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Pakistan-US Defence Deal: अमेरिकी ड्रोन कंपनी 'पावरस' ने पाकिस्तानी सेना के साथ एक बड़ी डील की है. इसके तहत दोनों एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें ड्रोन से जुड़े ऑर्डर्स भी शामिल हैं. 'रॉयटर्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी जानकारी कंपनी के को-फाउंडर ब्रेट वेलिकोविच की ओर से दी गई. रिपोर्ट के मुताबकि, वेलिकोविच ने समझौते की अधिक जानकारी देने से मना कर दिया, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि ये समझौता अनमैन्ड एरियल सिस्टम या ड्रोन की श्रेणी में आता है.
पाकिस्तान-अमेरिका की इस डिफेंस डील ने भारत में भी हलचल मचा दी है. ऐसा इसलिए क्योंकि भारत भी 'पावरस' से एंटी ड्रोन सिस्टम खरीदता है. वहीं, इस कंपनी का इजरायल के साथ भी लिंक है. इसी साल जून 2026 में भारत और 'पावरस' के बीच समझौता हुआ था.
'पावरस' फ्लोरिडा स्थित एक नई कंपनी है. इसने सितंबर 2026 में पाकिस्तान की यात्रा के दौरान रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए. अमेरिकी सेना के पूर्व स्पेशल ऑपरेशन इंटेलिजेंस ऑफिसर और 'पावरस' के को-फाउंडर ब्रेट वेलिकोविच भी इस समझौते के लिए पाकिस्तान पहुंचे थे. कंपनी का कहना है कि शुरुआती ऑर्डर लिमिटेड है, लेकिन वेलिकोविच ने कहा कि उनकी लॉन्ग टर्म इच्छा है कि अमेरिका और पाकिस्तानी टेक्नोलॉजी को मिलाकर पाकिस्तान में मैनुफैक्चरिंग यूनिट स्थापित किया जाए.
बता दें कि 'पावरस' को पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय से अन्मैन्ड एरियल सिस्टम और उससे जुड़े हेल्पिंग टूल्स के लिए लिमिटेड पर्चेज का ऑर्डर मिला है. इसको लेकर 17 सितंबर 2026 को कंपनी ने कहा,' यह आदेश हमारे इंटरनेशनल डिफेंस बिजनेस के विस्तार को दर्शाता है. हमने एक स्ट्रैटजिक डील पर भी हस्ताक्षर किए हैं. यह समझौता अंतिम समझौतों और सरकारी स्वीकृतियों के अधीन, मानवरहित और ऑटोनॉमस सिस्टम में संभावित विस्तारित सहयोग के लिए एक ढांचा तैयार करता है.'
पाकिस्तान के कुछ हिस्से में इस डिफेंस डील को लेकर बेचैनी हुई है, क्योंकि 'पावरस' के को-फाउंडर्स में से एक जिव मारोम इजरायली डिफेंस फोर्स के पूर्व अधिकारी भी रह चुके हैं. 'TOI' की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ एक्सपर्ट्स सवाल उठा रहे हैं कि, जो पाकिस्तान पहले से ही अपने ड्रोन खुद बनाता है और चीन-तुर्किये से ड्रोन खरीदता है वह इस डील में क्यों इन्वेस्ट कर रहा है. वहीं, कुछ लोग इसे पाकिस्तान की ओर से अपने सप्लाई में डायवर्सिटी लाने की एक कोशिश की तरह देख रहे हैं.
पाकिस्तान की यह डील इसलिए भी दिलचस्प मानी जा रही है, क्योंकी 'पावरस' ने पहले ही भारत के डिफेंस मार्केट में एंट्री कर ली थी. जून 2026 में पॉवरस की सहायक कंपनी 'टैन्डम डिफेंस' ने मुंबई स्थित 'पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजी' को गार्जियन-1 काउंटर-ड्रोन इंटरसेप्टर के मैनुफैक्चरिंग और कमर्शियलाइजेशन के लिए स्पेशल लाइसेंस दे दिया था. अब इसी तरह की कंपनी भारत-पाकिस्तान जैसे उन दोनों के साथ डिफेंस डील कर रही है, जो पिछले साल मई 2025 में छोटा ही सही, लेकिन जंग लड़ चुके हैं और इस संघर्ष में ड्रोंस की भूमिका बेहद अहम थी.
भारत ने वाशिंगटन के साथ अपने रणनीतिक संबंधों में भारी इन्वेस्टमेंट किया है. ऐसे में अमेरिका-पाकिस्तान के साथ इस तरह की किसी एडवांस टेक्नोलॉजी वाली डील को लेकर वह थोड़ा चिंतित है. ये कोई पहली बार नहीं है कि अमेरिका किसी प्रतिद्वंद्वी देशों को हथियार बेच रहा है. इस तरह की हरकत में उसका लंबा इतिहास रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या 'पावरस' अमेरिका-पाकिस्तान के बीच रक्षा संबंधों की बहाली का संदेश तो नहीं दे रहा, जो पिछले 2 दशकों से काफी हद तक ठप पड़े थे? शायद अब अमेरिका, पाकिस्तान को अवसरवादी की तरह देखने लगा है.