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बिहार की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2 अक्टूबर 2006 को 'जीविका दीदी' योजना लॉन्च की थी. इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों की महिलाओं के छोटे-छोटे समूह बनाए गए और उन्हें अपना रोजगार खोलने के लिए काफी कम ब्याज दरों पर लोन दिया गया. इस काम में बिहार सरकार ने विश्व बैंक से वित्तीय सहायता ली थी. वर्तमान समय में प्रदेश की 1 करोड़ 27 लाख महिलाएं 'जीविका' से जुड़ी हैं और विभिन्न तरह का कार्य करके आत्मनिर्भर हो गई हैं. बिहार में इस योजना के हिट होने पर केंद्र ने भी इसे अपनाया है. आज यह योजना राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास का एक बड़ा उदाहरण बन गया है. अब दुनिया के 9 देश इसे अपनाने की तैयारी में हैं.
जीविका दीदियां सालाना करोड़ों का कारोबार कर रहीं
बिहार की जीविका दीदी समूह से जुड़ी महिलाओं ने शुरुआती दिनों में 10–20 हजार रुपये का लोन लेकर छोटे काम जैसे पशुपालन, सब्जी की खेती और हस्तशिल्प शुरू किए. धीरे-धीरे इन समूहों ने ताकत पाई और बिहार की जीविका दीदियां अपनी परिश्रम के बूते हर क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं. जीविका प्रशासन के अनुसार, बिहार की जीविका दीदियों का कुल कारोबार अब 10 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. कृषि, शिल्प कला और अन्य छोटे व्यवसायों के जरिए उन्होंने अपनी आमदनी बढ़ाई है. कई दीदियों ने मिलकर कंपनियां बनाईं और अब उनका सालाना कारोबार लाखों और करोड़ों में पहुंच चुका है.
कंपनी चलाने में बिहार की जीविका दीदियां पूरे देश में सबसे आगे हैं. जीविका दीदियां आज राज्यभर में 70 कंपनियां चला रही हैं. शुरुआत भले ही उन्होंने 10 हजार रुपये के छोटे लोन से की थी, लेकिन मेहनत और लगन से अब खुद की कंपनियां खड़ी कर देशभर में अव्वल स्थान हासिल किया है. हिमांशु शर्मा, मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जीविका
देश में पहले स्थान पर हैं बिहार की जीविका दीदियां
हिमांशु शर्मा ने बताया कि खुद की कंपनी चलाने में बिहार की दीदियां पूरे देश में पहले स्थान पर हैं, जबकि आंध्र प्रदेश की दीदियां दूसरे नंबर पर हैं. आंध्र की दीदियां 15 कंपनियां चलाकर स्वरोजगार कर रही हैं, वहीं बिहार की दीदियां 70 कंपनियों की संचालन कर रही हैं.
जीविका दीदियां केवल अपने परिवार का सहारा ही नहीं, बिहार के प्रगति की रीढ़ भी बन चुकी हैं. जीविका स्टिचिंग कंपनी से जुड़ी हजारों दीदियों ने आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए 90 लाख से अधिक ड्रेसेज सिलकर इतिहास रचा है. दीदियों के पसीने और लगन से मिली इस आर्थिक आजादी ने बिचौलियों का अंत कर सीधे ग्रामीण परिवारों के जीवन में खुशहाली और स्वाभिमान का नया सवेरा लाने का काम किया है. - श्रवण कुमार, मंत्री, बिहार सरकार
अब 9 देश इस मॉडल को अपनाने की तैयारी में
आंकड़े बताते हैं कि बिहार में 'जीविका दीदी' से पिछले दो दशकों में लाखों लोगों की जिंदगी बेहतर हुई है. जीविका दीदियों को अब तक 71,046 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया है, जिसकी रिकवरी 98.6% रही है. अब दक्षिण अफ्रीका, रवांडा, युगांडा समेत 9 देश जीविका दीदी मॉडल को अपनाने की तैयारी में हैं. इन देशों ने जीविका मॉडल का अध्ययन करने में रुचि दिखाई है. अक्टूबर 2025 में इथियोपिया सरकार ने अपनी एक टीम को भारत भेजा था. यह टीम यहां यह समझने आई थी कि जीविका दीदी कैसे एकजुट होकर काम करती हैं. उन्हें स्थानीय शासन और बैंकिंग सुविधाओं का फायदा कैसे मिलता है. नाइजीरिया की सरकार ने भी 'जीविका दीदी' की तर्ज पर एक योजना की शुरुआत की है. बता दें कि अफ्रीकी देशों में आज भी काफी गरीबी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफ्रीकी देशों में 1.4 अरब की आबादी रहती है. यह दुनिया की कुल आबादी का 17 प्रतिशत हिस्सा है. अगर इन देशों ने 'जीविका दीदी' को सही तरह से अपना लिया, तो उनके यहां गरीबी को काफी हद तक कम किया जा सकता है.