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एटम बम का घमंड धड़ाम: भारत की परमाणु पावर से 'जिन्नालैंड' में हड़कंप; बिलबिला उठे सियासतदान

ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान बुरी तरह पिटा. यह बात पूरी दुनिया जानती है. इसी के साथ उसका परमाणु बम वाला अहंकार भी चकनाचूर हो गया. लेकिन पाकिस्तान अब फिर से फन उठा रहा है. एक बार फिर उसने भारत को एटमी धमकी दी है.

एटम बम का घमंड धड़ाम: भारत की परमाणु पावर से 'जिन्नालैंड' में हड़कंप; बिलबिला उठे सियासतदान
Image Credit: पाकिस्तान एक बार फिर भारत की ताकत से घबराया हुआ है.

ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान के परमाणु अहंकार का भ्रम दूर कर दिया था. लेकिन बीतते वक्त के साथ पाकिस्तान ने अब फिर से सिर उठाना शुरू कर दिया है.असल में पाकिस्तान के हुक्मरान अपनी हैसियत को लेकर बहुत कंफ्यूज हैं.उन्हें अपनी परमाणु ताकत का इतना दंभ है कि हिन्दुस्तान को बार-बार एटम बम वाली गीदड़भभकी देते हैं.आर्मी चीफ आसिम मुनीर,रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बाद अब पाकिस्तान के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल खालिद किदवई ने फिर से वहीं फसाना दोहराया है कि हमारे पास एटम बम है .

भारत की ताकत से डरा रिटायर्ड जनरल

पाकिस्तान के रिटायर जनरल खालिद किदवई ने इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम में सिप्री की रिपोर्ट के हवाले से चेतावनी दी कि भारत ने अपनी सबमरीन में परमाणु बम तैनात किया है.ये भारत के 'डेटरेंस पेट्रोल' का हिस्सा है. इस पूर्व जनरल का दावा है कि भारत रणनीतिक संतुलन को बदलने की कोशिश कर रहा है, जिससे दक्षिण एशिया में खतरा काफी बढ़ गया है.पूर्व पाकिस्तानी जनरल की ही भाषा पाकिस्तानी मीडिया भी बोल रही है. डॉन अखबार के एक्सपर्ट ने लिखा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच खराब द्विपक्षीय संबंधों को देखते हुए हमेशा ही हालात के बिगड़ने का खतरा है.

एटमी धमकी को भारत ने नहीं दी तवज्जो

बात-बात में एटम बम की बात करना पाकिस्तान की आदत में शुमार है. लिहाजा जनरल खालिद किदवई की गीदड़भभकी को हिन्दुस्तान रत्तीभर भी तव्वजो नहीं देता.हां, पाकिस्तान के जेहन में ये डर अगर बैठा है कि हिन्दुस्तान ने अपनी पनडुब्बियों पर न्यूक्लियर वॉरहेड की तैनाती कर रहा है तो ये डर अच्छा है.पाकिस्तान जैसे मुल्क के पास परमाणु बम की चाबी जिन शक्तियों के हाथ है, वो सिर्फ हिन्दुस्तान के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा है.

पाकिस्तान इन दिनों आंतरिक विरोधों से घिरा हुआ है.जनता का ध्यान भटकाने के लिए वो पुराने तरकीबों को फिर अपना रहा है.पाकिस्तान के एक और पूर्व जनरल सैयद आमिर रजा ने भी पिछले हफ्ते परमाणु वाली धमकी दी थी, जबकि जमीनी हकीकत ये है कि पाकिस्तान वाले परमाणु बम की ताकत को लेकर पिक्चर क्लियर नहीं है कि चलेंगे भी या फुस्स बम साबित होंगे.बहरहाल, अब समझिए पाकिस्तान की नई एटम बम वाली धमकी के पीछे की इनसाइड स्टोरी.

28 साल से दे रहे परमाणु धमकी

दुनिया के लिए ये तारीख परमाणु इतिहास का सबसे स्याह पन्ना है.ये वही मनहूस तारीख थी, जब पाकिस्तान ने बलूचिस्तान के रस कोह पहाड़ियों पर परमाणु परीक्षण किया था.

