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राजस्थान में गांव की सत्ता का पहला संग्राम कल से शुरू होने जा रहा है. पंचायतीराज आम चुनाव-2026 के पहले चरण में प्रदेश के 16 जिलों के 85 लाख 7 हजार 306 मतदाता गांव की सरकार का भविष्य तय करेंगे. गांव की चौपाल से लेकर खेत-खलिहानों तक चुनावी सरगर्मियां तेज हैं. जिला परिषद और पंचायत समितियों में अपनी सरकार बनाने के लिए प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक दी है. अब फैसला मतदाताओं के हाथ में है. कल 16 जिलों अजमेर, अलवर, बाड़मेर, भीलवाड़ा, बीकानेर, डूंगरपुर, जयपुर, झालावाड़, जोधपुर, कोटा, नागौर, पाली, फलौदी, राजसमंद, सिरोही और उदयपुर की 104 पंचायत समितियों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान होगा. पहले चरण में 16 जिलों में जिला परिषद के 293 वार्डों में 1693 और 104 पंचायत समितियों के 1788 वार्डों में 5233 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं. यानी कुल 2081 सीटों के लिए 6926 प्रत्याशियों के राजनीतिक भविष्य का फैसला होगा. इसके लिए 9886 मतदान केंद्र बनाए गए हैं.
पहले चरण की चुनाव प्रक्रिया
पहले चरण में शामिल 3314 ग्राम पंचायतों में सरपंच और 28 हजार 682 वार्ड पंचों के चुनाव की प्रक्रिया भी होगी. इन पदों के लिए मतदान जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के मतदान के दो दिन बाद यानि 24 अक्टूबर को होगा. गांव की सरकार बनाने में महिलाओं की भागीदारी भी निर्णायक रहेगी. पहले चरण में कुल 85.07 लाख मतदाताओं में 43 लाख 86 हजार 768 पुरुष और 41 लाख 20 हजार 511 महिला मतदाता हैं. इसके अलावा 27 थर्ड जेंडर मतदाता भी अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे. पुरुषों के मुकाबले महिला मतदाताओं की संख्या महज 2 लाख 66 हजार 257 कम है. कुल मतदाताओं में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 48.44 प्रतिशत है. ऐसे में ग्रामीण सत्ता की तस्वीर तय करने में महिला मतदाताओं की भूमिका अहम होगी.

चुनावी आंकड़ों में भीलवाड़ा सबसे आगे
पंचायतीराज चुनाव के पहले चरण के चुनावी आंकड़ों में भीलवाड़ा जिला सबसे आगे है. यहां 8 लाख 94 हजार 918 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे. जिले की 9 पंचायत समितियों में जिला परिषद के 28 और पंचायत समिति के 177 वार्डों में चुनाव होंगे. इसके बाद जयपुर में 7 लाख 43 हजार 640 और उदयपुर में 7 लाख 33 हजार 784 मतदाता हैं. बाड़मेर में 6 लाख 88 हजार 347 और नागौर में 6 लाख 53 हजार 641 मतदाता हैं. वहीं, पहले चरण में शामिल जिलों में बीकानेर में सबसे कम 2 लाख 67 हजार 602 मतदाता हैं. मतदान केंद्रों के लिहाज से भीलवाड़ा में सर्वाधिक 1110 और बीकानेर में सबसे कम 311 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. राजधानी जयपुर के ग्रामीण इलाकों में भी गांव की सत्ता के लिए सियासी मुकाबला होगा. जिले की 8 पंचायत समितियों के 146 वार्डों और जिला परिषद के 22 वार्डों में मतदान होगा. इसके लिए 794 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. इन पर 7 लाख 43 हजार 640 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे. इनमें 3 लाख 84 हजार 195 पुरुष और 3 लाख 59 हजार 445 महिला मतदाता शामिल हैं.
क्या है जयपुर जिले का हाल
जयपुर में चौमूं, दूदू, गोविंदगढ़, झोटवाड़ा, जोबनेर, किशनगढ़-रेनवाल, मौजमाबाद और सांभर पंचायत समितियों में मतदान होगा. जिले की 212 ग्राम पंचायतों में सरपंच और 2234 वार्ड पंचों के चुनाव की प्रक्रिया भी पहले चरण में शामिल है. जयपुर की आठ पंचायत समितियों में चौमूं में सबसे अधिक 1 लाख 38 हजार 595 मतदाता हैं, जबकि झोटवाड़ा में सबसे कम 58 हजार 648 मतदाता हैं. पहले चरण में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों की कुल 2081 सीटों के लिए 6926 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं. इस हिसाब से औसतन एक सीट पर 3 प्रत्याशी हैं. जिला परिषद के 293 वार्डों में 1693 प्रत्याशी होने से औसतन छह प्रत्याशी प्रति सीट हैं. वहीं पंचायत समिति के 1788 वार्डों में 5233 प्रत्याशी होने से औसतन तीन प्रत्याशी प्रति सीट हैं.
जिला परिषद और पंचायत समिति के वार्ड तथा मतदाता संख्या, निर्वाचन आंकड़ों के अनुसार

मतदाता किसके हाथ में देंगे सत्ता की चाबी
बहरहाल, पंचायतीराज चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने का अवसर नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की दिशा तय करने का भी अहम पड़ाव हैं. गांवों में सड़क, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. पहले चरण में लाखों मतदाता अपने क्षेत्र के प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे. इसके बाद सरपंच और वार्ड पंचों के चुनाव से ग्राम पंचायत स्तर पर नई सरकार का गठन होगा. अब मतदाता तय करेंगे कि गांव की सत्ता की चाबी किसके हाथ में होगी. पहले चरण के नतीजे ग्रामीण राजनीति में नए नेतृत्व और स्थानीय सियासी समीकरणों की तस्वीर भी साफ करेंगे.