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Bhava Brihaspati: जानिए उस महान आचार्य की कहानी, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर को बनाया था अमर

काशी के महान पाशुपत आचार्य भाव बृहस्पति ने राजा कुमारपाल के सहयोग से जर्जर सोमनाथ मंदिर को फिर से बनवाया था. उन्होंने मंदिर परिसर और नए शहर का विस्तार कर इसे अमर तीर्थ बना दिया था.

Bhava Brihaspati: जानिए उस महान आचार्य की कहानी, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर को बनाया था अमर

सोमनाथ मंदिर के बारे में तो हम सबने सुना है. ये 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. ये मंदिर कई बार टूटा कई बार बना.

लेकिन आज हम एक ऐसे महाज्ञानी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने मंदिर को फिर से बनवाया था. जिसके बाद से मंदिर अमर हो गया.

इस मंदिर को फिर से बनवाने वाले महाज्ञानी भाव बृहस्पति थे. इन्हें पासुपत संप्रदाय का सबसे बड़ा आचार्य माना जाता था.

इतना ही नहीं लोग इन्हें नंदीश्वर का अवतार मानते थे. इनका जन्म काशी में हुआ था. जब ये छोटे थे तभी से ये तपस्या करते थे.

इसी वजह से इन्हें बहुत कम उम्र में ज्ञान की प्राप्ति हो चुकी थी. इन्होंने अपनी पूरी जिंदगी तीर्थयात्राएं की और कई राजाओं को भगवान शिव की भक्ति का मार्ग दिखाकर मंदिरों का निर्माण कराया.

मालवा से गुजरात तक की महान यात्रा

इनके शुरुआती जिंदगी की बात करें तो काशी, कान्यकुब्ज और उज्जैन बीता था. उज्जैन में उन्होंने परमार वंश के राजाओं को अपना शिष्य बनाया था. वहां के मठों और मंदिरों की देखभाल की.

आगे चलकर गुजरात के चालुक्य राजा जयसिंह सिद्धराज ने मालवा पर विजय प्राप्त की थी.

वो भाव बृहस्पति के ज्ञान से बेहद प्रभावित थे. चालुक्य नरेश जयसिंह ने 40 वर्ष की आयु वाले इस महान आचार्य को आदरपूर्वक अपना गुरु बना लिया.

राजा जयसिंह ने ही उन्हें सोमनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी यानी प्रधान महत्तर की बड़ी जिम्मेदारी दे दी थी.

राजा कुमारपाल के शासन में मिला नया जीवन

राजा जयसिंह की मृत्यु के बाद उनके बेटे राजा कुमारपाल ने गुजरात की सत्ता संभाल ली. कुमारपाल भी भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त थे और सोमनाथ को अपने साम्राज्य का रक्षक मानते थे.

जब भाव बृहस्पति ने जर्जर हो चुके सोमनाथ मंदिर को फिर से बनाने का विचार राजा के सामने रखा, तो वे तुरंत तैयार हो गए.

साल 1169 के भद्रकाली शिलालेख के अनुसार, राजा कुमारपाल ने आचार्य का खुद अपने हाथों से सत्कार किया.

राजा ने उन्हें मोतियों की माला पहनाई, चंदन लगाया और अपनी शाही अंगूठी भेंट कर सोमनाथ मंदिर को फिर से बनाने का काम सौंप दिया.

कैलाश पर्वत जैसा भव्य बना सोमनाथ मंदिर

भाव बृहस्पति के मार्गदर्शन में सोमनाथ मंदिर को ऐसे बनाया गया कि वे कैलाश पर्वत की तरह चमक उठा.

राजा कुमारपाल ने आचार्य की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें गंड की उपाधि दी. इसके साथ ही उनके परिवार के लिए ब्रह्मपुरी नामक एक गांव दान में दिया.

मंदिर के रखरखाव और नियमित पूजा-पाठ के लिए भाव बृहस्पति ने 505 संतों का सम्मान किया और व्यवस्था बनाई.

पुनर्निर्मित मंदिर इतना विशाल और भव्य था कि उसकी तुलना धरती का उद्धार करने वाले भगवान वराह के स्वरूप से की जाने लगी.

somnath temple

मंदिर के आसपास बसाया नया शहर और किला

मंदिर को फिर से बनवाने के बाद भी भाव बृहस्पति रुके नहीं. उन्होंने मंदिर की सुरक्षा के लिए उत्तर और दक्षिण दिशा में एक मजबूत किला बनवाया.

गौरी, भीमेश्वर, सिद्धेश्वर और कपर्दी जैसे अन्य देवी-देवताओं के मंदिरों पर सोने के कलश स्थापित कराए.

मंदिर की रसोई और भगवान के अभिषेक के लिए पवित्र सरस्वती नदी के पानी का एक बड़ा जलाशय खुदवाया था.

उन्होंने मंदिर के सामने सुंदर नक्काशीदार खंभों वाला एक विशाल मंडप बनवाया. इसके साथ ही पापमोचन विष्णु मंदिर को भी फिर से बनवाया था.

सोमनाथ को बनाया ज्ञान और धर्म का केंद्र

आचार्य भाव बृहस्पति ने सोमनाथ के पास ही एक नया शहर स्थापित किया. वहां उन्होंने चंडिका देवी का एक नया मंदिर बनवाया और दो बड़े जलाशय खुदवाए.

इनमें से अमृत वापी नामक मीठे पानी की बावड़ी इतनी सुंदर थी कि उसके पानी की तुलना अमृत से की जाती थी.

अपने इस भागीरथ प्रयास से भाव बृहस्पति ने सोमनाथ को न केवल एक महान तीर्थस्थल बनाया, बल्कि उसे शिक्षा और ज्ञान का भी बड़ा केंद्र बना दिया.

राजा कुमारपाल और जनता के सहयोग से सोमनाथ मंदिर अपनी शिखर पर पहुंचा था.

(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी 1169 ईस्वी के भद्रकाली शिलालेख और ऐतिहासिक ग्रंथों में दर्ज अभिलेखों पर आधारित है.
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Harsh Singh

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हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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