तब से लेकर 28 साल गुजर गए.शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब पाकिस्तानी जनरलों,हुक्मरानों और मौलानाओं ने हिंदुस्तान को परमाणु बम वाली गीदड़भभकी न दी हो. इस कड़ी में नया नाम है पाकिस्तान के पूर्व जनरल खालिद किदवई का.

8 जून को जारी स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 178 परमाणु हथियार स्टोर में रखे हैं, जो जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल हो सकते हैं.वहीं 12 परमाणु हथियारों को तैनात किया गया है. यानी भारत के पास कुल 190 परमाणु हथियार हैं. पिछले साल ये संख्या 180 थी और सभी स्टोरेज में थे.

जाहिर है हिन्दुस्तान की परमाणु वॉरहेड की तैनाती देख पाकिस्तान सहमा हुआ है.क्योंकि पाकिस्तान के परमाणु बम की धमकी वाला गुब्बारा पहले ही फूट चुका है.सिपरी की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के पास लगभग 170 परमाणु हथियार हैं.

पाक की नहीं कोई परमाणु नीति

हालांकि पाकिस्तान अपने परमाणु हथियारों को लेकर कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं करता है. पाकिस्तान की कोई लिखित या क्लियर कोई परमाणु नीति भी नहीं है.

पाकिस्तान की ओर से बार-बार एटम बम की धमकी देने का मतलब समझना कोई रॉकेट साइंस नहीं है.असल में पाकिस्तान की जान पर बन आई है.सिंधु जल समझौते पर हिंदुस्तान के एक्शन से पाकिस्तान बिलबिला रहा है.पाकिस्तान को सूझ नहीं रहा कि क्या करे.मुल्क के भीतर आर्मी और शहबाज शरीफ सरकार दोनों के खिलाफ असंतोष बढ़ता जा रहा है क्योंकि सिंधु का पानी पाकिस्तानियों को रुलाने लगा है.ऐसे में पाकिस्तानी हुक्मरानों के पास अवाम का ध्यान भटकाने का ओके एंड टेस्टेड फॉर्मूला है हिन्दुस्तान को परमाणु बम की गीदड़भभकी देना.

पाकिस्तान जिस परमाणु ताकत के दम पर उछलता है, उसका सच कोहरे में लिपटा है और जो सामने है वो है नया ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स.2026 की दुनिया के 10 सबसे शक्तिशाली देशों की सूची में पाकिस्तान का नाम तक नहीं है.लेकिन शेखी ही बघारनी है तो जमीनी हकीकत से क्या वास्ता ?

ग्लोबल फायरपावर ने 2026 की मिलिट्री स्ट्रेंथ रैंकिंग जारी की है, जिसमें 145 देशों की सैन्य ताकत का आकलन 60 से ज्यादा मानकों के आधार पर किया गया है. ये लिस्ट बताती है कि परमाणु पावर का दंभ रखने वाला पाकिस्तान कहां है, और भारत से युद्ध की स्थिति में उसके कैसे परखच्चे उड़ेंगे. ये बात दीगर है कि पिछले ही साल ऑपरेशन सिंदूर में पीटा पाकिस्तान फिर धुल झाड़कर गीदड़भभकी देने लगा है.

रैंकिंग में भारत चौथे, पाक 14वें पर

2026 की रैंकिंग के मुताबिक, अमेरिका के पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है.दूसरे नंबर पर रूस,तीसरे नंबर पर चीन है और चौथे नंबर पर भारत है.लेकिन पाकिस्तान इस लिस्ट में 14वें स्थान पर है.

