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ड्रैगन की छाती पर तोप, समंदर में मिसाइलों को चकमा देने वाला सिस्टम, चुप रहकर PAK-चीन से निपटने की महातैयारी कर रहा भारत

चीन और पाकिस्तान की ओर से सरहद पर लगातार हो रही उकसावे वाली गतिविधियों के बावजूद भारत खामोश है. उसकी यह खामोशी कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक सधी हुई रणनीति है. वह रणनीति, जो एक दिन दुश्मनों की तबाही की वजह बनेगी.

ड्रैगन की छाती पर तोप, समंदर में मिसाइलों को चकमा देने वाला सिस्टम, चुप रहकर PAK-चीन से निपटने की महातैयारी कर रहा भारत
Image Credit: पाकिस्तान-चीन से निपटने की भारत की तैयारियां (एआई इमेज)

गलवान संघर्ष के बाद से भारत-चीन की सेनाएं लद्दाख में आमने-सामने बनी हुई हैं. भारत के लगातार आग्रह के बावजूद चीन न तो डिस-एंगेजमेंट को तैयार है और न ही सीमा संबंधी विवाद को हल करना चाहता है. लद्दाख के अलावा वह लगातार अरुणाचल प्रदेश में भी अपनी टुकड़ियां भेजकर भारत को उकसाने की कोशिश कर रहा है. कोई नहीं जानता कि ड्रैगन के मन में क्या है.

चीन-पाकिस्तान से लगातार बढ़ रहा खतरा

कई डिफेंस एक्सपर्ट आगाह कर रहे हैं कि 2030 तक चीन भारत पर हमला कर सकता है. इसके पीछे उनका आकलन है कि ताइवान पर अटैक करने से उसे अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान की संयुक्त सैन्य ताकत से जूझना होगा. जबकि भारत पर हमला करने से उसे ऐसा कोई जोखिम नजर नहीं आता है. उसके एक्सपर्टों का मानना है कि अगर चीन ऐसा कर देता है तो एशिया में मजबूत प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभर रहे भारत को भी सबक सिखा सकेगा.

उधर पाकिस्तान की ओर से भी भारत के लिए खतरा लगातार बढ़ रहा है. सऊदी अरब और तुर्किये के साथ मक्का डिफेंस एग्रीमेंट करने के बाद से उसके हौंसले काफी बढ़े हुए हैं. उसे खुलेतौर पर चीन और अंदरुनी तरीके से अमेरिका की भी सैन्य मदद मिल रही है. वह बांग्लादेश और मालदीव जैसे मुस्लिम मुल्कों में भी इस्लाम का नाम लेकर अपनी  पैठ तेजी से बढ़ा रहा है. ऐसे में वह 1948, 1965, 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध की तरह भारत पर कब हमला कर दे, कुछ कहा नहीं जा सकता.

घातक जवाब तैयार करने में जुटा है भारत

भारत की दोनों सीमाओं पर लगातार बढ़ रहे खतरों को देखते हुए मोदी सरकार भी तेजी के साथ जवाबी उपाय करने में जुटी है. वह ऐसे हथियार अपनी सेनाओं के बेड़े में शामिल कर रही है, जो न केवल दुश्मन खेमे में जाकर भारी तबाही मचा दें बल्कि उसकी ओर से दागे गए गोलों और मिसाइलों को भी हवा में ढेर कर दें. अब मोदी सरकार ने देश की सैन्य क्षमता को मजबूत करने का एक ओर बड़ा फैसला किया है.

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में तीनों सेनाओं को नए हथियार खरीदने के लिए 2.12 लाख करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी गई. इस बजट से आर्मी, नेवी और एयरफोर्स, तीनों सेनाओं के लिए घातक हथियार खरीदे जाएंगे. बड़ी बात ये है कि इनमें से 82 प्रतिशत से ज्यादा खरीद देसी कंपनियों से ही की जाएगी यानी ऐसा करके सरकार भारतीय रक्षा कंपनियों को ग्लोबल बनाने में बड़ा काम कर रही है.  

सरकार खरीदेगी 2.12 लाख करोड़ रुपये के हथियार

भारतीय सेना की मारक क्षमता और सामरिक ताकत बढ़ाने के लिए परिषद ने कई आधुनिक हथियारों और उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी है. इससे वह चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों से निपटने में और घातक हो जाएगी. आइए जानते हैं कि इस बजट से क्या-क्या हथियार खरीदे जाने वाले हैं.

