नाबालिग, गुमनाम चेहरे, मामूली रकम, दागो और भागो… क्या है लॉरेंस बिश्नोई गैंग की शूटर रणनीति?
बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ पर हुए जानलेवा हमले में राजस्थान पुलिस ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है. इनमें से एक नाबालिग बताया जा रहा है. इस घटना से लॉरेंस बिश्नोई गैंग और उसके नेटवर्क की काफी चर्चा हो रही है. आखिर इस गैंग में नाबालिगों की फौज क्यों भर्ती की जा रही है?
बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ पर हुए जानलेवा हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली है. घटना के कुछ देर बाद ही इस गैंग के सदस्य अनिल पंडित ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करके इस हमले की जिम्मेदारी ली. उसने अपने पोस्ट में लिखा कि जो लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ या सलमान खान के साथ काम करेगा, अगला नंबर उसका होगा. इसको (टाइगर श्रॉफ) को समझाया था, लेकिन नहीं माना. विदेश में बैठे कुख्यात अनिल पंडित का आज (सोमवार, 19 अक्टूबर) को एक ऑडियो क्लिप भी सामने आया, जिसमें एक शख्स खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य बताकर हमले की जिम्मेदारी ले रहा है. फेसबुक पोस्ट की तरह वायरल ऑडियो में भी अनिल पंडित ने सलमान खान से रिश्ता रखने वालों को धमकी दी है. उधर, इस घटना के बाद हमलावरों पर पुलिस का शिकंजा कसने लगा है. इस मामले में राजस्थान पुलिस ने कोटा रेलवे स्टेशन से तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से एक नाबालिग है.
राजस्थान पुलिस का दावा है कि टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले में यही लोग शामिल थे. कोटा की एसपी तेजस्विनी गौतम ने बताया लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्य अनिल पंडित ने सोशल मीडिया के जरिए इन लोगों को टाइगर श्रॉफ को मारने का काम सौंपा था. एक्टर पर जानलेवा हमले करने के बाद सभी वहां से भागकर कोटा पहुंचे थे. तीनों आरोपी पुणे-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12939) से जयपुर की ओर जा रहे थे. इसके बाद बस के जरिए नेपाल भागने का प्लान था. एसपी तेजस्विनी गौतम ने बताया कि तीन में से दो आरोपी हरियाणा के रहने वाले हैं, जबकि तीसरा आरोपी बिहार से है और वह मुंबई में रैपिडो चलाने का काम करता है. उन्होंने बताया कि मुंबई पुलिस से सूचना मिलने के 15 मिनट बाद ही तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया था. एसपी तेजस्विनी गौतम के दावे इसलिए भी सच हो सकते हैं, क्योंकि घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी में दो हमलावर कैद हुए हैं, जिनकी उम्र संदिग्धों से मिल रही है.
दहशत का पर्याय बन चुका है लॉरेंस बिश्नोई
उधर, इस घटना ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग की दहशत को और बढ़ा दिया है. यह गैंग हाईप्रोफाइल लोगों को धमकाने, उनसे फिरौती मांगने और हत्या करने के लिए कुख्यात है. मशहूर पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की दिनदहाड़े हत्याकांड में इसी गैंग का हाथ था. इसके अलावा महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी के मर्डर का आरोप भी लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्यों पर लगा है. सलमान खान को धमकी देने से सुर्खियों में आए लॉरेंस बिश्नोई और उसका गैंग आज के समय सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है. दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में इस गैंग का काफी आतंक देखने को मिल चुका है. बताया जाता है कि भारत में इस गिरोह के लगभग 700 शूटर हैं. जरायम की दुनिया में इस गैंग के प्रभाव और नेटवर्क का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लॉरेंस खुद जेल में बंद है और उसके गैंग के ज्यादातर सदस्य विदेशों में छिपे बैठे हैं, इसके बावजूद ये लोग बड़ी-बड़ी घटनाओं को अंजाम दे देते हैं.
जरायम की दुनिया में लॉरेंस की एंट्री
पंजाब पुलिस में कॉन्सटेबल लविंदर सिंह के घर में जन्मे लॉरेंस बिश्नोई ने चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की है. शुरुआत में वह राजनीति में आना चाहता था और उसने छात्र संघ का चुनाव भी लड़ा था, लेकिन हार गया था. चुनाव जीतने वाले कैंडिडेट के साथ उसकी अदावत शुरू हो गई और इसी बीच उसकी गर्लफ्रेंड की एक कार एक्सीडेंट में मौत हो गई. यहीं से लॉरेंस बिश्नोई की पूरी जिंदगी बदल गई. वह अपने राजनीतिक विरोधी को इस हत्या के लिए जिम्मेदार समझने लगा और यूनीवर्सिटी में झगड़े-फसाद करना शुरू कर दिया. साल 2018 में उसने 007 नाम से अपना गैंग बनाया और क्राइम की दुनिया में पहला कदम रखा. गैंग बनाने के बाद उसने राजस्थान के 2 बड़े व्यापारियों से रंगदारी मांगी. एक व्यापारी ने पुलिस में शिकायत कर दी और लॉरेंस को अरेस्ट हो गया. अजमेर जेल में उसकी मुलाकात गैंगस्टर आनंदपाल से हुई और इसी के जरिए शूटर संपत नेहरा से संपर्क हुआ. उसने संपत को सलमान खान को मारने की सुपारी दी, लेकिन वह गिरफ्तार हो गया. पुलिस के सामने संपत ने पूरा सच उगल दिया. जब मीडिया ने पेशी पर जा रहे लॉरेंस बिश्नोई से सवाल किए तो उसने कैमरों के सामने सलमान खान को मारने की धमकी दी. बस इसी पल से पूरा देश उसे जानने लगा.
