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समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी पर भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के बीच तनातनी के बीच राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने नीतीश कुमार को एक बड़ा ऑफर दिया है. भाई वीरेंद्र ने कहा कि नीतीश कुमार जी! बीजेपी को लात मारिए और हमारे साथ आइए. हमलोग मिलकर सरकार बनाएंगे. हमलोग अमित शाह का एजेंडा बिहार में नहीं चलने देंगे. अब सवाल उठता है कि क्या नीतीश कुमार भाई वीरेंद्र का यह ऑफर स्वीकार करेंगे? हालांकि, बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने भाई वीरेंद्र के बयान पर कहा कि यह उनकी बात है. हमलोगों के यहां ऐसी कोई बात नहीं है. फिर भी अगर नीतीश कुमार ने अगर पलटी मारी तो बिहार के राजनीतिक समीकरण कैसे बदल जाएंगे, उस पर नजर डालते हैं. सबसे पहले जान लेते हैं कि अभी विधानसभा में किस पार्टी के कितने विधायक हैं?

बिहार में सरकार बनाने के लिए 122 विधायकों का समर्थन होना जरूरी है. अभी एनडीए के पास 203 विधायकों का बंपर बहुमत है. ऐसे में सरकार कोई अभी कोई खतरा नहीं है.
लेकिन अगर नीतीश कुमार ने पलटी मारी और जनता दल यूनाइटेड एक बार फिर महागठबंधन में चला गया तो पूरा समीकरण बदल जाएगा. तब एनडीए विधायकों की संख्या 118 तक सिमटकर रह जाएगी.
दूसरी ओर, महागठबंधन में जेडीयू के 89 विधायकों के आने के बाद उनकी संख्या 120 तक पहुंच जाएगी, जो एनडीए से 2 विधायक ज्यादा होंगे, लेकिन बहुमत किसी के पास नहीं रहेगा.
ऐसे में, महागठबंधन को सरकार बनाने के लिए एआईएमआईएम के 5 और बसपा के 1 विधायकों की जरूरत होगी. सैद्धांतिक रूप से एआईएमआईएम के लिए एनडीए के बदले महागठबंधन को समर्थन देना ज्यादा मुफीद रहेगा.
अगर एआईएमआईएम तटस्थ रहा तो फिर उसकी पार्टी टूट भी सकती है. इससे पहले भी उसके 4 विधायकों ने पाला बदलकर राजद की सदस्यता ले ली थी.
इस तरह नीतीश कुमार के पाला बदल की स्थिति में सत्ता की चाभी असदुद्दीन ओवैसी के 5 और बसपा के एकमात्र विधायक के पास रह जाएगी.