नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. जोधपुर में भी विभिन्न देवी मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं. इसी बीच शहर के लाल सागर क्षेत्र में कृषि मंडी के पीछे स्थित प्रागट्य संतोषी माता मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. मान्यता है कि इस स्थान पर मां संतोषी स्वयं प्रकट हुई थीं. यही वजह है कि नवरात्र के दौरान यहां भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं और दूर-दराज से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
प्राचीन मान्यताओं से जुड़े इस मंदिर में मां के प्रति भक्तों की अटूट आस्था देखने को मिलती है. मंदिर में पदचिह्नों और शेर के पंजों के निशान होने की बात भी श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी हुई है. भक्त इन निशानों को माता की महिमा का प्रतीक मानते हैं और दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.
दूर-दराज से पहुंचते हैं श्रद्धालु
प्रागट्य संतोषी माता मंदिर में केवल जोधपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ दिल्ली, हरियाणा और पंजाब से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं. नवरात्र के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है. इस दौरान सुबह से ही दर्शनार्थियों का पहुंचना शुरू हो जाता है और दिनभर भक्तों की आवाजाही बनी रहती है.
मंदिर पहुंचे कई श्रद्धालुओं का कहना है कि वे दूर-दराज से माता के दर्शन करने आते हैं. उनकी मान्यता है कि माता के दरबार में मांगी गई मन्नत पूरी होने पर वे हर साल यहां आकर धोक लगाते हैं. श्रद्धालु अपने अनुभव साझा करते हुए मां संतोषी के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं.
बारह महीने खुले रहते हैं माता के द्वार
नवरात्र के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन यहां सालभर भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं. बारहों महीने खुले रहने वाले इस मंदिर में लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और माता से परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं. नवरात्र में विशेष पूजन, श्रद्धालुओं की लंबी कतारें और दूर-दराज से आने वाले भक्त मंदिर की धार्मिक महत्ता को दर्शाते हैं. जोधपुर के इस प्राचीन आस्था स्थल पर मां संतोषी के दर्शन के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
Report- Rakesh Kumar Bhardwaj