Bihar MLC Election 2026: बाढ़ पहुंचे जनसुराज के मुखिया प्रशांत किशोर ने अनुज सिंह की जगह अनंत सिंह को अपना कैंडिडेट बता दिया. यहां तक की माला पहनाने का भी ऐलान कर दिया. फिर बाद में उन्होंने अपनी गलती सुधारी.
RLM के तीनों विधायकों ने बैठक की और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र सारण से निर्दलीय उम्मीदवार राम पुकार सिन्हा को लेकर बड़ा फैसला लिया. बैठक में ये तय हुआ कि राम पुकार सिन्हा चुनाव नहीं लड़ेंगे. वह जदयू उम्मीदवार आनंद पुष्कर का समर्थन करेंगे.
पटना के बिहटा पहुंचे प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि ये लोग इतने अहंकारी हो गए हैं और कहते हैं कि कुत्ता-बिल्ली को भी खड़ा कर देंगे, तो जनता वोट हमें ही देगी. इस अहंकार पर अंकुश लगाने के लिए एनडीए के खिलाफ वोट दीजिए.
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार के समर्थन में निशांत कुमार ने बाढ़ में चुनावी जनसभा को संबोधित किया. बाढ़ का इलाका अनंत सिंह का गृहक्षेत्र है और निशांत कुमार यहां पर पहुंचे. उन्होंने नीरज कुमार के लिए वोट मांगा.
बिहार में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की 8 सीटों पर हो रहे एमएलसी चुनाव को लेकर एनडीए में लगातार बैठकें हो रही हैं. विपक्ष का दावा है कि जीत हमारी सुनिश्चित है, जबकि एनडीए की टेंशन अनंत सिंह और बागियों ने बढ़ा दी है.
विधायक अनंत सिंह और जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार के बीच राजनीतिक तल्खी खुलकर सामने आ गई है. जदयू विधायक ने कहा कि हम पुदीना सिंह हैं, 23 तारीख को गैस निकाल देंगे.
राष्ट्रीय लोक मोर्चा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के सामने अजीब स्थिति पैदा हो गई है. बेटे को बिना विधायक चुने मंत्री बनाने से उनकी पार्टी में असंतोष अब घर कर गया है. उनकी पार्टी के एकमात्र विधायक पत्नी स्नेहलता कुशवाहा को छोड़कर तीनों विधायक उनके खिलाफ हो गए हैं और यह पहली बार नहीं हुआ है.
इसमें कोई दोराय नहीं कि भारतीय जनता पार्टी में अनुशासन को तवज्जो दी जाती रही है. वहां नेतृत्व को आंख दिखाने वालों को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है. हालांकि, दरभंगा में आदित्य कुमार झा के खिलाफ कार्रवाई न करना चौंका रहा है. देखना है कि उनकी बगावत को पार्टी कैसे लेती है.
जन सुराज पार्टी ने कई जगह मुकाबले को त्रिकोणीय तो बागियों ने कुछ सीटों पर बहुकोणीय बना दिया है. इसलिए सभी दलों की धुकधुकी बढ़ी हुई है. ऐसे में सभी की नजरें जन सुराज पार्टी की ओर टिकी हैं. अगर वह एक या दो सीट भी निकाल लेती है तो यह उसकी बड़ी उपलब्धि होगी.
बिहार एमएलसी चुनाव में प्रचार के दौरान नटवरलाल और गालीबाज वाले बयानों से सियासत गरमा गई है. डॉ. संजीव कुमार और नवल किशोर यादव, भीष्म सहनी के बीच भाषा की मर्यादा तार-तार हो गई.
संजय कुमार झा ने विपक्ष के चुनाव आयोग पर हल्लाबोल को गलत ठहराया है. उनका कहना है कि विपक्ष जहां चुनाव हारता है, वहीं निष्पक्ष चुनाव नहीं होते. जहां जीत जाता है, वहां निष्पक्षता से चुनाव होते हैं. इसके अलावा, फरक्का जल संधि और विधान परिषद चुनाव को लेकर भी अपनी बात रखी.
बिहार विधान परिषद चुनाव को देखते हुए शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. नवंबर के पहले सप्ताह से इस प्रक्रिया को फिर से शुरू किया जा सकता है.
समस्तीपुर में PK ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा है कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र को लेकर बिहार में हो रहे चुनाव में जन सुराज के उम्मीदवार जीत कर आते हैं, तो बिहार के शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाना जन सुराज की जिम्मेदारी होगी.
ललन सिंह के हस्तक्षेप के बाद भी अनंत सिंह और नीरज कुमार का विवाद समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है. अब अनंत सिंह ने जन सुराज कैंडिडेट अनुज सिंह के लिए रोडशो निकालकर वोट मांगे.
प्रशांत किशोर के निशाने पर एक बार फिर से बीजेपी का अभेद्य गढ़ है. खास बात यह है यहां भी बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. यही वजह है कि नितिन नवीन ने पटना आकर पार्टी नेताओं-कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कीं और चुनाव को लेकर कई दिशा-निर्देश दिए.
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर हो रहे चुनाव में नामांकन की प्रक्रिया मंगलवार (6 अक्टूबर) को समाप्त हो गई है. सभी 8 सीटों पर कुल 164 उम्मीदवारों ने पर्चा भरा है. आज सभी उम्मीदवारों के नामांकन फॉर्म की स्क्रूटनी होगी. वहीं, 9 अक्टूबर को नामांकन वापसी की आखिरी तारीख है.
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों होने वाले चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही एनडीए और महागठबंधन के अंदर सीटों को लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं.
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में NDA के भीतर दिलचस्प सियासी तस्वीर सामने आई है. एक तरफ NDA की ओर से जेडीयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर मैदान में हैं, तो दूसरी तरफ NDA के घटक दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रदेश महासचिव रामपुकार सिन्हा ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन कर चुनावी मुकाबले को नया मोड़ दे दिया है. रामपुकार सिन्हा के समर्थन में RLM के प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह समेत पार्टी के तीन विधायक खुलकर सामने आए हैं.
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है और ऐसे में अब सभी प्रमुख दलों के उम्मीदवार नामांकन की प्रक्रिया पूरी करने में लगे हैं. तिरहुत से अभिषेक झा, पटना से नीरज कुमार और नवल किशोर यादव, सारण से आनंद पुष्कर, तो दरभंगा से सर्वेश सिंह और डॉ. घनश्याम राय समेत राजद-कांग्रेस के उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया.
ललन सिंह ने एक बात सही कहा कि ताली दोनों हाथों से बजती है. अगर नीरज सिंह ने अनंत सिंह का समर्थन नहीं किया तो वे फिर क्यों अनंत सिंह का समर्थन हासिल करना चाहते हैं. कोई जोर-जबर्दस्ती तो है नहीं. हालांकि, इस मामले में अभी नीरज सिंह का पक्ष नहीं आया है और पार्टी की भलाई के लिए अब कोई पक्ष आना भी नहीं चाहिए.
महागठबंधन में जब राजद और कांग्रेस आमने-सामने हुए तो एनडीए के नेताओं ने चुटकी ली थी. अब एनडीए में ही घमासान छिड़ गया है. एक तरफ एनडीए के तमाम बड़े नेता जेडीयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर के नामांकन में मौजूद रहे तो रालोमो के 3 विधायक रामपुकार सिन्हा के नामांकन की शोभा बढ़ाने के लिए मौजूद रहे.
नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच विवाद को ललन सिंह ने शांत करवा दिया है. ललन सिंह ने कहा कि क्रिया होगी तो प्रतिक्रिया होगी, गलती एक तरफ से नहीं होती है.