भरतपुर में पंचायत आम चुनाव 2026 के तहत जिला परिषद सदस्य पद के नामांकन के तीसरे दिन कलेक्ट्रेट में गहमागहमी रही. प्रत्याशी ढोल-डीजे और समर्थकों के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंचे. महिला उम्मीदवारों और MBBS डॉक्टर की दावेदारी भी चर्चा में रही.
राजस्थान पंचायत चुनाव के पहले चरण में 16 जिलों की 104 पंचायत समितियों में शाम 6 बजे तक 63% मतदान हुआ. बाड़मेर की मांगता में सबसे ज्यादा 79.55% और पाली की रानी स्टेशन में सबसे कम 40.02% वोटिंग हुई. फाइनल आंकड़े आना बाकी हैं.
राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 के पहले चरण में ग्रामीणों में उत्साह दिखा. उदयपुर में डायलिसिस मरीज ने परिवार सहित मतदान किया. डूंगरपुर में युवा, महिलाएं और बुजुर्ग वोट डालने पहुंचे. अलवर, राजसमंद और झालावाड़ में भी मतदान जारी रहा.
राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 के दौरान डूंगरपुर के भीलूड़ा बूथ नंबर 88 पर EVM खराब होने से करीब दो घंटे मतदान रुका रहा. सुबह 11:50 बजे नई मशीन आने के बाद वोटिंग दोबारा शुरू हुई. इस बूथ पर 1,043 मतदाता पंजीकृत हैं.
राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 के पहले चरण में जयपुर जिले की 8 पंचायत समितियों में मतदान जारी है. सुबह 10 बजे तक 14.72% वोटिंग हुई. मौजमाबाद 16.79% मतदान के साथ आगे रहा, जबकि गोविंदगढ़ में सबसे कम 12.91% वोट पड़े.
राजस्थान में पंचायत चुनाव के पहले चरण के लिए आज वोटिंग जारी है. इस बीच बारां में एक अनोखी बारात देखने को मिली. यहां लोगों को वोट देने के लिए जागरूक करने के लिए एक ऐसा तरीका अपनाया गया जिसने सबका दिल जीत लिया.
राजस्थान में पंचायत चुनाव के पहले चरण के तहत आज 16 जिलों की 104 पंचायत समितियों में मतदान हो रहा है. 85.07 लाख मतदाता वोट डालेंगे. प्रदेश के 9,886 मतदान केंद्रों पर जिला परिषद और पंचायत समिति के 6,926 प्रत्याशियों की किस्मत दांव पर है.
राजस्थान में पंचायती राज चुनावों के बीच गांवों में जातिवाद का मुद्दा हावी होता नजर आ रहा है. पंच-सरपंच से लेकर पंचायत समिति और जिला परिषद चुनावों तक मतदाता जाति के आधार पर उम्मीदवारों के समर्थन में लामबंद हो रहे हैं. बड़ी जातियों के बीच टिकट और वोटों की खींचतान से छोटे समुदायों के प्रत्याशी भी चुनावी समीकरण बिगाड़ रहे हैं.
राजस्थान में गांव की सरकार चुनने का पहला महासंग्राम कल होगा. 16 जिलों में 85 लाख से ज्यादा मतदाता 6 हजार 926 प्रत्याशियों की सियासी किस्मत का फैसला करेंगे. जिला परिषद और पंचायत समितियों की 2081 सीटों के लिए 9886 मतदान केंद्रों पर वोट डाले जाएंगे.
जैसलमेर में पंचायतीराज चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. भाजपा और कांग्रेस ने जिला परिषद और पंचायत समितियों में अपना बोर्ड बनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं. इस बीच जिला प्रमुख पद ST ओपन वर्ग के लिए आरक्षित होने और नए परिसीमन ने चुनावी समीकरण बदल दिए हैं. वहीं, ओरण संरक्षण के मुद्दे को लेकर टीम ओरण ने भी जिला परिषद के वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया है. ऐसे में इस बार मुकाबला सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के बीच सीमित नहीं रहने के संकेत मिल रहे हैं.
जयपुर जिले में गांव की सरकार चुनने के लिए 7.43 लाख से ज्यादा मतदाता दो बार वोट डालेंगे. पहले EVM से जिला परिषद-पंचायत समिति सदस्य और दो दिन बाद बैलेट पेपर से सरपंच-वार्ड पंच चुने जाएंगे. मतदान दलों को पांच दिन गांवों में रहना होगा.