कितना बड़ा है लॉरेंस का क्राइम नेटवर्क?
लॉरेंस बिश्नोई पिछले एक दशक से भारत की अलग-अलग जेलों में ही बंद है, इसके बावजूद वह अपनी गैंग को ऑपरेट करता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेल में रहते हुए वह अपने गुर्गों से संपर्क साधने के लिए VPN और VoIP तकनीकि का इस्तेमाल करता है. इस तकनीकि में कॉल करने के लिए मोबाइल नेटवर्क की जरूरत नहीं पड़ती है, जिससे उसकी कॉल को ट्रैस नहीं किया जा सकता है. इसके अलावा वह जेल में मिलने आए लोगों या कुछ भ्रष्ट पुलिस कर्मियों की मदद से अपने संदेशों को अपने गुर्गों तक पहुंचाता है. पुलिस के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई गैंग में इस समय संदीप उर्फ काला जठेड़ी, अनिल छिप्पी, राजू बसौदी जैसे कई गैंगस्टर हैं. विदेश से बैठे अपराधी गोल्डी बराड़, लिपिन नेहरा और रोहित गोदारा भी इसी गैंग के सदस्य बताए जाते हैं. अपराध जगत में उसका नेटवर्क इतना मजबूत हो गया कि लोग उसके गैंग की तुलना दाउद इब्राहिम की गैंग से करने लगे हैं.
कैसे काम करता है लॉरेंस बिश्नोई गैंग?
हरियाणा पुलिस की एसटीएफ टीम ने साल 2024 में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के काम करने पर बड़ा खुलासा किया था. एसटीएफ गुड़गांव यूनिट के इंचार्ज इंस्पेक्टर नरेंद्र चौहान ने उस वक्त बताया था कि लॉरेंस गैंग में शूटरों की भर्ती सोशल मीडिया के जरिए की जाती है. उन्होंने बताया था कि सोशल मीडिया इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य प्लैटफॉर्म पर लॉरेंस और इससे जुड़े गैंग के अहम सदस्यों के नाम से पेज, ग्रुप और प्रोफाइल बने हुए हैं. पोस्ट पर लाइक व कमेंट करने वाले युवकों से गैंग के सदस्य संपर्क करते हैं और उन्हें टारगेट सौंपते हैं. इस काम को मुख्य रूप से कनाडा में बैठा गैंगस्टर रोहित गोदारा संभालता है. एसटीएफ गुड़गांव के मुताबिक, नाबालिग और गरीब परिवार से आने वाले युवाओं को गैंग से जोड़ने में प्रमुखता दी जाती है. वारदात से पहले शूटर्स तक हथियार और गोलियां पहुंचा दी जाती हैं और वारदात के बाद हथियार वापस भी ले लिए जाते हैं. यही वजह है कि एसटीएफ गुड़गांव ने कई घटनाओं में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन हथियार को बरामद नहीं हो सका.
नाबालिगों को ही क्यों चुना जा रहा है?
पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या मामले में पंजाब पुलिस ने जब लॉरेंस बिश्नोई गैंग पर शिकंजा कसा, तो इस गैंग का शूटर अभिषेक कोली पकड़ा गया था. कोली ने पुलिस को बताया था कि जब वह 19 साल का था, तभी लॉरेंस की गैंग में शामिल हो गया था. उसने बताया था कि गैंग में करीब 200 युवा शूटर्स शामिल हैं. अलग-अलग राज्यों की पुलिस जांच और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लॉरेंस गैंग में नाबालिगों पर ही जोर दिया जाता है. ऐसा क्यों किया जाता है, इसके लिए अभिषेक का केस समझना होगा. दरअसल, पुलिस के पास कुख्यात अपराधियों की क्राइम कुंडली होती है, जबकि युवा अपराधियों का ब्योरा जुवेनाइल के पास होता है. सोशल मीडिया पर युवाओं को हथियारों और पैसों की चमक-धमक दिखाकर गुमराह किया जाता है और अपने साथ जोड़ लिया जाता है. इससे हर क्राइम के लिए एक नया शूटर मिल जाता है. पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लग पाती.
पुलिस इस नेटवर्क को कैसे तोड़ सकती है?
कानूनी जानकारों के मुताबिक, पुलिस को अपने नेटवर्क को और मजबूत करना होगा. दिल्ली पुलिस के एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस संजय भाटिया ने इसी साल जनवरी में दिल्ली-एनसीआर और आसपास के राज्यों में सक्रिय उन गिरोहों की पहचान करने पर जोर दिया था. उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों की पहचान की जाए, जो नाबालिगों को प्रभावित करते है और उनसे जुर्म करवाते हैं. दिल्ली पुलिस के डेटा के मुताबिक, 30 अगस्त 2025 तक मर्डर में 191, रेप केस में 101 और डकैती लूट के केसों में 268 नाबालिग पकडे़ गए थे. पकड़े गए ज्यादातर नाबालिगों को अपराध की तरफ खींचने में सोशल मीडिया की भी अहम भूमिका रही. संजय भाटिया ने उस वक्त दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को आधुनिक तकनीक और मजबूत कानूनी ढांचे को विकसित करने के निर्देश दिए थे.
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