भाषा चुनें
  • Hindi
  • English
  • Marathi
  • Bengali
  • Tamil
  • Malayalam
  • Gujarati
  • Telugu
  • Kannada
  • Odisha
  • Z Bharat
  • ZEE PHH
  • ZEE Business
  • WION
राज्य चुनें
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखण्ड
  • मध्य प्रदेश
  • छत्‍तीसगढ़
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • बिहार
  • झारखण्ड
  • राजस्‍थान
  • हिमाचल प्रदेश
  • हिन्दीEnglishमराठीবাংলাதமிழ்മലയാളംગુજરાતીతెలుగుಕನ್ನಡଓଡ଼ିଶାZ BharatPHHBusinessWION
  • facebookyoutubetwitterlinkedinwhatsapp
Zee News Hindi
App
Zee News Hindi
  • News
  • वीडियो
  • फोटोज़
  • रील्स
  • लाइव ब्लॉग
  • राज्य चुनें

Add Zee Business As A Preferred Source
App
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • LIVE टीवी
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • ज़ी न्यूज़ हिंदी
  • /राजस्थान
  • /राजस्थान पंचायत चुनाव: जाति और गोत्र तक पहुंची चुनावी जंग, किसका बिगड़ेगा समीकरण?

राजस्थान पंचायत चुनाव: जाति और गोत्र तक पहुंची चुनावी जंग, किसका बिगड़ेगा समीकरण?

राजस्थान में पंचायती राज चुनावों के बीच गांवों में जातिवाद का मुद्दा हावी होता नजर आ रहा है. पंच-सरपंच से लेकर पंचायत समिति और जिला परिषद चुनावों तक मतदाता जाति के आधार पर उम्मीदवारों के समर्थन में लामबंद हो रहे हैं. बड़ी जातियों के बीच टिकट और वोटों की खींचतान से छोटे समुदायों के प्रत्याशी भी चुनावी समीकरण बिगाड़ रहे हैं.

Written ByBabulal Dhayal
Published: Oct 21, 2026, 09:05 PM IST|Updated: Oct 21, 2026, 09:11 PM IST
joinshare
राजस्थान पंचायत चुनाव: जाति और गोत्र तक पहुंची चुनावी जंग, किसका बिगड़ेगा समीकरण?
Image Credit: गांवों में जातिवाद का मुद्दा हावी!

About the Author

Babulal Dhayal

Babulal Dhayal

बाबूलाल धायल ज़ी राजस्थान में सीनियर स्पेशल कॉरेस्पॉन्डेंट के रूप में कार्यरत हैं. पिछले 25 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और सीएमओ और मुख्यमंत्री से जुड़े विभागों की खबरें प्रमुखता से कवर करते हैं. पॉलिटिकल रिपोर्टिंग में उनकी मजबूत पहचान है और वे बीजेपी - कांग्रेस दोनों से जुड़ी खबरों को कवर करते रहे हैं. विधानसभा, सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों और ग्रामीण विषयों पर उनकी पकड़ खास मानी जाती है. बाबूलाल धायल,  राजस्थान पत्रिका, ईटीवी और न्यूज़18 जैसे संस्थानों में भी कार्य कर चुके हैं.
Read More

ट्रेंडिंग

  • न्यूज़
  • फोटो
  • वीडियो
चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का बिहार पर दिखेगा असर, 28 अक्टूबर से बारिश के आसार, 29 को पूरे राज्य में 'ऑरेंज अलर्ट'

चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का बिहार पर दिखेगा असर, 28 अक्टूबर से बारिश के आसार, 29 को पूरे राज्य में 'ऑरेंज अलर्ट'

2

PM मोदी के पिता पर टिप्पणी से गरमाई सियासत: गजेंद्र सिंह शेखावत और अतुल भंसाली ने कांग्रेस को घेरा

3

SBI-PNB-HDFC में 16 दिन नहीं होगा काम! चेक करें नवंबर में कब-कब बंद रहेंगे बैंक?

4

एटम बम का घमंड धड़ाम: भारत की परमाणु पावर से 'जिन्नालैंड' में हड़कंप; बिलबिला उठे सियासतदान

5

BJP vs Congress: 1 नवंबर को कांग्रेस की रैली के जवाब में बीजेपी करेगी पदयात्रा

logo
  • contact us
  • privacy policy
  • legal
  • investor info
  • advertise with us
© 1998-2026 Indiadotcom Digital Private Limited, All Rights Reserved.

