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पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ पर बड़ा पलटवार करते हुए कहा कि उनका इस्तीफा हो चुका है और पंचायत चुनाव के बाद इसे स्वीकार कर लिया जाएगा. डोटासरा ने कहा कि मदन राठौड़ का पाकिस्तान प्रेम आम जनता और उनकी पार्टी के नेताओं के सामने भी आ चुका है. उन्होंने आरोप लगाया कि मदन राठौड़ सिर्फ बैठकर बयानबाजी कर रहे हैं. नियम-कायदों को लेकर मदन राठौड़ के बयान पर डोटासरा ने कहा कि वे खुद पेशे से वकील हैं और मदन राठौड़ को वकालत आती है या नहीं, यह सवाल है. उन्होंने कहा कि मदन राठौड़ को खुद नियम-कानून का ज्ञान नहीं है.
सोमवार शाम से जारी है धरना
कांग्रेस नेताओं ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 की शाम से जयपुर पुलिस कमिश्नरेट परिसर में धरना शुरू किया, जो पूरी रात जारी रहा. PCC चीफ गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और कई विधायक रातभर परिसर में मौजूद रहे. नेताओं ने वहीं बिस्तर बिछाकर रात गुजारी. उनका कहना है कि कानून के तहत दूसरे राज्य में हुई घटना के मामले में भी जीरो FIR दर्ज कराई जा सकती है, लेकिन पुलिस राजनीतिक दबाव में कार्रवाई नहीं कर रही है. इस मामले में राहुल गांधी ने भी डोटासरा को फोन कर जयपुर में FIR दर्ज कराने की पहल करने को कहा था.
अशोक गहलोत ने क्या कहा?
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत देर रात करीब 12 बजे पुलिस कमिश्नरेट पहुंचे और धरने में शामिल हुए. उन्होंने कहा कि कानून में जीरो FIR दर्ज करने का प्रावधान है, फिर भी पुलिस मामला दर्ज नहीं कर रही है. अगर दूसरे राज्यों में जीरो FIR दर्ज हो सकती है, तो राजस्थान में ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा?
डोटासरा ने दी आंदोलन की चेतावनी
गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि FIR दर्ज कराना रितु बराला का अधिकार है, पुलिस की मेहरबानी नहीं. उन्होंने कहा कि जब तक FIR दर्ज कर उसकी कॉपी नहीं दी जाती, कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी. उन्होंने चेतावनी दी कि कार्रवाई नहीं होने पर मंगलवार को प्रदेशभर से कार्यकर्ता जयपुर पहुंचकर कमिश्नरेट का घेराव करेंगे.
टीकाराम जूली ने भी सरकार को घेरा
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि देश में दो तरह के कानून नहीं चल सकते. उन्होंने आम लोगों से पुलिस कमिश्नरेट पहुंचकर इस लड़ाई में साथ देने की अपील की.
क्या होती है जीरो FIR?
जीरो FIR के तहत शिकायतकर्ता किसी भी पुलिस थाने में मामला दर्ज करा सकता है, भले ही घटना उस थाने के क्षेत्र में न हुई हो. इसका मकसद गंभीर मामलों में देरी रोकना और तुरंत कार्रवाई शुरू करना है. बाद में संबंधित क्षेत्र के थाने को मामला सौंप दिया जाता है. सामान्य FIR की तरह शुरुआत में नियमित नंबर देने के बजाय इसे जीरो नंबर से दर्ज किया जाता है.