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Rajasthan News: राजस्थान के जंगलों से तेंदुए और बाघ लगातार गायब हो रहे हैं. सरिस्का से लेकर रणथंभौर टाइगर रिजर्व तक यही सवाल बना हुआ है कि आखिर तेंदुए और बाघ जा कहां रहे हैं. इधर जयपुर में भी तेंदुए के लापता होने की जानकारी सामने आई है. अब वन विभाग महकमे में तेंदुए और बाघ के लापता होने वाली खबरों के बीच हलचल तेज हो गई है. बडे़ सवाल ये है कि आखिरकार जंगल से अचानक बाघ और तेंदुए गायब कहां हो रहे हैं.
सवालों से घिरे राजस्थान के जंगल
राजस्थान के जंगल इन दिनों सवालों से घिरे हुए हैं. क्योंकि जंगल से बाघ और तेंदुए गायब हैं. देश के सबसे चर्चित टाइगर रिजर्व रणथंभौर से लेकर सरिस्का टाइगर रिजर्व तक के जंगल सवालों के घेरे में हैं. रणथंभौर और सरिस्का के साथ-साथ अब तो जयपुर का जंगल भी इन सवालों से अछूता नहीं बचा है. सरिस्का टाइगर रिजर्व से एसटी-15 और एसटी-27 के शावक पिछले एक महीने से गायब हैं. इनकी तलाश के लिए वन विभाग ने अतिरिक्त टीमें भी लगा रखी हैं.
टीमें कैमरा ट्रैप, गश्त और संकेतों के आधार पर दोनों की मौजूदगी तलाशने की कोशिश कर रहे हैं. सरिस्का में प्रत्येक बाघ की वन-टू-वन निगरानी की व्यवस्था है. आने वाले दिनों में कैमरा ट्रैप की तस्वीरों और टीमों की रिपोर्ट से दोनों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है. पिछले एक महीने से दोनों ही बाघ कैमरों में ट्रैप दिखाई नहीं दिए. पिछले साल भी रणथंभौर से 25 बाघों के लापता होने की रिपोर्ट सामने आई थी.
राणा के बाद दूसरे तेंदुओं पर भी सस्पेंस
सूत्रों की मानें तो राणा के साथ-साथ अब दूसरे कई तेंदुओं पर भी सस्पेंस बना हुआ है. क्योंकि सूत्र बताते हैं कि कई दूसरे तेंदुए भी झालाना के जंगलों में दिखाई नहीं दे रहे हैं. ऐसे में दूसरे तेंदुए के लापता होने का भी अंदेशा है. इसलिए अब जयपुर के जंगलों में तेंदुए को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. वहीं पिछले 18 दिनों से देश के चर्चित तेंदुए में से एक राणा का भी कोई सुराग नहीं मिला है. रोजाना एसीएफ के साथ-साथ रेंजर अपनी टीमों के साथ जंगलों में तलाश कर रहे हैं. जंगल के अलावा बाहर भी तलाश किया जा रहा है, लेकिन तेंदुआ राणा का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है.
सवालों में घिरी मॉनिटरिंग
वन विभाग की मॉनिटरिंग पूरी तरह से सवालों में घिर गई है. कैमरा ट्रैप के जरिए मॉनिटर किया जा रहा है, फिर भी तेंदुए और बाघ कैसे गायब हो गए. क्या अधिकारी फील्ड में नहीं उतर रहे हैं या इसके पीछे का कारण कुछ और है. फिलहाल अभी मरुधरा के जंगलों में कई सवाल हैं, जो वन महकमे को कटघरे में खड़ा कर रहा है.