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न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का 81वां सत्र चल रहा है. 22 सितंबर से शुरू हुए इस महासभा सत्र में दूसरे दिन यानी आज भारी तनाव देखने को मिला, जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भाषण देने मंच पर पहुंचे. पेजेशकियान ने बोलना शुरू ही किया था कि अमेरिकी टीम का एक अफसर अपनी सीट से उठा, बैग उठाया, चश्मा उतारा और सीधे हॉल से बाहर निकल गया. उनके साथ इजरायल के प्रतिनिधियों ने भी वॉकआउट कर दिया. इस कड़े विरोध के बावजूद ईरानी राष्ट्रपति रुके नहीं, उन्होंने अपना भाषण जारी रखा और पूरी दुनिया के सामने ईरान का दर्द रखा.
दरअसल, दुनिया की राजनीति में जब दो देशों के बीच भारी दुश्मनी होती है, तो वे एक-दूसरे की बात तक सुनना पसंद नहीं करते. ऐसे में जब संयुक्त राष्ट्र (UN) में कोई नेता किसी देश पर गंभीर आरोप लगाता है, तो सामने वाले देश के अफसर अपनी कुर्सी से उठकर हॉल से बाहर चले जाते हैं. इसे ही 'वॉकआउट' कहते हैं. बिना कुछ बोले अपनी सख्त नाराजगी जताने का यह सबसे बड़ा तरीका है.
Iranian President Masoud Pezeshkian:
Iran must be understood by Mr. Trump and those who seek to bully us:
That we are ready for dialogue and diplomacy and negotiations, without accepting the language of force. pic.twitter.com/SfcNHZZkp7— Clash Report (@clashreport) September 23, 2026
दरअसल, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच लंबे समय से तनातनी और टकराव चल रहा है. जब ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान मंच से सीधे युद्ध अपराध और हमलों के आरोप लगा रहे थे, तो अमेरिकी और इजरायली अफसरों ने हॉल से बाहर निकलकर यह साफ संदेश दिया कि वे ईरानी नेतृत्व की बातों को कोई अहमियत देने को तैयार नहीं हैं.
During Iranian President Masoud Pezeshkian’s UN address, where he erroneously claimed that Iran’s military power was “defensive,” the attending U.S. delegation walked out. pic.twitter.com/ros4EX0b9V
— OSINTdefender (@sentdefender) September 23, 2026
यह नाराजगी एकतरफा नहीं थी. UNGA के 81वें सत्र में 22 सितंबर को जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भाषण चल रहा था, तब ईरान ने भी ठीक यही रुख अपनाया था. ट्रंप जैसे ही अपने भाषण में ईरान और उसके खिलाफ संभावित अमेरिकी सैन्य एक्शन का जिक्र करने लगे, वहां मौजूद ईरानी राजनयिक तुरंत अपनी सीटों से उठे और हॉल छोड़कर बाहर निकल गए.
यूएन महासभा के मंच पर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान हाथ में सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीर थामे नजर आए. पश्चिमी देशों को सीधे निशाने पर लेते हुए उन्होंने दो टूक कहा, 'ट्रंप हमें आतंकवादी बताते हैं, जबकि सच तो यह है कि आतंकवाद का दंश हम खुद झेल रहे हैं. मैं उस मुल्क की नुमाइंदगी कर रहा हूं, जिसके सर्वोच्च नेता को बिना किसी कसूर के कत्ल कर दिया गया.'
मसूद पेजेशकियान ने मंच से तस्वीरें दिखाते हुए ईरान के मिनाब शहर के एक स्कूल पर हुए भीषण हमले की भी जानकारी दी. उन्होंने भावुक होते हुए कहा, 'हमारे स्कूल पर सीधे बम गिराया गया. इन मासूम बच्चों को देखिए, ये बच्चे अमेरिका और इजरायल के हथियारों से किए गए हमले में मारे गए हैं, जबकि इन बच्चों का कोई अपराध तक नहीं था.'
बीते 28 फरवरी को मिनाब शहर पर हुए हमले में 156 लोगों की जान गई थी, जिनमें 120 मासूम बच्चे शामिल थे. मिनाब शहर में हमले का शिकार बनीं करीब 150 लड़कियों के अंतिम संस्कार के लिए एक साथ सामूहिक कब्रें तक खोदनी पड़ी थीं, जिसकी तस्वीरें मसूद पेजेशकियान ने मंच से दुनिया को दिखाई हैं.
President @drpezeshkian holds photos of the Minab victims at the United Nations. pic.twitter.com/dlPGovupAf
— Tehran Times (@TehranTimes79) September 23, 2026
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि अमेरिका के हमलों का ईरान ने जवाब तो दिया, लेकिन कभी आम लोगों को नुकसान नहीं पहुंचाया. वहीं दूसरी तरफ, उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने नियमों को ताक पर रखकर ईरान के स्कूलों, अस्पतालों, कॉलेजों और स्वास्थ्य केंद्रों को निशाना बनाया, जो कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन है.
दुनिया भर से लगे आरोपों को सिरे से नकारते हुए मसूद पेजेशकियान ने कहा कि ईरान ने पिछले 200 सालों में कभी किसी दूसरे देश पर हमला नहीं किया. इसके बाद भी हमें अशांति फैलाने वाला और आतंकवादी बताया जा रहा है. उन्होंने साफ कहा कि ईरान किसी पर हमला बोलने या नुकसान पहुंचाने के लिए अपनी ताकत नहीं बढ़ा रहा. हमारा मकसद सिर्फ अपने देश की तरक्की और अपनी हिफाजत करना है. मसूद पेजेशकियान ने दो टूक शब्दों में कहा कि अपने देश की रक्षा करने के लिए हमें दुनिया के किसी भी मुल्क से इजाजत लेने की जरूरत नहीं है.