App

यूरोप की जरूरत बना 'मेड इन इंडिया' ईंधन! रूस और अमेरिका भी छूटे पीछे, भारतीय डीजल एक्सपोर्ट में भारी उछाल

India Diesel Export: यूरोप में 'मेड इन इंडिया' ईंधन की मांग तेजी से बढ़ी. अमेरिका और रूस को पीछे छोड़ भारतीय डीजल एक्सपोर्ट में रिकॉर्ड उछाल, पढ़ें वैश्विक बाजार की पूरी रिपोर्ट.

यूरोप की जरूरत बना 'मेड इन इंडिया' ईंधन! रूस और अमेरिका भी छूटे पीछे, भारतीय डीजल एक्सपोर्ट में भारी उछाल
Image Credit: रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के चलते रूसी रिफाइनरियों और एक्सपोर्ट पोर्ट्स को भारी नुकसान उठाना पड़ा है.

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की फ्यूल सप्लाई चेन को बुरी तरह हिलाकर रख दिया है. इसका हल्का असर भारत पर भी पड़ा, लेकिन सरकार ने पहले से ही प्लान-बी तैयार रखा था. अलग-अलग देशों से क्रूड ऑयल खरीदने की रणनीति और घरेलू स्तर पर प्रोडक्शन बढ़ाने जैसे फैसलों ने देश में ईंधन की कमी नहीं होने दी. राहत की बात सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारत अब दूसरे मुल्कों को भी बड़े पैमाने पर रिफाइंड ऑयल भेजने लगा है. शिपिंग डेटा ट्रैक करने वाली एजेंसी वोर्टेक्सा के आंकड़े बताते हैं कि रूस और अमेरिका से सप्लाई घटने के बाद यूरोप के लिए भारत सबसे भरोसेमंद डीजल सप्लायर बनकर सामने आया है.

मीडिया में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाब-अल-मंडेब समुद्री मार्ग से होकर अगस्त के दौरान जितना भी डीजल यूरोप भेजा गया, उसमें से करीब साठ फीसदी हिस्सा सीधे भारतीय रिफाइनरियों से निकला था. इस बेहद अहम रूट से हर रोज करीब दो लाख बैरल डीजल या गैसोल यूरोपीय देशों तक पहुंचा. गौर करने वाली बात यह है कि मार्च और अप्रैल के दौरान इस समुद्री रास्ते पर हलचल बिल्कुल थम गई थी, लेकिन अगस्त में यह रफ्तार एक बार फिर पुराने स्तर पर लौट आई.

घरेलू जरूरत से ज्यादा रिफाइनिंग कैपेसिटी बनी ताकत

भारत की इस ताकत के पीछे उसकी भारी-भरकम रिफाइनिंग क्षमता है. दुनिया में चौथे पायदान पर मौजूद भारत हर साल 258.1 मिलियन टन क्रूड रिफाइन करने की ताकत रखता है, जो देश की अपनी जरूरतों से काफी ज्यादा है. बीते वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ही भारत ने 61.5 मिलियन टन से अधिक पेट्रोलियम उत्पाद दूसरे देशों को बेचे. यही वजह है कि आज रिफाइंड ऑयल के ग्लोबल मार्केट में भारत एक बड़े निर्यातक के रूप में अपनी मजबूत जगह बना चुका है.

रूस और अमेरिका के शिपमेंट में आई भारी सुस्ती

अगस्त के दौरान बाब-अल-मंडेब मार्ग से यूरोप पहुंचने वाले अमेरिकी डीजल में बड़ी गिरावट देखी गई. दूसरी तरफ, जो रूस कभी यूरोप का सबसे बड़ा ईंधन सप्लायर हुआ करता था, उसका निर्यात भी औंधे मुंह गिरा. वोर्टेक्सा की रिपोर्ट बताती है कि अगस्त के शुरुआती पच्चीस दिनों में रूस का समुद्री रास्ते से होने वाला डीजल-गैसोल एक्सपोर्ट घटकर रोजाना सिर्फ डेढ़ लाख बैरल पर सिमट गया, जो पिछले साल के मुकाबले करीब सवा छह लाख बैरल प्रति दिन कम है.

ड्रोन हमलों से पस्त हुआ रूसी ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर

रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के चलते रूसी रिफाइनरियों और एक्सपोर्ट पोर्ट्स को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस के तेल तंत्र को अस्त-व्यस्त कर दिया. अकेले जुलाई और अगस्त के दौरान रूसी ऑयल ठिकानों पर बत्तीस से ज्यादा हमले दर्ज किए गए. इन हमलों की मार 2.6 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली पर्म रिफाइनरी पर भी पड़ी, जिसका महज अठाईस फीसदी हिस्सा ही काम करने की स्थिति में बचा. इसी सप्लाई गैप को भरने के लिए यूरोप ने भारतीय रिफाइनरियों का रुख किया है.
 

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Ravindra Pratap Singh

Ravindra Pratap Singh

रवींद्र प्रताप सिंह ने साल 2015 में जागरण.कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा मौजूदा समय वो ज़ी न्यूज डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं. अगस्त 2025 में उन्होंने ज़ी न्यूज ज्वाइन किया है. रवींद्र देश और दुनिया की खबरों के अलावा खेलों में क्रिकेट जगत और क्राइम की खबरों पर बेहतरीन पकड़ रखते हैं. इसके पहले रवींद्र रिपब्लिक भारत में इवनिंग शिफ्ट के इंचार्ज रहे और शाम की शिफ्ट संभालते हुए होम पेज की जिम्मेदारी रवींद्र के ऊपर थी. उससे पहले रवींद्र ने जनसत्ता और न्यूज नेशन में भी शाम की शिफ्ट और होम पेज की जिम्मेदारी बखूबी निभाई. इसके पहले रवींद्र ने 5 सालों तक पी7 और लाइव इंडिया जैसे न्यूज चैनलों में काम किया था. रवींद्र आकाशवाणी में काम करने का अनुभव रखते. अवध यूनिवर्सिटी से मॉस कम्युनिकेशन से पोस्ट ग्रेजुएट रवींद्र पिछले डेढ़ दशक से सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं. आप रवींद्र से जुड़ने के लिए Ravindra.Singh@India.com पर मेल कर सकते हैं या फिर फेसबुक पर संपर्क करने के लिए https://www.facebook.com/pintu.singh.397 और एक्स पर https://x.com/rs66533 रवींद्र से संपर्क किया जा सकता है. 
Read More