Bihar Flood: बिहार के भागलपुर के राघोपुर में महादेवपुर घाट के पास गंगा का जलस्तर घटने के बीच तटबंध का 30 मीटर से ज्यादा हिस्सा धंस गया. इसके साथ ही गंगा ने दोबारा कटाव शुरू कर दिया है.
कर्मा पूजा के दौरान बिहार के कई जिलों से बड़ी दर्दनाक हादसे सामने आए. इस दिन अलग-अलग जिलों में कई लोग के डूबने की घटनाएं सामने आईं, जिनमें से 5 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई.
बिहार ही नहीं, देश में कोई आपदा हो और राजनीति न हो, ऐसा कम देखने को मिलता है. आपदा में अवसर कम लोग तलाश पाते हैं. अब बिहार में आपदा आई है तो इसमें विपक्ष करे भी तो क्या? मुख्यमंत्री राहत कोष में अपनी सैलरी जमा कर दे तो भी जो काम होगा, उसका क्रेडिट तो सरकार ले जाएगी.
बिहार में बाढ़ का पानी उतरने के बाद चारों तरफ बर्बादी के निशान देखने को मिल रहे हैं. बाढ़ग्रस्त इलाकों में मकान-दुकान और अन्य इमारतों में काफी कूड़ा कचरा भरा हुआ है. घरों में रखा सारा सामान पानी में पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है. इसके अलावा राज्य की सड़कों को भी भारी नुकसान हुआ है.
बिहार में आई बाढ़ से लगभग 49.72 लाख लोग प्रभावित हो रहे हैं. सम्राट सरकार की ओर से पीड़ित परिवारों को 7-7 हजार रुपये दिए जा रहे हैं. 15 सितंबर को 8 लाख 27 हजार 472 परिवारों को इसका लाभ मिला था. हालांकि, अब भी काफी संख्या में लोगों को इसका लाभ नहीं मिला है.
बिहार में बाढ़ आती नहीं है, बिहार में बाढ़ लौटती है. सवाल यह है कि हर साल लौटने वाली बाढ़ के बावजूद हमारी तैयारी इतनी कमजोर क्यों होती है? आखिर बिहार की बाढ़ का अंत कब होगा? या हमने बाढ़ को ही बिहार की नियति मान लिया है?
बिहार में बाढ़ से करीब 50 लाख लोग प्रभावित हो रखे हैं. प्रदेश की राजधानी पटना के अलावा भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया जिलों में बाढ़ से स्थिति काफी खराब हो रखी है. इस बीच कांग्रेस आलाकमान ने पार्टी कार्यकर्ताओं से बाढ़ पीड़ितों की मदद करने की अपील की है.
गंगा, गंडक, कोसी, पुनपुन समेत कई नदियों में पानी बढ़ने से बिहार के 15 जिलों के 49.67 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. प्रभावित लोगों की मदद के लिए सामुदायिक रसोई और राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं. बाढ़ प्रभावित परिवारों को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज बड़ी राहत देने वाले हैं.
बिहार में बाढ़ पर राजनीति देखने को मिल रही है. तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है. तेजस्वी ने कहा कि राज्य में बाढ़ के कारण 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, हजारों मवेशी लापता हैं और हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.
बिहार में आई बाढ़ ने 15 जिलों के 48 लाख से ज्यादा लोगों को प्रभावित किया है. राहत की बात यह है कि अब धीरे-धीरे बाढ़ का पानी घटने लगा है, लेकिन कुछ इलाके अब भी खतरे में हैं. बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए बिहार सरकार ने कई कदम उठाए हैं. सरकार की ओर से कुल 1,251 सामुदायिक रसोई और 13 राहत शिविर लगाए हैं.
भले ही कई जगहों से बाढ़ राहत शिविरों में अच्छी व्यवस्था की खबरें आ रही हैं, लेकिन अब भी कई ऐसे इलाके हैं, जहां सरकारी सहायता नहीं पहुंच पा रही है. अधिकारियों को ऐसे इलाकों के लोगों के प्रति बेहद संवेदनशील होने की जरूरत है.
