शारदीय नवरात्रि पूजा के समापन पर कलश विसर्जन के नियम जानना जरूरी है. इस खबर में कलश के नारियल, जल, जवारे और चावल का क्या करना चाहिए उसके बारे में डिटेल से बताएंगे.
झुंझुनूं में स्त्री शक्ति महिला संस्थान ने नवरात्र पर अनूठी पहल करते हुए बिना हेलमेट वाहन चला रहे लोगों को तिलक लगाकर राखी बांधी और 100 से अधिक हेलमेट वितरित किए. महिलाओं ने भाइयों से हेलमेट पहनकर वाहन चलाने और सुरक्षित घर लौटने का वादा लिया.
जोधपुर के लाल सागर क्षेत्र में कृषि मंडी के पीछे स्थित प्रागट्य संतोषी माता मंदिर नवरात्रि में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. मान्यता है कि यहां मां संतोषी स्वयं प्रकट हुई थीं. मंदिर में पदचिह्नों और शेर के पंजों के निशान को भी श्रद्धालु माता की महिमा से जोड़कर देखते हैं.
कोटपूतली-बहरोड़ जिले के विराटनगर के पास पापड़ी गांव की पहाड़ी पर अंबिका पीठ आस्था का प्रमुख केंद्र है. मान्यता है कि यहां मां सती के दाएं पैर की चार अंगुलियां गिरी थीं, इसलिए इसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है.
जयपुर के आमेर घाटी में बसा मनसा माता मंदिर अपनी मान्यताओं के लिए फेमस है. भक्तों का विश्वास है कि मंदिर के कुंड का पानी पीने से चर्म रोगों में राहत मिलती है. मान्यता के अनुसार, राजा मानसिंह ने यहां मन्नत मांगी थी और उसके पूरा होने पर मंदिर का नाम मनसा माता रखा गया.सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर की महंत एक महिला हैं.
आज हम इस खबर में नवरात्रि के सप्तमी तिथि से पहले सुई-धागे का प्रयोग क्यों नहीं करना चाहिए इसके बारे में डिटेल से बताएंगे. साथ ही मखाने की माला चढ़ाने के नियम और नजर दोष से जुड़े उपाय के बारे डिटेल से जानेंगे.
बांसवाड़ा शहर से करीब 6 किलोमीटर दूर कूपड़ा गांव में स्थित लगभग 300 साल पुराना विजवा माताजी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. मंदिर में लकवा, हाथ-पैर और कमर दर्द के रोगियों को राहत मिलने की मान्यता है. मान्यता के अनुसार, रोग से राहत मिलने पर भक्त माता के चरणों में लकड़ी से बने हाथ-पैर और पुतले चढ़ाते हैं.
इस खबर में हम नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करने से पहले देवी कवच क्यों पढ़ना चाहिए, इसके बारे में डिटेल से बताएंगे. साथ ही देवी कवच के महत्व, नियम और इससे मिलने वाले लाभ के बारे में भी बताएंगे.
राजस्थान के बाड़मेर में स्थित ऐतिहासिक गढ़ मंदिर शहर की पहचान और आस्था का प्रमुख केंद्र है. पहाड़ी की चोटी पर विराजित मां जोगमाया के दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं. मंदिर की पहाड़ी पर मां नागणेची का मंदिर भी स्थित है. दूर से नजर आने वाली धर्मध्वजा बाड़मेर की धार्मिक विरासत का प्रतीक है. पुराने गढ़ के अवशेष और 1965 और 1971 के युद्धों से जुड़ी स्थानीय जनश्रुतियां इस स्थान को खास बनाती हैं.
इस खबर में हम आपको शारदीय नवरात्र के दौरान सपने में मां दुर्गा के दर्शन होने का क्या मतलब होता है उसके बारे में बताएंगे. साथ ही मूर्ति देखने, शेर पर सवारी और आशीर्वाद मिलने के जैसे इशारों के बारे में भी जानेंगे.
जोधपुर जिले के भोपालगढ़ स्थित बागोरिया गांव का माताजी मंदिर सांप्रदायिक सौहार्द की अनोखी मिसाल है. यहां पिछले 14 पीढ़ियों से एक सिंधी मुस्लिम परिवार देवी मां की पूजा-अर्चना करता आ रहा है. करीब 500-600 साल पुरानी इस परंपरा में परिवार मंदिर में पूजा करने के साथ नमाज भी अदा करता है. पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 500 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं.
अब तक केवल दिसंबर महीने में रोशनी से जगमगाने वाला पार्क स्ट्रीट स्थित एलन पार्क इस बार एक ऐतिहासिक बदलाव का साक्षी बनने जा रहा है. करीब 370 वर्षों के इतिहास में यहां पहली बार दुर्गा पूजा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है.
शारदीय नवरात्र को लेकर गुजरात में तैयारियां पूरे जोर-शोर के साथ जारी हैं. नवसारी जिले में नवरात्रि पर रोबोट का गरबा लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. तो वहीं, अहमदाबाद के युवाओं में कैप्टन स्मित मच्छार और CWG 2030 का काफी क्रेज देखने को मिल रहा है.
शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होगा. हम इस खबर में आपको नवरात्र के शुरूआत में अपने मेन गेट पर कैसे निशान बनाने चाहिएं उसके बारे में डिटेल से बताएंगे.
शारदीय नवरात्रि में बाल और नाखून न काटने की परंपरा क्षौर कर्म और साधना के कंट्रोल से जुड़ी है. इस स्टोरी में जानिए क्या गलती से बाल या नाखून कट जाने पर पूजा का फल खत्म हो जाता है या ये केवल एक भ्रम है.