फ्लाईदुबई विमान के कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला करने वाला ओमानी को-पायलट ने खुलासा किया है कि वह तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर विमान को क्रैश कराना चाहता था. इस बीच हम जानेंगे कि आखिर बेन गुरियन कौन थे और उनके नाम पर बने इस एयरपोर्ट का महत्व इजरायल के लिए क्या है?
दुबई से तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई विमान को कथित तौर पर हाईजैक के बाद आतंकी हमला करने की कोशिश मामले में एक नया और बड़ा खुलासा हुआ है. फ्लाईदुबई विमान के FZ1073 के को-पालयट हमाम अल-हमामी ने कैप्टन पायलट स्मित मच्छार पर जानलेवा हमला किया. रिपोर्ट्स के अनुसार, यूएई में जांच के दौरान अधिकारियों को आरोपी को-पायलट ने बताया कि वह विमान को तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर क्रैश की योजना बना रहा था.
आरोपी का कहना है कि वह पहले विमान को सामान्य तरीके से उड़ाते रहता फिर जरूरी लैंडिंग क्लियरेंस हासिल करने के बाद रनवे पर खड़े किसी विमान या फिर एयरपोर्ट की किसी इमारत में विमान की टक्कर करा देता. हालांकि, समय रहते कैप्टन पायलट स्मित मच्छार ने इतना बड़ा कांड होने से रोक लिया.

को-पायलट का मकसद था कि वह एजेंसियों को समय रहते जानकारी मिलने से पहले विमान को क्रैश करा पाए. इस बीच सबसे अधिक चर्चा की जाने लगी है कि इजरायल का बेन गुरियन एयरपोर्ट क्यों इतना खास है. बेन गुरियन कौन थे, जिनके नाम से इजरायल के तेल-अवीव में बने सबसे बड़े एयरपोर्ट को जाना जाता है. बता दें कि बेन गुरियन एयरपोर्ट को इजरायल की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी के लिए अहम गेटवे माना जाता है.
सबसे पहले हमें समझना चाहिए कि तेल-अवीव में बना इजरायल का सबसे बड़ा हवाई अड्डा क्यों महत्वपूर्ण हैं. बेन गुरियन एयरपोर्ट इजरायल का सबसे अहम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है.सबसे खास बात है कि भौगोलिक रूप से यह देश के दो सबसे अहम शहरों के बीच में स्थित है.
यह इजरायल की वाणिज्यिक राजधानी तेल-अवीव से करीब 15 किलोमीटर और यरुशलम से करीब 40 किलोमीटर दूर है. इसी साल 25 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब इजरायल की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे थे, तो उनका विमान भी बेन- गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हुआ था.
सामान्य भाषा में डेविड बेन गुरियन को आधुनिक इजरायल के शिल्पकार के तौर पर देखा जाता है. उनका जीवन संघर्षपूर्ण, कूटनीति और राष्ट्र निर्माण एक लंबी मेहनत को दर्शाता है. बेन-गुरियन ने ही 1948 में इजरायल के स्वतंत्र राज्य की आधिकारिक घोषणा पढ़ी थी. वह इजरायल के पहले प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री बने थे.
गुरियन का जन्म 1886 में पोलैंड में हुआ था. शुरुआत में उनकी पहचान डेविड ग्रुएन के रूप में थी. उनके पिता की पहचान एक सक्रिय जायोनी के तौर पर रही थी. 20 साल की उम्र में वह ओटोमन साम्राज्य के अधीन फिलिस्तीन चले, जहां पर अपना इब्रानी नाम बेन गुरियन अपनाया था.

वे 1948 से 1954 तक और फिर 1955 से 1963 तक इजरयाल के पीएम और रक्षा मंत्री के रूप में कार्यरत रहे. 1948 में जब इजरायल और अरब का युद्ध हुआ था, उन्होंने देश का नेतृत्व किया. गुरियन विश्व जायोनी संगठन और यहूदी एजेंसी के प्रमुख नेता के तौर पर भी गिने जाते हैं. उन्होंने कई दशक तक यहूदियों के लिए फिलिस्तीन में एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के प्रयासों का भी नेतृत्व किया.
आधुनिक सुरक्षा बलों की स्थापना (IDF) और देश के शुरुआती बुनियादी ढांचे, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय संस्थाओं को आकार देने का क्रेडिट भी बेन गुरियन को जाता है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि जब उन्होंने राजनीति से सन्यास लिया, उसके बाद वह नेगेव रेगिस्तान में स्थित एक गांव में चले गए.
उनको पूरा विश्वास था कि इजरायल का भविष्य रेगिस्तान को आबाद करने और विकसित करने में है. साल 1973 में उनका निधन हो गया. उनके निधन के बाद 'लोड हवाई अड्डा के नाम बदला गया और इजरायल के पहले पीएम के सम्मान में बेन गुरियन अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट रखा गया.
गौरतलब है कि जब भी कोई यात्री तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट के रनवे पर उतरता है, तो वह केवल पश्चिम एशिया के आधुनिक एयरपोर्ट पर नहीं उतरता है, बल्कि एक शख्स की विरासत के बीच होता है. जिसने कभी यह तय किया था कि यहूदियों का अपना एक स्वतंत्र देश हो.
दुनिया हमेशा बेन गुरियन एयरपोर्ट इजरायल को दुनिया की अर्थव्यवस्था, कूटनीति और पर्यटन से जोड़ती है. लेकिन इसके पीछे इजरायल के एक नेता की कहानी भी खड़ी है, जिसने 1948 में नए इजरायली राज्य की नींव रखने की अहम भूमिका निभाई थी.