App

मोदी 3.0 में पहली बार आई है ये नौबत: वक्फ बिल का समर्थन करने वाले JDU-LJPR कांग्रेस की तर्ज पर UCC का कर रहे विरोध

पिछले 2 से 3 महीनों में खासतौर से दिल्ली में सीजेपी प्रोटेस्ट के बाद बीजेपी एक तरह से बैकफुट पर आई है और उसके कद्दावर मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा तक देना पड़ा. उसके बाद आरक्षण के मुद्दे पर भी बीजेपी सांसत में है. बहुत संभव है कि पिछले कुछ सालों में बीजेपी की हर बात में हां कहने वाले सहयोगी दलों को आंख दिखाने का एक मौका हाथ लगा हो.

मोदी 3.0 में पहली बार आई है ये नौबत: वक्फ बिल का समर्थन करने वाले JDU-LJPR कांग्रेस की तर्ज पर UCC का कर रहे विरोध
Image Credit: नीतीश कुमार और चिराग पासवान. साथ में हैं जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा (दाएं). (File Photo)

याद करिए, संसद में जब भी कोई विधेयक पेश होता है और कांग्रेस के सांसदों या नेताओं से पूछा जाता है कि पार्टी समर्थन करेगी या विरोध तो उनका जवाब होता है, पहले बिल तो आने दीजिए. उसका प्रावधान देखेंगे और फिर तय करेंगे कि क्या करना है. अब भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी दलों जनता दल यूनाइटेड और लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के नेताओं ने भी यही बात कही है. 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद यह पहली बार है कि एनडीए के घटक दलों ने किसी मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी को आंख दिखाई है. इससे पहले वक्फ विधेयक पर इन दोनों दलों ने भाजपा का खुलकर साथ दिया था, लेकिन समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी लागू करने के संदर्भ में इनके बोल बदल गए हैं.

क्या कहा था अमित शाह ने

दरअसल, मुंबई में एक प्रेस कांफ्रेंस में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था, 

लोकसभा चुनाव 2029 से पहले देश के 21 एनडीए शासित राज्यों में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि पूरे देश के लिए एक कानून लागू करने के बजाय इसे राज्यों के स्तर पर लागू करने की रणनीति पर हम काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश जैसे राज्य इस दिशा में पहले ही कदम उठा चुके हैं.

बिहार में जेडीयू ने दिखाई आंखें

अमित शाह का इतना कहना था कि बिहार में जनता दल यूनाइटेड की ओर से विरोध के स्वर बुलंद होते चले गए. सबसे पहले पार्टी नेता और नीतीश कुमार के विश्वस्त श्याम रजक आगे गए. उन्होंने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड पर हमारा रुख पहले से साफ है. श्याम रजक ने बताया कि हमारे सर्वमान्य नेता ने पहले ही इस पर क्लीयर स्टैंड ले रखा है और पार्टी आज भी उस पर कायम है.

उसके बाद पार्टी के एमएलसी नीरज कुमार ने यूसीसी का स्पष्ट तौर पर विरोध करते हुए कहा कि किसी भी कीमत पर बिहार में यूसीसी लागू नहीं होगा. उसके बाद नीतीश कुमार के पूर्व में दिए गए बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे और 2017 में विधि आयोग को उनकी ओर से लिखी गई चिट्ठी का मजमून भी सामने आ गया. यह भी चर्चा चली कि जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेंगे और पार्टी का पक्ष रखेंगे.

उसके बाद जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के आवास पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक हुई, जिसके बाद एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया गया. डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा, 

अभी तो विधेयक का प्रावधान ही सामने नहीं आया है. जब प्रावधान सामने आएंगे, तब पार्टी अपना पक्ष रखेगी और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे.

चिराग पासवान ने प्रारूप सार्वजनिक करने की मांग कर दी

दूसरी ओर, लोकजनशक्ति पार्टी रामविलास के अध्यक्ष चिराग पासवान ने भी विधेयक के प्रारूप को सार्वजनिक करने की मांग की और साथ ही सभी हितधारकों के हितों का अवलोकन करने और व्यापक विमर्श की वकालत की. एक एक्स पोस्ट में चिराग पासवान ने कहा, 

भारत का सामाजिक ताना-बाना विविधतापूर्ण है. हर वर्ग की अपनी नागरिक परंपराएं और रीति-रिवाज हैं. संविधान ने स्वयं इसे स्वीकार किया है- पांचवीं-छठी अनुसूची, अनुच्छेद 371A व 371G, और अब तक की हर संहिता में अनुसूचित जनजातियों को दी गई छूट इसका प्रमाण है. मेरी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) समानता और विविधता - दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है. प्रारूप सार्वजनिक हो, सभी हितधारकों के हितों का अवलोकन हो, व्यापक विचार-विमर्श हो.

दबाव में आई बीजेपी को और दबाव में लाने की कोशिश

अब सवाल यह है कि जिन दलों ने वक्फ विधेयक का आंख मूंदकर समर्थन किया, वो समान नागरिक संहिता को लेकर इतने सजग कैसे हो गए. कहीं ऐसा तो नहीं कि ये दोनों दल दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन, यूजीसी के प्रावधानों को लेकर सवर्णों की नाराजगी, आरक्षण समीक्षा आंदोलन के बाद दबाव में आई भाजपा को दबाव में लाने का एक मौका मानकर चल रहे हैं. नहीं तो सोचिए, इन्हीं दलों के सहयोग से वक्फ विधेयक भारी बहुमत से पारित हुआ था और यही लोग समान नागरिक संहिता के मौके पर भारतीय जनता पार्टी को आंख दिखाने का काम कर रहे हैं.

एनआरसी पर पीएम मोदी ने संभाला था मोर्चा

एक और बात... अमित शाह ने 2020 में कहा था कि एनआसी पूरे देश में लागू की जाएगी, लेकिन तब दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया था कि सरकार एनआरसी के मुद्दे पर कोई प्रस्ताव नहीं लाने जा रही है. अगर सहयोगी दलों का विरोध ऐसे ही जारी रहा तो हो सकता है कि अमित शाह की बातों को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से कोई स्पष्ट बात सामने आए. यहां यह भी ध्यान रखना चाहिए कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समान नागरिक संहिता को लेकर बयान ऐसे ही नहीं दिया होगा. इसके पीछे भी ठोस रणनीति होगी.

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Sunil Mishra

Sunil Mishra

इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
Read More