डीएनए मित्रों जिस देश के एक हिस्से में बच्चे भूख से मर रहे हो, गंदा पानी पीकर मर रहे हो, रहस्यमय बीमारियों से मर रहे हो, वो देश अपने नेताओं से यह उम्मीद नहीं करता कि वह एसी में बैठकर ब्रिक्स के मेन्यू पर चर्चा करेंगे। देश में पिछले 24 घंटे से दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन के मेन्यू पर चर्चा हो रही है। शाकाहारी और मांसाहारी वाला विवाद ट्रेंड कर रहा है। मुद्दा बनाया जा रहा है कि समिट में आए विदेशी मेहमानों को शाकाहारी भोजन क्यों परोसा गया? उनकी पसंद के मुताबिक मांसाहारी भोजन क्यों नहीं सर्व किया गया? लेकिन हम आज देश भर के सियासतदानों से सिस्टम से यह पूछना चाहते हैं देश के लिए ब्रिक्स के मेन्यू पर चर्चा जरूरी है या बालाघाट पर? उस बालाघाट पर जहां कुपोषण इंसान बनकर घर-घर में रह रहा है। जहां पिछले 3 महीने में 32 बच्चे मर गए। दिल्ली में शाकाहारी मांसाहारी भोजन की चर्चा करने वाले उन लोगों को भूल गए या जानबूझकर अनदेखा कर दिया जिनकी थाली में दो वक्त की रोटी नहीं है। जी हां, जिनके पास इतना अनाज नहीं है कि दो वक्त भोजन कर सकें। आज हम इन्हीं भारतवासियों की कहानी आपसे साझा कर रहे हैं।