मिलिट्री पावर में पाकिस्तान भारत के सामने कहीं नहीं टिकता.पाकिस्तान भारत से दस कदम पीछे है लेकिन भारत से युद्ध के लिए लालायित है.वजह साफ है जुबान से ही जंग करनी है तो हथियार और सेना की जरूरत ही क्या है.ऑपरेशन सिंदूर के वक्त भी जब पाकिस्तान के पास पारंपरिक युद्ध का कोई जवाब नहीं बचा था तो वो परमाणु बम की धमकी दे रहा था, जबकि पाकिस्तान कभी भी अगर परमाणु हमले की सोचता है उसके पहले वो खुद दुनिया के नक्शे से साफ हो जाएगा.

पाकिस्तान की परमाणु धमकियों का विश्लेषण रणनीतिक और कूटनीतिक रूप से काफी हद तक खोखला और राजनीतिक हितों से प्रेरित माना जाता है, जिसका मकसद यहां प्वाइंटवाइज समझने की कोशिश करते हैं.

पाकिस्तान की पुरानी चाल

पाकिस्तान की ओर से दी जाने वाली परमाणु धमकियां अक्सर देश के गहरे होते आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और आंतरिक विरोध से जनता का ध्यान हटाने की रणनीति होती है. पाकिस्तान की आधिकारिक परमाणु नीति 'फुल स्पेक्ट्रम डेटरेंस' पर आधारित है और वह 'नो फर्स्ट यूज' नीति का पालन नहीं करता. वह भारत के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का विकल्प खुला रखता है.

भारत किसी भी तरह के 'परमाणु ब्लैकमेल' या गीदड़ भभकी के आगे झुकने वाला नहीं . भारत की परमाणु नीति के तहत अगर पाकिस्तान पहला परमाणु हमला करता है, तो भारत की जवाबी कार्रवाई 'विशाल और विनाशक क्षति पहुंचाने वाली' होगी, जिससे पाकिस्तान के अस्तित्व पर ही संकट आ सकता है.

भारत के पास जमीन, हवा और समुद्र तीनों से परमाणु हथियार दागने की क्षमता मौजूद है, जो भारत की हमले के बाद पलटवार क्षमता को बेहद मजबूत बनाती है. इसके मुकाबले पाकिस्तान के पास समुद्री रास्ते से परमाणु हमले की पुख्ता और टिकाऊ व्यवस्था का अभाव है.

पाकिस्तान की अस्थिरता फैलाने की कोशिश

संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की परमाणु बयानबाजी को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया गया है. दुनिया भर के एक्सपर्ट मानते हैं कि इस तरह की धमकियां दक्षिण एशिया में केवल अस्थिरता फैलाने की कोशिश है.पाकिस्तान हिन्दुस्तान की बढ़ती ताकत से और हर मुद्दे पर मात खाने की आदत से परेशान है.

उसके पास किसी फ्रंट पर ऐसी कोई शक्ति नहीं दिखती कि वो हिन्दुस्तान को चैलेंज कर सके.लिहाजा हर बार परमाणु बम वाली गीदड़भभकी देता है.पाकिस्तान एक फेल्ड नेशन है, जो कर्ज के दलदल में डूबा हुआ है, जिससे निकलने कोई आसार नजर नहीं आते. लिहाजा, कभी धमकी, कभी समझौता जैसी तरकीबें निकालता रहता है.पाकिस्तान ने अपनी सैन्य साझेदारियों को बढ़ाने का एक और नया रास्ता निकाल लिया है.

खुल गई पाकिस्तान की पोल

अक्टूबर 2026 में पाकिस्तान, तुर्किए, कतर और इंडोनेशिया के बीच दोहा में एक रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसे 'बद्र समझौता कहा जाता है. इसके पहले पाकिस्तान ने मक्का पैक्ट सऊदी अरब और तुर्किए के साथ मक्का पैक्ट किया.

मक्का पैक्ट कहता है कि सदस्य देश पर हमला उस पर भी हमला माना जाएगा लेकिन यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब को हमलों से पाट दिया और पाकिस्तान बस जुबान चलाता रहा.यही पाकिस्तान का अंतिम सच है, हकीकत से कोसों दूर रहना,अफवाह और प्रोपेगेंडा फैलाते रहना. 

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About the Author

Rachit Kumar

Rachit Kumar

रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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