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क्या करके मानेंगे ट्रंप: अमेरिका में 44 साल के लो पर पेट्रोलियम रिजर्व, 70% तक उछलेंगे गैस के दाम! नई चेतावनी से भारत को कितना खतरा?

Oil and LNG Gas: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म ना होने के चलते ऊर्जा पर हालात बिगड़ रहे हैं. LNG गैस की कीमतों को लेकर अब गोल्डमैन सैक्श रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट जारी की है.

Written ByBavita Jha
Published: Sep 28, 2026, 10:48 AM IST|Updated: Sep 28, 2026, 11:00 AM IST
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क्या करके मानेंगे ट्रंप: अमेरिका में 44 साल के लो पर पेट्रोलियम रिजर्व, 70% तक उछलेंगे गैस के दाम! नई चेतावनी से भारत को कितना खतरा?

About the Author

Bavita Jha

Bavita Jha

बवीता झा बिजनेस पत्रकार हैं, उन्हें डिजिटल और टीवी न्यूज़ मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News Hindi (Digital) में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. व्यापार जगत की जटिलताओं और आर्थिक आंकड़ों को आम पाठकों के लिए सरल भाषा में डिकोड करना उनका मजबूत पक्ष है.  • शेयर बाजार • बिजनेस एक्सप्लेनर • पर्सनल फाइनेंस और टैक्सेशन  • कमोडिटी, गोल्ड-सिल्वर ट्रेड• ग्लोबल ट्रेड • जियो इकोनॉमिकस डेवलपमेंट • कारोबार से जुड़ी सरकारी योजना और पॉलिटी • बिजनेस और मार्केट ट्रेंडZee News से पहले बवीता ने नवभारत टाइम्स (NBT) के बिजनेस सेक्शन और Oneindia जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल संस्थानों में इवनिंग शिफ्ट, होम पेज मैनेजमेंट और ट्रेडिंग न्यूज़ की अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं. इसके अलावा महुआ न्यूज़, जनसंदेश और सहारा जैसे टीवी चैनलों में प्रोग्राम प्रोड्यूसर और रनडाउन मैनेजमेंट का उनके पास 4 वर्षों का ठोस अनुभव है.  दिल्ली से पत्रकारिता में स्नातक और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाली बवीता, खबरों की सत्यता और वित्तीय मामलों की सटीक रिपोर्टिंग को प्राथमिकता देती हैं.  बवीता झा से आप bavita.jha@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स  पर https://x.com/youthreporter2 के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. सोशल मीडिया पर कनेक्ट होने के लिए फेसबुक पेज https://www.facebook.com/bavita.jha , इंस्टाग्राम instagram.com/bavita.jha पर जुड़ सकते हैं. बवीता झा की खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं.
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Oil and Gas Price Hike:  खाड़ी युद्ध के बाद से तेल और गैस के दामों ने दुनियाभर की चिंता बढ़ा दी है. अमेरिका खुद इस युद्ध की आग में जल रहा है. अमेरिका में पेट्रोलियम रिजर्व 1982 के बाद के निचले स्तर पर गिरकर 284.6 मिलियन बैरल पर पहुंच गया है. स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लगातार गिरकर 26वें हफ्ते के लो पर पहुंच गया है. जबकि डीजल की कीमतें इतिहास में पहली बार 6.50 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर चली गई हैं.

यूरोप में महंगी होती गैस

यूरोप भी गैस की महंगाई झेल रहा है. यूरोप में नेचुरल गैस 70% तक महंगी हो चुकी है. सप्लाई कम और नॉर्थवेस्ट यूरोप में गैस स्टोरेज का गिरता स्तर अब टेंशन बढ़ा रहा है. LNG का गिरता सप्लाई रेट के ग्राफ को ऊपर किए जा रहा है. गोल्डमैन सैक्श रिसर्च की रिपोर्ट की माने, तो 2026 की चौथी तिमाही में यूरोप में नेचुरल गैस की कीमत 70 यूरो प्रति MWh के पार जा सकती है.

तेल और गैस की चिंता अभी और बढ़ेगी  

अमेरिका और ईरान के बीच सुलह नहीं होती दिख रही है. अमेरिका ने ईरान के समझौते के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. जवाब में तेहरान ने भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने के लिए अपनी शर्तों में नरमी बरतने से इनकार कर दिया है. इसके बाद 28 सितंबर, सोमवार को एक बार फिर से ब्रेंट क्रूड ऑयल 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया.  वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड की कीमत 93 डॉलर के ऊपर पहुंच गया.


भारत के लिए क्या है इसके मायने  

भारत इस युद्ध में कहीं शामिल नहीं है, लेकिन ग्लोबल इकोनॉमी इस तरह से कनेक्ट है कि इसका असर बीते फरवरी के बाद से भारत भी झेल रहा है. LPG सिलेंडर के लिए लंबी-लंबी लाइनें सबने देखी. पेट्रोलृ-डीजल के दाम में लगातार 3 बार बढ़ोतरी की गई. चूंकि भारत की अर्थव्यवस्था ऊर्जा के आयात पर टिकी है, ऐसे में होर्मुज के बंद होने का असर, तेल की सप्लाई गिरने और ग्लोबल मार्केट में तेल और गैस के दाम बढ़ने का असर उसपर भी पड़ता है.  


LNG का बड़ा आयात है भारत  

भारत सालाना लगभग 2.7 करोड़ टन (27 मिलियन टन) एलएनजी आयात करता है.  गोल्डमैन सैक्श रिसर्च की रिपोर्ट भारत की चिंता बढ़ा सकती है जो कीमत 30 से 60 यूरो पर थी, इस रिपोर्ट में उस LNG की कीमत 73 यूरो/MWh तक पहुंचने की संभावना जताई गई है.  सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि सप्लाई भी अटक रही है. पर्शियन गल्फ से LNG एक्सपोर्ट युद्ध के पहले वाली स्थिति से सिर्फ 15%-25% है.  भारत कतर, ओमान , UAE,  अमेरिका जैसे देशों से LNG खरीदता है. होर्मुज पर डील नहीं होने से उसकी ये सप्लाई अटक सकती है.  

अगर तेल की बात करें , तो भारत अपनी जरूरत का 80 से 85 फीदी कच्चा तेल आयात करता है. भारत के पास 41 से अधिक सप्लायर देश है, लेकिन ग्लोबल मार्केट में क्रूड की कीमत भारत के लिए तेल की मात्रा घटा रही है और बिल बढ़ रही है. सिर्फ अगस्त 2026 के डेटा को देखें, तो PPAC के मुताबिक भारत ने करीब 19 मिलियन टन (MT) कच्चे तेल का आयात किया, जिसके लिए कुल 11.7 अरब डॉलर का आयात बिल चुकाया गया. जुलाई 2026 के मुकाबले भारत के तेल आयात में 11.2 फीसदी की गिरावट आई. 
 

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Crude Oil