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शारदीय नवरात्रि का समय आ चुका है. ये इस साल 10 अक्टुबर की रात को शुरू होगा 11 अक्टुबर की रात को खत्म हो जाएगा. इस दौरान कई लोग मां दुर्गा की पूजा के साथ नौ दिनों का व्रत भी रखते हैं.
जिसमें खान-पान से लेकर दिनचर्या तक कई नियम अपनाए जाते हैं. इन्हीं में एक परंपरा बाल और नाखून न काटने की भी है. लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या ये नियम सभी लोगों के लिए है.
आज हम इस खबर में जानेंगे कि क्या शास्त्रों में सचमुच नवरात्र के पूरे नौ दिनों में बाल और नाखून काटना मना बताया गया है.
धार्मिक परंपराओं में बाल काटना, दाढ़ी बनाना और नाखून काटने को क्षौर कर्म के दायरे में रखा जाता है. पुराने धर्मग्रंथों में इसके लिए अलग-अलग नियम मिलते हैं.
यानी बाल और नाखून काटने को लेकर हिंदू परंपरा में पहले से ही कुछ दिन फिक्स रहे हैं. धर्मसिंधु जैसे ग्रंथों में भी कई तिथियों पर क्षौर कर्म से बचने की बात कही गई है.
वहीं नवरात्रि के नौ दिन व्रत और साधना करने वाले लोगों के लिए खुद को संयम के साथ या कंट्रोल में रखने का समय होता है. इसलिए कई परिवारों में इस दौरान बाल और नाखून न काटने की परंपरा चली आ रही है.
नवरात्रि में यह नियम सबसे ज्यादा उन लोगों से जोड़ा जाता है जो विधि से व्रत या साधना करते हैं. कुछ परंपराओं में नौ दिन का व्रत रखने वालों को क्षौर कर्म से बचने की सलाह दी जाती है.
इसका उद्देश्य दिनचर्या को साधारण और संयमित रखना माना जाता है. व्रत रखने वाला इन दिनों पूजा, मंत्र जाप और ध्यान पर ज्यादा ध्यान देता है.
इसी सोच में बाहरी सजावट और खुद के श्रृंगार को कम रखने की परंपरा भी जुड़ गई. इसलिए इसे हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नियम मानना ठीक नहीं है. अलग-अलग परिवारों में इसके नियम अलग हो सकते हैं.
अक्सर कहा जाता है कि नवरात्र में बाल और नाखून काटने से घर की पॉजटिव एनर्जी खत्म हो जाती है. ऐसी बातें धार्मिक मान्यताओं में सुनने को मिलती हैं.
लेकिन इसे शास्त्र का सीधा और प्रमाणित नियम कहना ठीक नहीं होगा. मौजूद किताबों या ग्रंथों में ज्यादा जोर व्रत, संयम और तय किए गए नियम पर दिया गया है.
कुछ लोगों का कहना होता है कि बाल या नाखून काटने पॉजटिव एनर्जी खत्म हो जाती है तो ऐसा कोई प्रमाण नहीं है. इसलिए इस बात को धार्मिक मान्यता के रूप में ही समझना बेस्ट होता है.
पूजा करने वाले व्यक्ति को डरने के बजाय नियम की भावना को समझना चाहिए.
कई लोगों को यह डर रहता है कि नवरात्र में गलती से नाखून कट गए या बाल कट गए तो पूजा खराब हो जाएगी. ऐसा सोचकर परेशान होने की जरूरत नहीं है.
धार्मिक साधना का असली मकसद अनुशासन और भक्ति है. अगर किसी को स्वास्थ्य, नौकरी या रोज की जरूरत के कारण बाल या नाखून काटने पड़ जाएं तो इसे लेकर डर पैदा करना सही नहीं है.
नवरात्रि साधना के दौरान बाल और नाखून काटने पर कोई जरूरी रोक नहीं होता है. इससे भी पता चलता है कि ये नियम सभी परंपराओं में एक जैसा नहीं है.
नवरात्रि में बाल और नाखून न काटने की परंपरा को समझने का सबसे सरल तरीका यही है कि इसे साधना के अनुशासन से जोड़कर देखा जाए.
जो व्यक्ति नौ दिन का संकल्प लेता है, वो अपनी दिनचर्या में कई चीजों पर कंट्रोल रखता है. भोजन में कंट्रोल रखता है. पूजा का समय तय होता है.
मन को शांत रखने की कोशिश की जाती है. उसी अनुशासन का एक हिस्सा क्षौर कर्म से दूरी भी हो सकता है.
इसलिए इसे अंधविश्वास या डर के रूप में देखने के बजाय एक धार्मिक परंपरा के तौर पर समझना ज्यादा सही है.
और अगर स्वास्थ्य या जरूरी काम की वजह से बाल या नाखून काटने पड़ें, तो केवल इसी कारण देवी की पूजा का फल खत्म हो जाता है, ऐसा दावा प्रमाणित रूप से नहीं किया जा सकता है.
(Meta Description): नवरात्रि में बाल और नाखून न काटने की परंपरा क्षौर कर्म और व्रत के अनुशासन से जुड़ी है. जानिए क्या गलती से बाल या नाखून कट जाने पर पूजा का फल खत्म हो जाता है या यह केवल एक भ्रम है.