार्यक्रम बन रहा है. 2022 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी मैदान में कूदी थी, लेकिन कोई खास करिश्मा नहीं कर पाई थी. 27 विधानसभा सीटों पर पार्टी ने उम्मीदवार दिए थे, लेकिन एक सीट को छोड़कर किसी भी सीट पर जमानत तक नहीं बच पाई थी. खास बात यह है कि बिहार में जिस पार्टी का पिछले 20 साल से सिक्का चल रहा है, उसका उत्तर प्रदेश में इतना खराब परफॉरमेंस चौंकाता है.
यूपी विधानसभा चुनाव 2022: 27 सीटों पर जेडीयू का परफॉरमेंस:
| क्र. | विधानसभा क्षेत्र | नाम | वर्ग | वोट |
|---|---|---|---|---|
| 1 | बिलासपुर | जगदीश शरण पटेल | सामान्य | 522 |
| 2 | बिसवां | रामकिशोर वर्मा | सामान्य | 302 |
| 3 | लखनऊ कैंट | आशीष सक्सेना | सामान्य | 118 |
| 4 | सलोन (सैलों) | अमित कुमार | अनुसूचित जाति | 528 |
| 5 | जगदीशपुर | दिनेश कुमार | अनुसूचित जाति | 346 |
| 6 | फर्रुखाबाद | वरुण अशोक सक्सेना | सामान्य | 168 |
| 7 | महरौनी (मेहरोनी) | कैलाश | अनुसूचित जाति | 997 |
| 8 | रामपुर खास | लालजी | सामान्य | 301 |
| 9 | रानीगंज | संजय कुमार उर्फ संजय राज पटेल | सामान्य | 526 |
| 10 | जलालपुर | रमेश कुमार मिश्रा | सामान्य | 246 |
| 11 | शोहरतगढ़ (सोहरतगढ़) | ओमप्रकाश | सामान्य | 1,684 |
| 12 | डुमरियागंज | पवन कुमार | सामान्य | 542 |
| 13 | तमकुही राज | श्रीकांत सिंह | सामान्य | 597 |
| 14 | कुशीनगर | श्रीनारायण | सामान्य | 354 |
| 15 | पथरदेवा (पत्थरदेवा) | संदीप कुमार माल | सामान्य | 690 |
| 16 | भाटपार रानी (भटपर रानी) | रामाश्रय राजभर | सामान्य | 488 |
| 17 | घोसी | विक्रम चौहान | सामान्य | 605 |
| 18 | फेफना | अवलेश | सामान्य | 621 |
| 19 | मल्हनी (मल्हानी) | धनंजय सिंह | सामान्य | 79,830 |
| 20 | मड़ियाहू (मडिआहू) | सुशील कुमार पटेल | सामान्य | 780 |
| 21 | जहूराबाद | अरविंद वर्मा | सामान्य | 1,322 |
| 22 | रोहनिया | सुशील कश्यप | सामान्य | 1,375 |
| 23 | भदोही | दीयम सिंह गहरवार | सामान्य | 881 |
| 24 | मझवां (मझावां) | डॉ. अखिलेश कुमार द्विवेदी | सामान्य | 899 |
| 25 | चुनार | संजय सिंह पटेल | सामान्य | 808 |
| 26 | मड़िहान | डॉ. अरविंद पटेल | सामान्य | 1,649 |
| 27 | घोरावल | अनिता | अनुसूचित जाति | 559 |
मुख्य आधार कुर्मी और कुशवाहा वोट बैंक
दरअसल, बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का मूल आधार कुर्मी और कुशवाहा वोटर हैं. इसके अलावा, बिहार में पार्टी को कुछ मुस्लिम वोट भी मिल जाते हैं. साथ ही, भारतीय जनता पार्टी के साथ होने से सवर्ण वोट बैंक भी नीतीश कुमार की पार्टी के उम्मीदवारों के खातों में जाता है. अगर वह राजद के साथ होते हैं तो यादव और मुसलमान का एकमुश्त वोट मिल जाता है.
यूपी बीजेपी के पास कई कुर्मी नेता
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में कुर्मियों की राजनीति करने के लिए अनुप्रिया पटेल पहले से मौजूद हैं. इसके अलावा, बीजेपी ने भी पिछले कुछ समय में कई कुर्मी नेताओं को आगे किया है. अभी तो उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी खुद कुर्मी समाज से आते हैं. इसके साथ ही, बरेली से सांसद छत्रपाल गंगवार हैं, जो संतोष गंगवार के सियासी उत्तराधिकारी माने जाते हैं. पार्टी में स्वतंत्रदेव सिंह, जगदीश पटेल और प्रवीण पटेल भी कुर्मी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. इसलिए उत्तर प्रदेश में भाजपा को नीतीश कुमार की पार्टी की जरूरत नहीं पड़ती.
मुसलमान जेडीयू को वोट देने से रहा
मुसलमानों की बात करें तो एक बड़ा तबका अखिलेश यादव के नेतृत्व वाले समाजवादी पार्टी के साथ है तो कांग्रेस और बसपा को भी मुसलमानों का वोट मिलता रहा है. ऐसे में जनता दल यूनाइटेड के लिए उत्तर प्रदेश में अपनी पैठ बनाना आसान नहीं दिख रहा है. अब तो नीतीश कुमार उतने सक्रिय भी नहीं रहे, जो भोजपुरी बेल्ट में सुशासन बाबू के नाम से जाने जाते रहे हैं.
निशांत कुमार का लिटमस टेस्ट
जनता दल यूनाइटेड की धुरी अब संजय कुमार झा, ललन सिंह और निशांत कुमार के इर्द-गिर्द घूम रही है. संजय कुमार झा परदे के पीछे के खिलाड़ी माने जाते हैं तो निशांत कुमार के लिए खुद को साबित करना अभी बाकी है. उत्तर प्रदेश एक तरह से उनके लिए सियासी लिटमस टेस्ट साबित हो सकता है, क्योंकि उनके राजनीति में आने के बाद यह जेडीयू के लिए पहला बड़ा चुनाव होगा.
भाजपा से प्रेशर पॉलिटिक्स
हालांकि, जेडीयू की ओर से 2027 के विधानसभा चुनावों में 60 सीटों पर लड़ने का दावा करना प्रेशर पॉलिटिक्स माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेडीयू ऐसा दावा करके उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा से कुछ सीटें हासिल करना चाहती है. जेडीयू आलाकमान को पता है कि उत्तर प्रदेश में अगर अकेले चुनावी मैदान में गए तो 2022 वाला हाल हो जाएगा. इसलिए पार्टी की कोशिश है कि भाजपा पर दबाव बनाकर एनडीए के बैनर तले कुछ सीटों में चुनाव लड़ा जाए, ताकि कम से कम पड़ोसी राज्य में खाता खुल सके.