App

पंचायत चुनाव : जैसलमेर में ओरण का मुद्दा और ST आरक्षण कैसे बदल रहा सियासी हवा ?

जैसलमेर में पंचायतीराज चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. भाजपा और कांग्रेस ने जिला परिषद और पंचायत समितियों में अपना बोर्ड बनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं. इस बीच जिला प्रमुख पद ST ओपन वर्ग के लिए आरक्षित होने और नए परिसीमन ने चुनावी समीकरण बदल दिए हैं. वहीं, ओरण संरक्षण के मुद्दे को लेकर टीम ओरण ने भी जिला परिषद के वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया है. ऐसे में इस बार मुकाबला सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के बीच सीमित नहीं रहने के संकेत मिल रहे हैं.

पंचायत चुनाव : जैसलमेर में ओरण का मुद्दा और ST आरक्षण कैसे बदल रहा सियासी हवा ?
Image Credit: Jaisalmer Panchayat Chunav Oran conservation issue

जिला प्रमुख की कुर्सी पर ST आरक्षण, 21 वार्डों में सिर्फ एक सीट
जैसलमेर में पंचायतीराज चुनाव इस बार कई मायनों में अलग नजर आ रहे हैं. जिला परिषद के वार्डों की संख्या 17 से बढ़कर 21 हो गई है और आरक्षण की नई तस्वीर सामने आ चुकी है. जिला प्रमुख का पद ST ओपन के लिए आरक्षित है, जबकि 21 वार्डों में सिर्फ वार्ड नंबर 9 ST ओपन के लिए आरक्षित किया गया है. ऐसे में जिला परिषद में बहुमत हासिल करने के साथ ही राजनीतिक दलों की नजर उन ST चेहरों पर भी रहेगी, जो चुनाव जीतकर जिला प्रमुख पद के दावेदार बन सकते हैं.

ओरण के मुद्दे पर भी सियासी बहस
भाजपा ने चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं. पार्टी का कहना है कि नए परिसीमन का फैसला उसके अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है और संगठन अपने कार्यकर्ताओं के आधार पर चुनाव मैदान में उतरेगा. भाजपा ने वार्ड स्तर पर प्रभारी और संयोजक भी नियुक्त किए हैं.

ओरण संरक्षण के मुद्दे पर भाजपा और टीम ओरण के बीच सियासी बहस सामने आ रही है. जैसलमेर विधायक छोटूसिंह भाटी का कहना है कि सरकार बनने के बाद लगातार ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जा रहा है और ओरण दर्ज करना पार्टी का ध्येय है. उनका कहना है कि ओरण के मुद्दे को सीधे चुनाव से नहीं जोड़ना चाहिए. निर्दलीय उम्मीदवारों के मैदान में उतरने को उन्होंने चुनाव का सामान्य हिस्सा बताया.

कांग्रेस ने बिजली-पानी और रोजगार के मुद्दों पर सरकार को घेरा
कांग्रेस चुनाव को सरकार के कामकाज से जोड़कर देख रही है. कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री शाले मोहम्मद का दावा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली, पानी, चारा और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर लोगों में नाराजगी है. उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव में कांग्रेस जिला प्रमुख के साथ 10 में से 7 पंचायत समितियों में प्रधान बनाने की स्थिति में होगी. ओरण संरक्षण के मुद्दे पर शाले मोहम्मद ने कहा कि उनके कार्यकाल में उनके विधानसभा क्षेत्र में 30 हजार बीघा ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने का काम हुआ. भाजपा पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि ओरण संरक्षण के लिए लोग 700 किलोमीटर पैदल चले, लेकिन सरकार पर इसका कोई असर नहीं हुआ. उनका कहना है कि ओरण के मुद्दे पर लोगों की नाराजगी चुनाव में भाजपा को नुकसान पहुंचा सकती है.