पंचायत राज चुनाव में जातिवाद की लहर खूब चल रही है. पंच-सरपंचों से लेकर पंचायत समिति और जिला परिषद में जातियां अपने स्वजाति उम्मीदवारों के पीछे लामबंद हो रही हैं, जिन गांवों में जिस जाति का बोलबाला है, उसके उम्मीदवारों की तादाद भी ज्यादा है. ऐसे में कम संख्या वाली जातियों के प्रत्याशियों ने कई जगह बड़ी जातियों वाले प्रत्याशियों के समीकरण बिगाड़ दिए हैं.

गांवों में पंच-सरपंच चुनाव का शोर 
गांवों में पंच-सरपंच के चुनाव का हर तरफ शोर है. उम्मीदवारों का रोड शो गांव की गलियों से लेकर ढाणियों की पगडंडियों तक पहुंच रहा है. उम्मीदवार शक्ति प्रदर्शन कर खुद को जीत की रेस में बनाए रखने की जद्दोजहद कर रहे हैं. जयपुर के मुंडिया रामसर गांव में एक प्रत्याशी का रोड शो निकल रहा है, डीजे की धुन है, तो दूसरी तरफ युवाओं के थिरकते कदम लाउडस्पीकर के शोर के बीच असली मुद्दे गौण हैं. जातिवाद ही असली मुद्दा है गांव में जाट, यादव, ब्राह्रम्ण, चारण उम्मीदवार मैदान में हैं. जाट प्रत्याशियों की संख्या ज्यादा है, इसलिए दूसरी जातियों के मतदाता यहां किंगमेकर की भूमिका में है.

यह भी पढ़ेंः पंचायत चुनाव : जैसलमेर में ओरण का मुद्दा और ST आरक्षण कैसे बदल रहा सियासी हवा ?

विकास के मुद्दे पीछे, जातिगत पहचान पर जोर 
वोट से पहले मतदाता उम्मीदवार की जात ही पूछ रहे हैं. गांव में विकास का मुद्दा गायब .है मतदाताओं में जाति प्रेम हर जगह नजर आ रहा है. कई जगह उम्मीदवार का दूसरी जातियों से जुड़ाव और मजबूत नेटवर्क जाति बंधन भी तोड़ रहा है, जिन जातियों का गांवों में दबदबा है, उसके प्रत्याशियों की तादाद भी अच्छी खासी है.

सभी समुदायों को साधने की कोशिश
ऐसे में बड़ी जातियों के वोटर भ्रम की स्थिति में है कि किसे गले लगायें और किससे किनारा करें. बस माहौल किसके पक्ष में बन रहा है, इसी बात पर पैनी नजर रखी जा रही है. बड़ी जाति के साथ दूसरी जातियों के वोटर जिस उम्मीदवार ने साध लिए, उसकी जीत पक्की मानी जा रही है इसलिए दिखावे के तौर पर ही सही चुनाव प्रचार के दौरान हर जाति के लोगों को साथ रखा जा रहा है, ताकि संदेश यही जाए कि ये उम्मीदवार 'छत्तीस कौम का चहेता है.'

यह भी पढ़ेंः राजस्थान पंचायत चुनाव: गांव की सत्ता का महासंग्राम! 85 लाख मतदाता करेंगे फैसला, 16 जिलों में चुनावी रण तैयार

जाति और गोत्र तक पहुंची चुनावी जंग 
प्रत्याशी की चुनावी शोर में जाति का दबदबा हर जगह दिखाई पड़ रहा है लेकिन वर्चस्व की लड़ाई बड़ी जातियों में आपसी टकराव का कारण भी बन रही है. हालात यह हैं कि चुनावी जंग जातियों से लेकर गोत्रों तक पर जा पहुंची है. ऐसे में कई जगह गांवों में भाईचारा दांव पर है, चुनावों में उपजी कटुता गांव के शांति सद्भाव को नजर न लगा दे. इसका सभी को ध्यान रखना होगा.  
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:
Rajasthan Panchayat Chunav
Rajasthan News