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घर बेचकर शिप में बनाया आशियाना, अचानक लोगों को मिला आलीशान जहाज छोड़ने का फरमान; ईरान की जंग ने कैसे खत्म किया सफर?

करीब दो साल पहले दुनिया की सैर करने निकले 'विला वी ओडिसी' नाम के आलीशान क्रूज को कंबोडिया में रोक दिया गया. कंपनी ने दावा किया कि तेल की बढ़ती कीमतों के कारण इस क्रूज का संचालन कर पाना मुश्किल हो रहा है. कंबोडिया में इस जहाज पर सवार लोगों को उतरने को कहा गया है.

घर बेचकर शिप में बनाया आशियाना, अचानक लोगों को मिला आलीशान जहाज छोड़ने का फरमान; ईरान की जंग ने कैसे खत्म किया सफर?
Image Credit: दुनिया के बेहद आलीशान शिप की यात्रा अचानक रोक दी गई. (फोटो- एआई)

Villa Vie Odyssey: दुनिया की सैर करते हुए एक क्रूज शिप पर अपनी जिंदगी बिताने वाले लोगों को एक बड़ा झटका लगा, जिसके बारे में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा. 'विला वी ओडिसी' नाम का क्रूज शिप पिछले दो साल से समुद्र में चल रहा था और वह इसमें सवार लोग दुनिया का चक्कर लगाते हुए अपना जीवन जी रहे थे. अब इस जहाज को कंपनी ने रोक दिया है. सबसे खास बात है कि क्रूज का संचालन करने वाली कंपनी ने लोगों से इस जहाज से उतरने को कहा है.

दरअसल, इस क्रूज में सवार कई यात्री दुनिया की सैर के लिए अपना घर भी बेच चुके थे. इस सफर के बीच उन्हें ये क्रूज छोड़नी पड़ी. क्रूज का संचालन करने वाली कंपनी ने कहा कि ईरान युद्ध के कारण ईंधन की कीमतों में इतना इजाफा हो गया है कि इसका संचालन कर पाना मुश्किल हो रहा है. ये जहाज साल 2024 में दुनिया की सैर पर निकला था. जैसे ही ये शिप कंबोडिया पहुंचा, यात्रियों को इसको छोड़ने के लिए कहा गया.

यात्रियों को लगा बड़ा झटका

इस शिप पर दुनिया के कई लोग सवार थे. वह एक तरीके से किसी शिप की यात्रा नहीं कर रहे थे, बल्कि समुद्र में बने एक घर में रह रहे थे. ये क्रूज 2024 में दुनिया की सैर पर निकला था और रास्ते में अलग-अलग देशों के तटों पर ठहरता था, जहां इस जहाज में सवार लोग उतरते थे घूमते थे और फिर अलगे पड़ाव के लिए निकल जाते. इस बीच कंपनी ने इस क्रूज के संचालन को बंद करने का फैसला लिया है, जिससे यात्रियों को बड़ा झटका लगा.

कंपनी ने कहा कि फिलहाल इस शिप को अस्थायी रूप से ऑपरेशन से बाहर रखा जाएगा. हालांकि, इस दौरान शिप की देखभाल लिए कुछ क्रू मेंबर्स इसमें रहेंगे.  कंपनी के हालिया बयान के अनुसार, केबिन के हिसाब से हर महीने फ्यूल पर 1800 डॉलर का खर्च था, लेकिन ईरान युद्ध के बाद तेल की कीमतों में हुए इजाफे के कारण यह खर्च 6,000 से 8,000 डॉलर तक पहुंच गया. यही कारण है कंपनी को इसका संचालन बंद करना पड़ा.

यात्रियों के सामने खड़ी हो गई नई मुसीबत

शिप के कंबोडिया में रुकने के कारण इस शिप में सवार लोगों के सामने सबसे बड़ी परेशानी रहने की और अपने सामान की है.  शिप कंपनी ने कहा कि अगर यात्री अपना पूरा सामान नहीं ले जाते हैं, तो वह गेस्ट सर्विसेज से संपर्क करें. सामान वापस कराने के लिए यात्रियों के लिए शटल सर्विस उपलब्ध कराई जाएगी. इस बीच इस जहाज में सवार यात्रियों को होटल या किसी दूसरी जगह कितनी मदद मिलती है, इसको लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आ सकी है. इसके अलावा क्रूज फिर से शुरू होगी या नहीं और यात्रियों को रिफंड मिलेगा या नहीं, इसको लेकर भी जानकारी सामने नहीं आई है.

बेहद आलीशान क्रूज की यात्रा समाप्त

जानकारी दें कि यह कोई सामान्य क्रूज नहीं है. यह एक आवासीय जहाज था, जिसमें लोग स्थायी रूप से रहते थे और दुनिया की सैर पर निकले थे. कई यात्रियों ने तो जहाज के भीतर खुद कई केबिन खरीदे थे और वह इसको अपना घर मानते थे. फ्लोरिडा की एक कंपनी की ओर से इस क्रूज को संचालित किया जाता था. अब इस क्रूज के संचालन को बंद कर दिया गया है. कंपनी ने कहा कि ईरान युद्ध के बाद तेल की कीमतों में इजाफा होने के कारण जहाज का संचालन कर पाना मुश्किल हो रहा है.

2 साल पहले शुरू हुआ था सफर

सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'विला वी ओडिसी' ने अपना सफर उत्तरी आयरलैंड बेलफास्ट से शुरू किया था. ये जहाज करीब 640 फीट लंबा है. जहाज को खास तौर पर एक प्रकार की जिंदगी जीने के लिए बनाया गया था और वह उन जगहों पर भी जा सकता था, जहां पर सामान्य स्थिति में बड़े जहाज  नहीं पहुंच सकते हैं. अपनी यात्रा के दौरान इस जहाज को दुनियाभर में 400 से अधिक जगहों पर जाना था.

बता दें कि इस जहाज पर रहने का खर्च काफी अधिक था. पांच साल तक रहने की शुरुआत 59,999 डॉलर से होती थी. इसके अलावा अगर कोई यात्री एक स्थायी केबिन खरीदना चाहता था, तो उसको 119,999 डॉलर की कीमत चुकानी पड़ती थी. ये फीस 3,299 डॉलर से लेकर 9,500 डॉलर के बीच थी. इस फीस के तहत यात्रियों को खाना, पीना, इंटरनेट, हेल्थ चेकअप और सफाई जैसी सुविधाएं मिलती थीं. 

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About the Author

abhinav tripathi

abhinav tripathi

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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