प्रसिद्ध अमेरिकी राजनीतिक दार्शनिक और लेखक फ्रांसिस फुकयामा का विचार है कि संस्थाओं पर आम लोगों का विश्वास ही लोकतंत्र की असली मुद्रा है। जब चुनाव कराने वाली संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो पूरे लोकतांत्रिक ढांचे का दिवाला निकल जाता है। भारतीय निर्वाचन आयोग भारत की यह संवैधानिक संस्था आज ट्रेंड कर रही है। चर्चा की वजह एक अखबार की रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और बाकी के दो