हाई मोबिलिटी व्हीकल्स (HMV): ये व्हीकल चीन की चुनौती को देखते हुए खरीदे जाएंगे. इनसे पहाड़ी, पथरीले और कठिन इलाकों में सैनिकों की आवाजाही तेज हो जाएगी. सैनिकों के साथ ही उन्हें हथियार और बाकी रसद पहुंचाने में ये व्हीकल बेहद काम आने वाले हैं.

सेल्फ-प्रोपेलड ट्रैक्ड गन सिस्टम (GSRS): ये ट्रकों पर लदी तोपें हैं. इनसे फायदा ये है कि बेहद कम वक्त में सड़क मार्ग से इन्हें कहीं भी ले जाकर दुश्मन में कहर ढहाया जा सकता है. इसके बाद यह तेजी से अपनी लोकेशन बदल लेती हैं, जिससे दुश्मन चाहकर भी इन्हें निशाना नहीं बना सकता.  मारक क्षमता प्रदान करेगा.  

लाइट मल्टी रोल हेलिकॉप्टर्स (LMRH): भारतीय सेना के लिए लाइट मल्टी रोल हेलिकॉप्टर्स भी खरीदे जाएंगे. इनका इस्तेमाल भारतीय सेना और वायु सेना दोनों करेंगी. मशीनगन और मिसाइलों से लैस इन हेलीकॉप्टर्स का इस्तेमाल टोही, निगरानी, दुश्मन से मुकाबे, सैनिकों की खोज और बचाव में किया जाएगा. इसके साथ ही मानवीय सहायता और आपदा राहत में इनका इस्तेमाल हो सकता है.

इनके साथ ही भारतीय सेना के लिए वेरी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) भी खरीदे जाएंगे. यह बेहद नजदीक आ चुके दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल और लड़ाकू विमान को ध्वस्त करने में काम आएगा. सेना के लिए प्लेटफॉर्म बेस्ड काउंटर अनमैंड एरियल सिस्टम (C-UAS) और लंबी दूरी के कामिकेज ड्रोन सिस्टम भी खरीदे जाएंगे.

भारतीय नौसेना के लिए कौन से हथियार खरीदे जाएंगे?

एक्टिव ऑफबोर्ड डिकॉय सिस्टम (AODS): यह जहाजों पर लगने वाला वह एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम होगा, जो दुश्मन की ओर से आ रही एंटी-शिप मिसाइलों को हवा में ही ध्वस्त कर देगा. इस सिस्टम के आने से भारत के युद्धपोत और ताकतवर हो जाएंगे. वे दुश्मन की मिसाइलों की परवाह किए बिना खुलकर कार्रवाई कर सकेंगे.

भारतीय वायु सेना के बेड़े में आएंगे ये घातक हथियार

हेलिकॉप्टर्स और एयर डिफेंस सिस्टम: भारतीय वायु सेना को मजबूत बनाने के लिए नए हेलिकॉप्टर्स और एयर डिफेंस सिस्टम खरीदे जाएंगे. इससे क्लोज रेंज कॉम्बेट में वायुसेना को एक्शन लेने में ज्यादा मदद मिलेगी और दुश्मन को पस्त कर सकेगी.

स्पेशल यूटिलिटी हेलिकॉप्टर्स: इंडियन आर्मी के साथ ही ये हेलीकॉप्टर्स वायुसेना के लिए भी खरीदे जाएंगे. इनकी खरीद से एयरफोर्स के अपने सैन्य और असैन्य, दोनों प्रकार के मिशनों को पूरा करने में और मदद मिलेगी.

एक्स-बैंड डॉप्लर वेदर रडार सिस्टम: यह वेदर रडार सिस्टम इसलिए खरीदा जा रहा है, जिससे बॉर्डर के इलाकों के मौसम के बारे में 24 घंटे निगरानी रखी जा सके. इससे आपदा की स्थिति में वक्त रहते बॉर्डर पर मदद भेजी जा सकेगी. साथ ही, जंग की स्थिति में भारत मौसम को देखते हुए अपनी रणनीति बना सकेगा.

दुश्मन ने इस बार की गलती, तो...

कुल मिलाकर, देश की रक्षा के मामले में सरकार भले ही ज्यादा बोलती हुई नजर न आ रही हो लेकिन उसके एक्शन अगर ध्यान से देखें तो वह चीन-पाकिस्तान की चुनौतियों से निपटने के लिए गंभीरता से जुटी हुई है. इस बार अगर इनमें से किसी ने भी दुस्साहस करने की कोशिश की तो उन्हें वो जवाब मिलेगा, जिसके बाद वे वर्षों तक भारत ओर देखने की हिम्मत भी नहीं कर पाएंगे.  
 

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About the Author

Devinder Kumar

Devinder Kumar

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
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