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'अलग राय होना आम बात...', मतभेदों की खबरों पर आई EC की सफाई, देश में पॉलिटिकल पारा हाई

चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों की इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट चुनाव आयोग ने खारिज कर दी है. आधिकारिक बयान जारी कर आयोग ने कहा है कि फैसले सभी आयुक्तों की मर्जी से लिए गए हैं.

'अलग राय होना आम बात...', मतभेदों की खबरों पर आई EC की सफाई, देश में पॉलिटिकल पारा हाई
Image Credit: रिपोर्ट आने के बाद देश में सियासी खलबली मच गई है.

विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने बुधवार को भारत के चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट को लेकर जबरदस्त हमला बोला है. रिपोर्ट में कहा गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग के उन फैसलों पर रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई थी, जो कथित तौर पर उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे. अब इस पर चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक बयान आया है.

अलग-अलग राय होना आम बात

SIR प्रोसेस में गड़बड़ियों पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति को लेकर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने प्रेस नोट जारी किया है. इसमें चुनाव आयोग ने कहा, 'किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य बात है. ये अंतिम फैसला लेने से पहले निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं. न केवल तीनों कमिश्नर, बल्कि आयोग का हर अधिकारी चुनावी सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए आयोग को अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह से अधिकृत है.'

आयोग ने कहा, '10 महीनों के दौरान की कुछ खास आंतरिक टिप्पणियों को सामने लाना, जबकि बड़ी संख्या में मंजूरियों, फैसलों, निर्देशों और पहलों को नजरअंदाज करना, तस्वीर का केवल एक हिस्सा ही दिखाता है. हाल के महीनों में, आयोग ने कई फैसले लिए हैं, आदेश जारी किए हैं, लगभग 40 नई पहलें शुरू की हैं और देश भर में SIR के संचालन समेत कई चुनावी सुधार किए हैं. ये सभी फैसले पिछले एक साल में पूरे आयोग के सर्वसम्मत फैसलों का परिणाम हैं.'

सूत्रों के अनुसार, ECI के नियमों में यह प्रावधान है कि अगर तीन में से दो चुनाव आयुक्त किसी मामले पर सहमत होते हैं, तो बहुमत वाला फैसला ही मान्य होता है.

विपक्षी पार्टियों ने बोला हमला

इस मुद्दे ने विपक्ष और सत्ताधारी BJP के बीच ECI की वोटर लिस्ट साफ करने की प्रक्रिया यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चल रही लंबी लड़ाई में एक नया और अधिक तनावपूर्ण मोर्चा खोल दिया है. विपक्ष का आरोप है कि यह BJP को फायदा पहुंचाने के लिए वोटरों को हटाने की एक सोची-समझी प्रक्रिया थी.

रिपोर्ट में क्या लिखा है?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब 10 महीनों के दौरान तीन सदस्यों वाले चुनाव आयोग के भीतर ही एसआईआर से जुड़े कई अहम फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठते रहे. ये आपत्तियां आयोग के दो चुनाव आयुक्तों-सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से दर्ज कराई गईं. मतदाता सूचियों के एसआईआर की देशव्यापी प्रक्रिया तीनों चुनाव आयुक्तों की निगरानी में चल रही है.

रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई. इनमें एक ही दिन चार बार आपत्ति दर्ज किए जाने का भी जिक्र है. दोनों चुनाव आयुक्तों का कहना था कि संबंधित फैसले या आदेश उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए या जारी किए गए. इन आपत्तियों का दायरा चुनाव आयोग के उन जरूरी कामों से जुड़ा है, जिनका सीधा संबंध मतदाता के अधिकार और मतदाता सूची की विश्वसनीयता से है.

इनमें नए मतदाताओं का रजिस्ट्रेशन, मतदाता सूची से नाम हटाना और हटाए गए नामों को दोबारा बहाल करना, एसआईआर के दौरान नाम बहाल किए जाने के आदेशों के खिलाफ अपील की प्रक्रिया तथा पूरी मतदाता सूची के डेटा की कस्टडी और सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इन मामलों में दर्ज आपत्तियों की कॉपीज मुख्य चुनाव आयुक्त को भी भेजी गई थीं.

रिपोर्ट के बाद सियासी पारा हाई

रिपोर्ट आने के बाद बुधवार सुबह शिवसेना (UT) नेता संजय राउत, कांग्रेस के मनीष तिवारी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और DMK प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने मोर्चा संभाला.

मुख्य चुनाव आयुक्त का जिक्र करते हुए राउत ने कहा, 'BJP की तरफ से वह लोकतंत्र के खिलाफ वह सबसे बड़ा अपराध कर रहे हैं जो कोई मुख्य चुनाव आयुक्त कर सकता है. BJP ने उन्हें सुरक्षा दी है, लेकिन उन्हें नहीं पता कि इतिहास में उनका नाम मोटे, काले अक्षरों में लिखा जाएगा. अगर लगाए गए आरोप सच हैं, तो जब तक यह शख्स इस कुर्सी पर बैठा है, तब तक कोई निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है.' उन्होंने कहा, 'जिस तरह से BJP ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में चुनाव जीते, वह अपने आप में सवाल खड़े करता है.'

सीईसी के खिलाफ महाभियोग की मांग

मनीष तिवारी ने X पर एक पोस्ट में CEC के महाभियोग की मांग की. उन्होंने '10 महीनों में 14 बार, दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कदमों पर रिकॉर्ड पर आपत्ति जताई' हेडलाइन वाली रिपोर्ट शेयर करते हुए लिखा, 'शायद यह महाभियोग की कार्यवाही पर गंभीरता से विचार करने का सही मामला है, लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी बुनियादी सवाल यह है कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को कैसे बहाल किया जाएगा?'

वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के गलत फैसले पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई है. इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं. एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं. कुछ लोगों के जरिए सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है. ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले.'

वहीं, DMK के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि ECI ने SIR प्रक्रिया का मजाक बना दिया है. अन्नादुरई ने कहा, 'अब यह एक मजाक बन गया है क्योंकि हर जगह लोग सवाल उठा रहे हैं क्योंकि उनके नाम हटाए जा रहे हैं. उनके नाम ड्राफ्ट रोल में हैं, लेकिन फिर भी उनसे सवाल किया जा रहा है कि 2002 में उनके नाम उसमें क्यों नहीं थे.'

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About the Author

Rachit Kumar

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रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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