)
क्या एनडीए में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है या गठबंधन में है गांठ? यह सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि आज छपरा में जो राजनीतिक नजारा देखने को मिला, उसके बाद एनडीए के भीतर सब कुछ ठीक-ठाक तो नहीं कहा जा सकता. सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपाध्यक्ष रामपुकार सिंह ने सोमवार को पार्टी के स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल कर दिया. खास बात यह रही कि उनके नामांकन के दौरान राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष माधव आनंद, दिनारा के विधायक आलोक कुमार और विधायक रामेश्वर महतो समेत बड़ी संख्या में पार्टी के नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे. पिछले साल विधानसभा चुनाव तक एनडीए के नेता 'पांच पांडव' का जिक्र कर गठबंधन के घटक दलों की तुलना करते नहीं अघाते थे, लेकिन अब उस एकजुटता को भारी नुकसान पहुंचा है.
कार्यकर्ताओं की लगातार हो रही थी उपेक्षा
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चार विधायकों में से तीन विधायकों की मौजूदगी ने इस पूरे घटनाक्रम को और भी महत्वपूर्ण बना दिया. नामांकन सभा को संबोधित करते हुए माधव आनंद ने साफ कहा कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव पार्टी के नाम पर नहीं, बल्कि प्रत्याशी के व्यक्तित्व और कार्यकर्ताओं के सम्मान के मुद्दे पर होता है. उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही थी, जिसके विरोध में वे कार्यकर्ताओं के साथ खड़े हैं.
रालोमो ने अपना स्वतंत्र प्रत्याशी उतारा: महतो
वहीं, विधायक रामेश्वर महतो ने कहा कि एनडीए में सब कुछ ठीक है, लेकिन कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए चार में से तीन विधायक एक साथ आए हैं और राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने अपना स्वतंत्र प्रत्याशी मैदान में उतारा है. उन्होंने रामपुकार सिंह की जीत सुनिश्चित होने का दावा किया.
कार्यकर्ताओं को तवज्जो न मिलने से लेना पड़ा फैसला: आलोक
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार सिंह ने भी कहा कि उनकी पार्टी एनडीए के साथ पूरी मजबूती से जुड़ी हुई है, लेकिन शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं मिलने के कारण यह फैसला लेना पड़ा है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले का बिहार की एनडीए सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा और पार्टी सरकार के साथ पूरी तरह खड़ी है.
एकजुटता को लेकर उठे सवाल
लेकिन, सवाल यही है कि अगर एनडीए में सब कुछ ठीक-ठाक है, तो फिर एनडीए के एक प्रमुख घटक दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चार में से तीन विधायक अपने ही गठबंधन के आधिकारिक समीकरण से अलग जाकर स्वतंत्र प्रत्याशी के समर्थन में क्यों खड़े हैं?
बिहार में एनडीए के पांच घटक दलों में शामिल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायकों के इस बागी तेवर का इस चुनाव पर कितना असर पड़ेगा, यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन इतना जरूर है कि सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव ने एनडीए के भीतर की सियासी खींचतान को सामने ला दिया है.
छपरा से राकेश कुमार की रिपोर्ट