आचार्य चाणक्य का मान्य था कि वास्तविक स्वतंत्रता के लिए नैतिक चरित्र और अजय सैन्य शक्ति दोनों आवश्यक है। सरकारी अस्पतालों में दवाओं के नाम पर जो भ्रष्टाचार चल रहा है उसे खत्म करने के लिए उसी तरह के नैतिक चरित्र की आवश्यकता है जिस मजबूती के साथ सेना अपनी शक्ति बढ़ाने में जुटी हुई है। भारतीय सेना जमीन से लेकर आसमान तक अपनी सामरिक शक्ति कोन लगातार अभैेद्य बना रही है। इसी रणनीतिक मकसद के लिए भारत अमेरिका और