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आम तौर पर जब आप बाढ़ या किसी आपदा से पीड़ितों के लिए बनाए गए राहत शिविर की कल्पना करते होंगे तो जेहन में हाल-बेहाल लोगों का एक सीन उभरकर सामने आता है. हालांकि, बिहार के भागलपुर में बाढ़ राहत शिविर में इसके उलट तस्वीर नजर आती है. भागलपुर जिले की 92 पंचायतें बाढ़ प्रभावित हैं. प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन अलग-अलग स्थानों पर 11 राहत शिविर संचालित कर रहा है. 183 से ज्यादा कम्युनिटी किचन भी चलाए जा रहे हैं. इनमें से भागलपुर के पॉलिटेक्निक कॉलेज में बनाए गए राहत शिविर की सुविधाएं देखकर आप दंग रह जाएंगे.
बच्चों के मनोरंजन के लिए LED स्क्रीन
इस राहत शिविर में बाढ़ पीड़ितों के लिए रहने, खाने और स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ बच्चों की जरूरतों का भी विशेष ध्यान रखा गया है. यहां बच्चों के मनोरंजन के लिए LED स्क्रीन लगाई गई है, जिस पर कार्टून फिल्में दिखाई जा रही हैं. बाढ़ के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए शिविर में अस्थाई विद्यालय भी शुरू किया गया है.
136 बच्चों के लिए 6-7 शिक्षकों की ड्यूटी
टेंट के नीचे चल रहे इस अस्थायी विद्यालय में 136 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. इसके लिए 6-7 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है और एक्टिविटी के माध्यम से बच्चों को शिक्षा दी जा रही है. छोटे बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र भी बनाया गया है. हर सुबह योगाभ्यास की भी व्यवस्था की गई है.
राहत शिविर में रह रहे लोगों का कहना है कि बाढ़ के कारण घर छोड़कर शिविर में रहना मजबूरी है, लेकिन प्रशासन की ओर से यहां खाने-पीने, रहने, इलाज और बच्चों की पढ़ाई के साथ उनके मनोरंजन तक की व्यवस्था की गई है. इससे बच्चों को भी काफी सुकून मिल रहा है.
बाढ़ के बीच राहत और बचाव कार्यों को लेकर जिला प्रशासन लगातार सक्रिय है. जिलाधिकारी अलंकृता पांडे खुद राहत व्यवस्था की मॉनिटरिंग कर रही हैं और लगातार अलग-अलग राहत शिविरों का जायजा लेकर व्यवस्थाओं को देख रही हैं. अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक समय पर जरूरी सुविधाएं पहुंचाने के निर्देश दिए जा रहे हैं.
बाढ़ पीड़ित ने क्या कहा
मुश्किल हालात के बीच राहत शिविरों में बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, पोषण और मनोरंजन का ध्यान रखा जाना प्रशासन की ओर से उन्हें सामान्य माहौल देने की एक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. नीरज कुमार नाम के बाढ़ पीड़ित ने बताया कि राहत कैंप में व्यवस्था ठीक है और अच्छा खाना भी मिल रहा है. पहले ऐसी व्यवस्थाएं नहीं होती थीं. इस बार तो पंखा भी लगाए गए हैं. हालांकि, नीरज कुमार ने कहा कि सरकार को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि हम बार-बार बाढ़ में न डूबें. बांध वगैरह की व्यवस्था अच्छी की जानी चाहिए.
आंगनबाड़ी सुपरवाइजर की बात
राहत शिविर में खुले आंगनबाड़ी केंद्र की सुपरवाइजर रंजना भारती ने बताया कि हमने कैंप में एक सर्वे के माध्यम से जानकारी जुटा ली है कि कितनी महिलाएं गर्भवती हैं और 0 से 6 साल के कितने बच्चे यहां मौजूद हैं. उन सभी की सुविधाओं का ख्याल रखा जा रहा है. बच्चों के खेलने, उनके लिए दूध और पोषाहार की सुविधा दी जा रही है. यहां बच्चों के टीकाकरण की भी व्यवस्था की गई है. रंजना भारती ने बताया कि पहले भी व्यवस्थाएं अच्छी होती थीं, लेकिन इस बार प्रभावी व्यवस्था की गई है.
अस्थायी विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक की राय
अस्थायी विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक अमरेश कुमार ने बताया कि बच्चों को कार्टून देखने के लिए टेलीविजन लगाए गए हैं. बाढ़ के चलते इन लोगों के जीवन में एक दुख का माहौल बन गया है, जिसे कम करने की कोशिश के क्रम में ये सब व्यवस्थाएं की गई हैं. उन्होंने कहा कि पहली बार राहत शिविर में स्कूल की व्यवस्था की गई है. बच्चों के लिए दूध और बिस्कुट की भी व्यवस्था की गई है. यह नई पहल है.
रिपोर्ट: अश्वनी कुमार, भागलपुर