चुनाव आयोग में घमासान मचने का दावा किया जा रहा है. विपक्षी पार्टियां हमलावर हैं. लेकिन चुनाव आयोग में मतभेदों का आरोप नया नहीं है.इससे पहले भी कई मौकों पर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों की खबरें आती रही हैं.
चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेद को लेकर विवाद सामने आया है. एक रिपोर्ट में SIR, वोटर लिस्ट, ECINET और IT सिस्टम से जुड़े मामलों पर पिछले 10 महीनों में 14 आपत्तियों का दावा किया गया है.
मुख्य चुनाव आयुक्त आयोग के चेयरमैन होते हैं, लेकिन उनके पास अकेले वीटो पावर नहीं है. संविधान के अनुच्छेद 324 और 2023 के कानून के तहत मतभेद होने पर तीन सदस्यीय आयोग में बहुमत का फैसला मान्य होता है.
EC-SIR विवाद के बीच बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने चुनाव आयोग का पक्ष रखते हुए कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच 14 बार आधिकारिक विचार-विमर्श हुआ. उन्होंने दावा किया कि SIR को लेकर तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मत सहमति थी.
लोकतंत्र में चुनाव की विश्वसनीयता सिर्फ मतदान के दिन तय नहीं होती. उसकी नींव उन प्रक्रियाओं में रखी जाती है जिनके जरिए मतदाता सूची तैयार होती है, नाम जुड़ते और हटते हैं और चुनाव से जुड़े फैसले लिए जाते हैं. इसलिए चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति की खबर को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों की इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट चुनाव आयोग ने खारिज कर दी है. आधिकारिक बयान जारी कर आयोग ने कहा है कि फैसले सभी आयुक्तों की मर्जी से लिए गए हैं.