Bhilwara News: भीलवाड़ा जिले की तखतपुरा-कन्याखेड़ी ग्राम पंचायत में ग्रामीणों ने आपसी एकता और भाईचारे की अनोखी मिसाल पेश की है. यहां ग्रामीणों ने सरपंच पद के प्रत्याशी का चयन करने के लिए भगवान के दरबार में गुप्त मतदान कराया. गांव के चारभुजा मंदिर परिसर में बैठक हुई, जिसमें सभी प्रत्याशियों को साथ बैठाकर ग्रामीणों ने पहले कुछ शर्तें रखीं. इसके बाद दो प्रत्याशियों के बीच गुप्त मतदान कराया गया. बुधवार को हुई मतगणना के बाद भेरूलाल नायक की पत्नी को सरपंच पद के लिए चुना गया. यह परिवार खेती-किसानी से जुड़ा है.
1800 मतदाताओं वाले गांव में होगी चुनावी प्रक्रिया
तखतपुरा गांव में करीब 1800 मतदाता हैं. यहां दूसरे चरण में पंचायतीराज चुनाव के तहत मतदान होना है. आरक्षण की लॉटरी में सरपंच पद की सीट अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित हुई है. ऐसे में गांव के लोगों ने चुनाव में आपसी खींचतान और गुटबाजी से बचने के लिए अलग तरीका अपनाया. ग्रामीणों ने चारभुजा मंदिर परिसर में बैठक की और गांव के सभी प्रत्याशियों को एक साथ बैठाया. गांव के मौजीज लोगों की मौजूदगी में प्रत्याशियों के चयन को लेकर चर्चा की गई.
बालिका स्कूल के लिए रखी 1.51 लाख रुपये जमा कराने की शर्त
बैठक में ग्रामीणों ने बालिका स्कूल में कमरे बनवाने के लिए भामाशाह के रूप में 1 लाख 51 हजार रुपये जमा कराने का प्रस्ताव रखा. ग्रामीणों की इस मांग पर दो प्रत्याशियों ने सहमति जताते हुए तय राशि जमा करवा दी. इसके बाद सरपंच पद के लिए मैदान में दो प्रत्याशी रह गए. ग्रामीणों ने तय किया कि इन दोनों में से किसी एक का चयन गुप्त मतदान के जरिए किया जाएगा, ताकि हर व्यक्ति अपनी पसंद बता सके और किसी तरह का विवाद न हो.
भगवान के सामने पर्चियों से हुआ गुप्त मतदान
ग्रामीणों ने भगवान को ही निर्वाचन अधिकारी मानकर मतदान की प्रक्रिया पूरी की. बुधवार को गांव के पुरुषों ने गुप्त मतदान किया. इसमें पर्चियों के जरिए अपनी पसंद के प्रत्याशी को वोट दिया गया. मतदान पूरा होने के बाद देर शाम मंदिर परिसर में ही पर्चियों की गिनती की गई. मतगणना के बाद भेरूलाल नायक की पत्नी को सरपंच पद का प्रत्याशी चुना गया. ग्रामीणों ने इस फैसले को स्वीकार किया और गांव में आपसी सहमति बनाए रखने की कोशिश की.
चुनाव से ज्यादा भाईचारे को दी प्राथमिकता
गांव के लोगों की इस पहल का मुख्य मकसद चुनाव के दौरान आपसी मनमुटाव और गुटबाजी से बचना है. आमतौर पर पंचायत चुनाव में एक ही गांव के लोग अलग-अलग पक्षों में बंट जाते हैं. कई बार चुनावी मुकाबले के कारण रिश्तों में भी तनाव आ जाता है. तखतपुरा के ग्रामीणों ने गुप्त मतदान के जरिए लोगों को अपनी पसंद चुनने का मौका दिया और साथ ही आपसी एकता बनाए रखने की कोशिश की.
गांव में बनी अनोखी मिसाल
ग्रामीणों ने इस पूरी प्रक्रिया में भगवान को साक्षी मानकर मतदान और मतगणना की. इससे लोगों को अपनी पसंद जाहिर करने का मौका मिला और चयन की प्रक्रिया भी सबके सामने पूरी हुई. गांव की इस पहल ने भाईचारे और आपसी सहमति का संदेश दिया है. हालांकि, इस तरह गांव में प्रत्याशी चुनने की प्रक्रिया और आधिकारिक पंचायत चुनाव की प्रक्रिया अलग-अलग हैं. आधिकारिक चुनाव में प्रत्याशी की जीत का फैसला निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार ही होगा.
Reporter - Ramawatar Isran