Begusarai Flood: बेगूसराय के मटिहानी विधानसभा क्षेत्र के खोरामपुर गांव में बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पूरा गांव पानी से घिरकर टापू में तब्दील हो गया है. करीब 20 से 25 परिवार पिछले 20 दिनों से बाढ़ के पानी के बीच रहने को मजबूर हैं.
एक ही परिवार के सभी लोग खेत की ओर जा रहे थे, लेकिन रास्ते में जमा पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लगा पाए और एक एक कर डूबने लगे. कुछ लोगों ने बचाने की कोशिश भी की, लेकिन सफल नहीं हुए. इस तरह बाढ़ के पानी ने भागलपुर में बड़ी तबाही मचा दी.
अगर यह तात्कालिक बेचैनी नहीं है और वाकई में बिहार सरकार बाढ़ से लोगों को निजात दिलाने के लिए बेचैन है तो फिर इसकी तारीफ की जानी चाहिए, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सरकारों ने पहले भी ऐसे न जाने कितने ऐलान किए, लेकिन बिहार को बाढ़ से मुक्ति नहीं मिली. सरकारों से मुक्ति जरूर मिल गई.
भागलपुर के बाढ़ राहत कैंप की तस्वीरें उत्साह बढ़ाती हैं. मकान डूबने का दर्द लिए लोगों के लिए ऐसी व्यवस्थाएं उनका दुख-दर्द तो दूर नहीं कर सकतीं, लेकिन मरहम लगाने का काम जरूर करती हैं. बिहार के बाकी बाढ़ग्रस्त इलाकों में भी ऐसी ही सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए.
भागलपुर और बेगूसराय में बाढ़ का कहर देखने को मिल रहा है. 6 लाख से अधिक आबादी इससे प्रभावित है, लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है. वहीं, गंगा के जलस्तर में गिरावट के बावजूद खतरा बरकरार है.
Bihar Flood: बिहार में कोसी और गंगा के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है. मधेपुरा, बेगूसराय, भागलपुर और लखीसराय के कई इलाकों में पानी फैल गया है। कहीं स्कूलों में पानी घुसने से पढ़ाई बंद है तो कहीं ग्रामीण नाव के सहारे आवागमन कर रहे हैं.
Bihar Flood: बेगूसराय के मटिहानी विधानसभा क्षेत्र की रचियाही पंचायत में बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है. पिछले 14 दिनों से पांच गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं. करीब 3 से 4 हजार घरों में पानी घुस चुका है, जबकि लगभग 70 हजार लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं.
कोसी और सोन नदियों का पानी कम होना निश्चित रूप से बिहार के लोगों और सरकार के लिए राहत की खबर है, लेकिन गंगा और गंडक के अलावा पुनपुन नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.
बाढ़ तो बिहार के लिए शाप की तरह है और हर साल तबाही मचाना इसकी नियति बन चुकी है, लेकिन इसमें कोई दोराय नहीं है कि इस बार सम्राट चौधरी की सरकार ने समय रहते सक्रियता दिखाई और पहले से तैयारी की गई थी. बाढ़ पीड़ितों ने भी सरकार के इस प्रयास को सराहा है.
Bihar Flood: बिहार में इस समय कई नदियां उफान पर है. इससे कई गांव जलमग्न हो गए हैं. दानापुर, भोजपुर, शेखपुरा और खगड़िया समेत अन्य जिलों में लोगों की समस्याएं बढ़ गई है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में कम्युनिटी किचन भी चलाए जा रहे हैं.
Bihar Flood: भागलपुर और सोनपुर में बाढ़ से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं. गंगा का जलस्तर बढ़ने से गांवों से लेकर शहरी इलाकों तक पानी ही पानी दिख रहा है. वहीं सोनपुर की डेढ़ दर्जन से ज्यादा पंचायतें बाढ़ की चपेट में हैं, कई घरों में पानी घुस गया है और सड़कें जलमग्न होने से आवागमन प्रभावित है.