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समान नागरिक संहिता पर बीजेपी और जेडीयू के बीच तनातनी को देखते हुए राजद के मनेर से विधायक भाई वीरेंद्र ने नीतीश कुमार को साथ आकर सरकार बनाने का ऑफर दिया था. भाई वीरेंद्र के इस ऑफर के साथ ही नीतीश कुमार के फिर से पलटी मारने की चर्चाओं को बल मिल गया. हालांकि, राजनीतिक जानकार इसे भाई वीरेंद्र की अपनी ही पार्टी में गिला शिकवा दूर करने की कवायद मान रहे हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि कुछ दिनों पहले ही भाई वीरेंद्र के एक बयान से राष्ट्रीय जनता दल आलाकमान सकते में आ गया था. उसके बाद राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव और भाई वीरेंद्र के बीच आरोप और प्रत्यारोपों का दौर चला था.
आलाकमान को लेकर भाई वीरेंद्र ने क्या कहा था?
दरअसल, बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों के आने के बाद भाई वीरेंद्र ने पार्टी आलाकमान को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी. भाई वीरेंद्र ने कहा था-
पार्टी को नए सिरे से नेतृत्व के इर्द-गिर्द वाली टीम की समीक्षा करनी होगी. उनका कहना था कि यह चुनाव एनडीए के खिलाफ में था. लोग एनडीए से नाराज थे और इसलिए जाति-धर्म और पार्टी के बंधनों को तोड़कर जो घोड़ा दौड़ता दिखा, लोगों ने उसकी सवारी कर ली थी.
भाई वीरेंद्र ने यह भी कहा था कि लोगों का मकसद एनडीए को हराना था. इसका मतलब यह नहीं है कि लोगों ने प्रशांत किशोर को वोट दिया. वह चूंकि एनडीए के खिलाफ रेस में सबसे आगे दौड़ रहे थे, इसलिए लोगों ने उनको वोट दिया. उन्होंने कहा कि अगले चुनाव में वोट हमारा है और हमारे पास ही रहेगा. दरअसल, हमलोग अच्छे से काम नहीं कर पा रहे हैं. कुछ लोगों के पैकेट में पूरी पार्टी है और जिन लोगों को ओहदे दिए गए हैं, समीक्षा करके उनको भी हटाना होगा.
उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव एक विचार हैं. कुछ लोग तेजस्वी यादव से कार्यकर्ताओं को मिलने भी नहीं देते. तेजस्वी यादव ने आसपास ऐसे लोगों को बैठाया है, जिनसे जनता नफरत करती है. वे लोग जनता का दोहन करते हैं.
भाई वीरेंद्र का नाम सुनते ही भड़क गए थे शक्ति यादव
राष्ट्रीय जनता दल के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव ने आक्रोशित होते हुए कहा कि जो ये सब बातें बोल रहा है, वह पार्टी के लिए क्या कर रहा है. उनकी क्या भूमिका है?
शक्ति यादव ने भाई वीरेंद्र को चेतावनी देते हुए कहा,
संभल जाएं नहीं तो उनका सारा कच्च चिट्ठा मेरे पास है. अगर मैं सब सामने रख दूंगा तो मुंह दिखाने लायक नहीं बचेंगे. मैं 1980 से राजनीति कर रहा हूं और वो क्या राजनीति करते थे और अभी क्या राजनीति कर रहे हैं, सब मैं जानता हूं. किसके साथ उन्होंने क्या किया है, हम सब जानते हैं.
जिंदा चमड़े के सप्लायर का आदमी नहीं हूं: शक्ति यादव
शक्ति यादव के आक्रोश भरे बयान के बाद भाई वीरेंद्र ने दोबारा बयान देते हुए कहा,
हमारे नेता लालू प्रसाद यादव हैं, लालू प्रसाद यादव ने तेजस्वी यादव को ताज दिया है तो वह हमारे नेता हैं. मैं लालू यादव और तेजस्वी यादव का आदमी हूं. किसी ऐसे लोगों का नहीं, जो जिंदा चमड़े का सप्लायर है. लंबे समय से वह समाजवादी आंदोलन से जुड़े रहे हैं और कठिन दौर में भी संगठन के साथ खड़े हैं. यदि व्यक्तिगत टिप्पणी होती रही तो वह ऐसे तथ्य उजागर करेंगे कि कुछ नेताओं के लिए जवाब देना भारी पड़ जाएगा.
भाई वीरेंद्र का बयान कितना गंभीर?
इन सब बातों को ध्यान में रखें तो भाई वीरेंद्र का बयान केवल राजद में अपनी स्थिति को मजबूत करने की कवायद के अलावा कुछ भी नहीं है. कुछ ही दिन पहले जिस नेता की औकात याद दिलाई जा रही थी, पार्टी की मजबूती में जिनका रोल तलाशा जा रहा था, वो व्यक्ति अगर नीतीश कुमार जैसे दिग्गज राजनेता को पलटी मारने की नसीहत दे रहा है तो जाहिर सी बात है कि इसमें राजद को मजबूत करने से ज्यादा राजद में अपनी स्थिति मजबूत करने की कवायद नजर आती है.