पंचायत चुनावों में आमतौर पर सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे ही चर्चा में रहते हैं. लेकिन इस बार राजस्थान के झुंझुनूं जिले में चुनावी चर्चाओं में विकास के वादों के बीच कुंवारे युवकों की शादी और सगाई भी चुनावी बहस का बड़ा हिस्सा बन गई है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब चुटकियां ली जा रही हैं.
राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव सिर्फ गांव की सरकार नहीं चुनते, बल्कि बड़े नेताओं की सियासी पौध भी तैयार करते हैं. जयपुर के रामचरण बोहरा जिला प्रमुख से सांसद बने, तो शांति धारीवाल जिला प्रमुख से मंत्री की कुर्सी तक पहुंचे. कई नेताओं ने सरपंच और प्रधान रहते हुए राजनीति का ककहरा सीखा और फिर विधायक बने.
कोटा के सुल्तानपुर पंचायत समिति के वार्ड नंबर 8 से कांग्रेस प्रत्याशी चंद्रप्रकाश मीणा की पुलिस ने हिस्ट्रीशीट खोली है. पुलिस के अनुसार, उनके खिलाफ वर्ष 1996 से अब तक लूट, जानलेवा हमला, चौथवसूली और बलवा समेत 11 मामले दर्ज हैं. वहीं नामांकन में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने का आरोप भी सामने आया है.
राजस्थान पंचायत चुनाव के पहले चरण में BJP-कांग्रेस के सामने RLP और BAP भी चुनौती पेश कर रही हैं. अजमेर, बाड़मेर, जोधपुर और नागौर में RLP की मौजूदगी, जबकि डूंगरपुर में BAP की सक्रियता मुकाबले को दिलचस्प बना रही है.
राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में पंचायत चुनाव के बीच महिलाओं पर घूंघट की बंदिशें अब भी कायम हैं. दूदू में चुनाव लड़ रहीं संतोष देवी घूंघट में नजर आईं, जबकि पूर्व प्रधान संतोष कड़वा घूंघट से आजादी हासिल कर महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी हैं. सवाल यह है कि जब महिलाएं चुनाव लड़ रही हैं, तो क्या उन्हें अपने फैसले लेने और खुलकर बोलने की आजादी भी मिल रही है?
राजस्थान पंचायत चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के टिकट वितरण को लेकर परिवारवाद की बहस तेज हो गई है. दोनों दलों में कई नेताओं के बेटे, बेटियों, पत्नियों और अन्य रिश्तेदारों को टिकट मिला है. कांग्रेस विधायक अनीता जाटव के टिकट वितरण पर लगाए गए आरोपों से राजनीतिक चर्चा बढ़ गई है.
Rajasthan News: राजस्थान पंचायतीराज चुनाव में नामांकन के आखिरी दिन कई बड़े चेहरे मैदान में उतरे. मंत्री झाबर सिंह खर्रा के परिवार के चार सदस्यों ने पर्चा भरा. दौसा में विधायक की मां को BJP का टिकट मिला, जबकि झुंझुनूं में सुशीला सीगड़ा कांग्रेस में लौटीं.
Rajasthan Politics: जयपुर जिला परिषद चुनाव में संपत्ति को लेकर दिलचस्प तस्वीर सामने आई है. मोहन डागर के पास करीब 49.35 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जबकि अंजू यादव के परिवार के पास नकदी और बैंक जमा मिलाकर सिर्फ 1.36 लाख रुपये हैं. जानिए अन्य उम्मीदवारों की संपत्ति और चुनावी खर्च की सीमा.
Rajasthan News: सीकर पुलिस में तैनात ASI सुल्तान सिंह ने नौकरी के करीब 13 साल बाकी रहते VRS ले लिया है. एसपी संजीव नैन ने इसकी मंजूरी दे दी है. सुल्तान सिंह ने बताया कि वे कांग्रेस के टिकट पर जिला परिषद के वार्ड नंबर 40 से चुनाव लड़ेंगे.
Rajasthan News: भीलवाड़ा के तखतपुरा गांव में ग्रामीणों ने अनोखी परंपरा निभाते हुए भगवान के दरबार में गुप्त मतदान से सरपंच प्रत्याशी चुना. बालिका स्कूल में कमरे बनवाने के लिए 1.51 लाख रुपए जमा कराने की शर्त रखी गई.
Rajasthan News: उदयपुर में पंचातय चुनाव को लेकर एक बार फिर चुनावी बिसात बीच चूकी है. चुनावी मैदान में जीत दर्ज करने के लिए राजनैतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है. उदयपुर जिला परिषद में कभी अविश्वसास प्रस्ताव से प्रमुख के हटाया गया तो कभी बहुमत मिलने के बाद भी पार्टी अपने पसंद के नेता को जिला प्रमुख की कुर्सी पर नही बिठा पाई.