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सवारियों की बस में दो कट्टों में छिपाकर ले जाए जा रहे 18 मॉनिटर लिजार्ड और शतावरी बरामद

श्रीमाधोपुर में वन विभाग ने अजीतगढ़ से मकराना जा रही बस की नाकाबंदी कर तलाशी ली,जिसमें दो कट्टों से 18 मॉनिटर लिजार्ड (गोह) और एक कट्टे से शतावरी बरामद कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और एक बाल अपचारी को निरुद्ध किया गया.

सवारियों की बस में दो कट्टों में छिपाकर ले जाए जा रहे 18 मॉनिटर लिजार्ड और शतावरी बरामद
Image Credit: wildlife smuggling 18 monitor lizards shatavari seized bus rajasthan

श्रीमाधोपुर में वन विभाग ने 18 मॉनिटर लिजार्ड यानी गोह जब्त किये हैं, जिन्हे अजीतगढ़ से मकराना जा रही सवारियों की बस में दो कट्टों में भरकर रखा गया था.मामले में गिरफ्तार हुए तीन आरोपियों के पास से एक कट्टे में शतावरी भी बरामद की गयी है.

वन्य जीवों की इतनी बड़ी तादात में हुई बरामदगी के बाद अब आरोपियों से पूछताछ की जा रही है . वन विभाग अब ये पता लगाने में जुटा है कि वन्यजीव कहां से लाए गए थे ? इन्हें कहां ले जाया जा रहा था और क्या इस मामले के पीछे कोई बड़ा तस्करी नेटवर्क सक्रिय है.

आपको बता दें कि मॉनिटर लिजार्ड (गोह) का इस्तेमाल अवैध रूप से इलाज के लिए अवैध तेल निकालने या तांत्रिक गतिविधियों में किए जाने की आशंका रहती है. वही अजीतगढ़ से मकराना जाने वाली एक आम यात्री बस में कट्टों के अंदर वन्यजीवों को छिपाकर ले जाना ये दिखाता है कि तस्कर अब सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए कर रहे हैं.

वहीं शतावरी का उपयोग आयुर्वेद और पारंपरिक दवाओं में शक्तिवर्धक, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और विभिन्न औषधियों को बनाने में किया जाता है.जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों से बिना अनुमति के प्राकृतिक रूप से उगने वाली शतावरी को खोदकर/काटकर अवैध तरीके से बेचना गैर-कानूनी है.

क्या कहता है 1972 वन्य जीव कानून ?
इस कानून के तहत किसी भी जंगली जानवर का शिकार करना,उन्हें मारना,पकड़ना या नुकसान पहुँचाना पूरी तरह से गैर-कानूनी है. कानून के तहत वन्यजीवों और वनस्पतियों को उनकी संकटग्रस्त स्थिति के आधार पर अलग-अलग अनुसूचियों (Schedules) में बांटा गया है.
अनुसूची 1 : इसमें सबसे अधिक लुप्तप्राय और दुर्लभ प्रजातियां आती हैं (जैसे बाघ, शेर, हाथी, मॉनिटर लिजार्ड, चीतल आदि).
अनुसूची 2 : इसमें उन प्रजातियों को रखा गया है जिन्हें उच्च स्तर की सुरक्षा की जरूरत है.
अनुसूची 3 : इसमें संरक्षित पौधों (Botanical Species) की सूची शामिल है, जिन्हें उखाड़ना या अवैध रूप से बेचना प्रतिबंधित है.
अनुसूची 4 : ये सीआईटीएस (CITES) के तहत आने वाले अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से संबंधित वन्यजीवों की प्रजातियों के लिए है.

जानवरों के अंगों (जैसे खाल, सींग, दांत, हड्डियों) और उनसे बने सामानों के व्यावसायिक व्यापार पर पूरी तरह से बैन हैं, जंगलों से अवैध रूप से औषधीय जड़ी-बूटियों या पौधों की कटाई/तस्करी पर भी इसके तहत कड़ी कार्रवाई की जाती है.

 

 

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About the Author

Ashok Singh Shekhawat

Ashok Singh Shekhawat

अशोक सिंह शेखावत सीकर (राजस्थान) निवासी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जो पिछले 23 से अधिक वर्षों से प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे ज़ी राजस्थान में सीकर जिला ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं।विज्ञान, विधि (LL.B.), फार्मास्यूटिकल्स और पत्रकारिता (BJMC) में बहु-विषयक शिक्षा प्राप्त शेखावत जी ने अपने करियर की शुरुआत राजकीय अस्पताल, झुंझुनूं में 7 वर्षों तक बतौर फार्मासिस्ट की थी। इसके बाद उन्होंने मीडिया क्षेत्र में कदम रखते हुए राजस्थान पत्रिका, इंडिया टुडे और ईटीवी राजस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में लंबे समय तक अपनी सेवाएँ दीं।सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR, राजस्थान) से अधिस्वीकृत पत्रकार (संख्या: 1410) के रूप में उन्हें रक्षा व शहीद परिवारों के कल्याण, स्वास्थ्य-चिकित्सा और क्षेत्रीय राजनीति की सटीक व संवेदनशील रिपोर्टिंग के लिए जाना जाता है। निष्पक्ष पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों के लिए वे सीकर व झुंझुनूं जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित भी हो चुके हैं।
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