टीम ओरण उतारेगी निर्दलीय प्रत्याशी, संरक्षण बनेगा चुनावी मुद्दा
टीम ओरण ने इस बार चुनाव में अपनी सीधी राजनीतिक मौजूदगी का ऐलान किया है. टीम से जुड़े सुमेर सिंह का कहना है कि ओरण और गोचर संरक्षण की लड़ाई लंबे समय से चल रही है. उन्होंने कहा कि इस बार ओरण की आवाज को बुलंद करने के लिए टीम ओरण और जनता मिलकर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेगी. उनका आरोप है कि भाजपा सरकार और पिछली कांग्रेस सरकार, दोनों ने ही इस मुद्दे पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया.टीम ओरण के इस ऐलान से चुनावी मुकाबले में नया समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है. ओरण और गोचर संरक्षण से जुड़े मुद्दे ग्रामीण मतदाताओं के बीच किस तरह प्रभाव डालते हैं, इस पर भी राजनीतिक दलों की नजर रहेगी.

2020 में क्रॉस वोटिंग ने बदला था जिला प्रमुख का चुनावी गणित
जैसलमेर के चुनावी इतिहास में क्रॉस वोटिंग का असर पहले भी सामने आ चुका है. साल 2020 में जिला परिषद की 17 सीटों में कांग्रेस ने 9 और भाजपा ने 8 सीटें जीती थीं. इसके बावजूद जिला प्रमुख के चुनाव में भाजपा के प्रताप सिंह को 12 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी रुकिया खातून को 5 वोट मिले. यानी पार्टीवार सीटों के आंकड़ों से अलग जिला प्रमुख के चुनाव में क्रॉस वोटिंग ने नतीजे को प्रभावित किया था.इस बार भी एक ओर क्रॉस वोटिंग की आशंका और दूसरी ओर टीम ओरण के निर्दलीय प्रत्याशियों के मैदान में उतरने की संभावना भाजपा और कांग्रेस, दोनों के लिए चुनौती बन सकती है.

जिला प्रमुख की कुर्सी तक पहुंचने के लिए होगी सियासी रणनीति की परीक्षा
जैसलमेर में इस बार पंचायतीराज चुनाव का मुकाबला कई स्तरों पर दिलचस्प होता नजर आ रहा है. जिला प्रमुख पद का ST आरक्षण राजनीतिक दलों के लिए नए चेहरों की तलाश को अहम बना रहा है. वहीं, टीम ओरण के निर्दलीय प्रत्याशियों के उतरने से ओरण संरक्षण का मुद्दा भी चुनावी बहस के केंद्र में आ गया है. अब निगाहें प्रत्याशियों के ऐलान, चुनावी गठजोड़ और जमीनी समीकरणों पर टिकी हैं. साल 2026 का ये चुनाव सिर्फ जिला परिषद और पंचायत समितियों में बोर्ड बनाने की लड़ाई नहीं, बल्कि जिला प्रमुख की कुर्सी तक पहुंचने वाले सियासी गणित की भी परीक्षा होगा.

 

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Shankar Dan

Shankar Dan

शंकर दान, पिछले 12 से अधिक वर्षों से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सक्रिय एक अनुभवी और प्रतिष्ठित पत्रकार हैं, जो वर्तमान में ज़ी मीडिया (Zee Media) के लिए राजस्थान के सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सीमावर्ती जिले जैसलमेर से ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे हैं. उनके कार्यक्षेत्र में राजस्थान की राजनीतिक हलचलों और विधानसभा - लोकसभा चुनावों की कवरेज से लेकर भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े सुरक्षा व सामरिक मुद्दे, जैसलमेर की समृद्ध सांस्कृतिक व ऐतिहासिक पर्यटन विरासत, और मरुस्थलीय पारिस्थितिकी व गोडावण (Great Indian Bustard) संरक्षण जैसे वन्यजीव विषय प्रमुखता से शामिल हैं. इसके साथ ही वे स्थानीय जनसरोकार की समस्याओं और क्षेत्रीय घटनाओं को राष्ट्रीय पटल पर पूरी विश्वसनीयता के साथ उठाने के लिए पहचाने जाते हैं.
Read More