दुनियाभर में जारी युद्ध रोकने में संयुक्त राष्ट्र बेबस क्यों साबित हो रहा है? 5 शक्तिशाली देशों के वीटो पावर के दुरुपयोग और यूएनएससी सुधारों के बीच भारत की स्थायी सदस्यता की मांग एक बार फिर तेज हो गई है. जानिए पूरा विश्लेषण.
वर्षों तक शांतिप्रिय देश रहा भारत अब अपने तेवर बदल रहा है. चीन के दुस्साहस से निपटने के लिए वह अब इंडोनेशिया को ऐसी खतरनाक मिसाइल देने जा रहा है, जो चीनी विमानों को 100 किमी दूर से ही खाक कर देगी.
चीन से निपटने के लिए भारतीय सेना ही नहीं, बल्कि आईटीबीपी भी घातक तैयारियों में जुटी है. गलवान जैसी घटना से सबक सीखते हुए आईटीबीपी ने शौर्य कमांडो प्लॉटून का गठन किया.
चीनी सेना की मनमानी पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने दोटूक जवाब दिया है. MEA ने कहा कि जब भी चीनी सेना ने अपना स्थापित गश्त पैटर्न बदला है, तब-तब सीमा पर हालात बिगड़े हैं.
समंदर में चीन की बढ़ती आक्रामकता के मुकाबले में भारत का सुर काफी नरम नजर आता है. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. भारतीय नौसेना पूरी खामोशी के साथ चीन से निपटने के लिए 2050 के मेगाप्लान पर काम कर रही है.
जो खेल अब तक चीन, भारत के साथ खेलता आया था. अब भारत वही खेल चीन के साथ खेलने लगा है. इससे ड्रैगन बुरी तरह बौखला गया है. उसने लद्दाख के 28 स्थानों का भारत की ओर से मानक नाम तय किए जाने पर विरोध जताया है.
चीन ने बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट के मॉडर्नाइजेशन के लिए भारी-भरकम रकम लोन के तौर पर दी है. मोंगला पोर्ट भारत की सीमा से 80 किमी दूर है. इस वजह से यह रणनीतिक रूप से भारत के लिए बेहद अहम हो जाता है.
India-China Trade via Nathu La Pass: नाथुला दर्रे से भारत-चीन व्यापार शुरू हो गया है. कड़ी जांच के बाद चीनी वाहन भारतीय सीमा में दाखिल हो रहे हैं. त्योहारी मांग के लिए व्यापारी स्टॉक कर रहे हैं.