Crude Oil: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को राहत देने से इनकार कर दिया है , जिसके बाद कच्चे तेल की कीमत में फिर से बढ़ोतरी हो गई है. तेल के बढ़ते भाव, भारतीय तेल कंपनियों की मुश्किल बढ़ा रहे हैं.
Oil Company: महंगे कच्चे तेल ने भारत की तेल कंपनियों का घाटा बढ़ाकर 18000 करोड़ रुपये पर पहुंचा दिया है. हर दिन तेल कंपनियां 530 करोड़ का नुकसान झेल रही रही है. सवाल ये कि ये नुकसान वो कब तक झेल पाएंगी, क्या इसका बोझ फिर से आम आदमी पर पहुंचेगा?
Oil and LNG Gas: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म ना होने के चलते ऊर्जा पर हालात बिगड़ रहे हैं. LNG गैस की कीमतों को लेकर अब गोल्डमैन सैक्श रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट जारी की है.
रूस से सस्ता कच्चा तेल मिलने में कमी और संभावित अमेरिकी 100% टैरिफ से IOCL, BPCL और HPCL की लागत व कमाई पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन कुछ राहत दे सकते हैं.
वेस्ट एशिया में तनाव के बीच कच्चा तेल 107 डॉलर के पार पहुंचने से भारत में पेट्रोल-डीजल, LPG और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है.
India Oil Export: भारत सिर्फ रूस से तेल खरीद नहीं रहा, बल्कि भारी मात्रा में तेल बेचकर मोटी कमाई कर रहा है. अगस्त में रूस से भारत से रिकॉर्ड ऑयल इम्पोर्ट किया.
Crude Oil Import From Russia: जब से मिडिल ईस्ट में जंग शुरू हुई है, तब से भारत की एनर्जी खरीद को लेकर बड़ा बदलाव आया है. एक तरफ जहां क्रूड ऑयल के मामले में रूस अहम सप्लायर बना हुआ है, वहीं भारत के लिए LPG का सबसे बड़ा सप्लायर अमेरिका बन गया है.
India Diesel Export: यूरोप में मेड इन इंडिया ईंधन की मांग तेजी से बढ़ी. अमेरिका और रूस को पीछे छोड़ भारतीय डीजल एक्सपोर्ट में रिकॉर्ड उछाल, पढ़ें वैश्विक बाजार की पूरी रिपोर्ट.
Crude Oil: कच्चे तेल की कीमतें 96 डॉलर के पार जा चुकी है, लेकिन अमेरिका ने दावा किया है कि जल्द ही तेल के भाव 40 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंच जाएगी. अमेरिका के दावे में कितना दम है? कैसे कच्चे तेल की कीमत तय होती है?
दुनिया में कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार और विक्रेता कौन है? अमेरिका, सऊदी अरब और पश्चिमी देशों उत्पादन, भंडार व आयात-निर्यात के आधिकारिक आंकड़े यहां देखें.