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जेडीयू में अनंत सिंह और नीरज कुमार का विवाद सुलझने का नाम नहीं ले रहा है. इससे पार्टी पर आगामी MLC चुनाव में भारी नुकसान होने का खतरा मंडरा रहा है. इस खतरे को देखते हुए अब पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद मैदान में उतर चुके हैं. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज (सोमवार, 5 अक्टूबर) की सुबह-सुबह केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के घर पहुंचे. यहां दोनों नेताओं के बीच करीब 15 मिनट तक बातचीत हुई. इसके बाद वह वापस लौट गए. इस मुलाकात का मकसद क्या था और मुलाकात के दौरान किन मु्द्दों पर चर्चा हुई, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई, लेकिन सियासी जानकारों का मानना है कि अनंत सिंह और नीरज कुमार के मुद्दे पर चर्चा जरूर हुई होगी. ललन सिंह से नीतीश कुमार की मुलाकात के बाद अब इस विवाद में समझौते की गुंजाइश नजर आने लगी है.
नीरज कुमार का खुला विरोध कर रहे अनंत सिंह
दरअसल, मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह खुलेआम नीरज कुमार का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने साफ कहा है कि वह नीरज कुमार को हराकर मानेंगे. इसके बावजूद वह खुद को पार्टी का समर्पित नेता बता रहे हैं. उनका कहना है कि एमएलसी चुनाव में पार्टी के निशान पर चुनाव नहीं लड़ा जाता है, इसलिए नीरज कुमार के विरोध को पार्टी का विरोध कहना, गलत है.
नीरज कुमार के साथ खड़ी है जेडीयू
उधर, दूसरी ओर नीरज कुमार को पार्टी का पूरा समर्थन हासिल हो रखा है. नीतीश कुमार ने खुद उनको समर्थन पत्र देकर साफ कर दिया था कि पार्टी उनके साथ है. इसके बावजूद अनंत सिंह और नीरज कुमार कोई भी झुकने को तैयार नहीं है.
क्या ललन सिंह करा पाएंगे दोनों में समझौता?
वहीं, दो दिग्गज नेताओं के झगड़े में पार्टी की छवि को काफी नुकसान हो रहा है. इस विवाद को समाप्त करने के लिए पार्टी प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा से लेकर कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, तक अपनी-अपनी कोशिश कर चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका. संजय झा को जब इसमें सफलता नहीं मिली तो उन्होंने केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के कंधे पर यह जिम्मेदारी डाल दी, जबकि ललन सिंह ने साफ पल्ला छाड़ लिया.
एक कार्यक्रम में ललन सिंह ने साफ कहा कि वह तभी समाधान करेंगे, जब उनमें (अनंत सिंह और नीरज कुमार) की ओर से कोई आएगा. ललन सिंह के इस बयान से पार्टी की आखिरी उम्मीद भी समाप्त हो गई थी. इसके बाद अब नीतीश कुमार ने ललन सिंह से मुलाकात की है. अब देखना होगा कि क्या वह इस विवाद में समझौता करा पाएंगे या नहीं.