संयुक्त राष्ट्र की 81वीं महासभा में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अपने संबोधन की शुरुआत अमेरिका के खिलाफ तीखे आरोपों से की. उन्होंने कहा कि ईरान आतंकवाद का शिकार रहा है और अमेरिकी हमलों को अवैध बताते हुए ईरान पर हुए हमलों का जिक्र किया. उन्होंने अपने संबोधन में ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या और मिनाब के एक स्कूल पर हुए हमले का भी उल्लेख किया. जैसे ही ईरान के राष्ट्रपति ने UN जनरल असेंबली में अपना भाषण शुरू किया, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के एक अधिकारी अपनी जगह से उठे, अपना ब्रीफकेस उठाया, चश्मा उतारा और मीटिंग से बाहर चले गए.
पेजेशकियान ने कहा कि ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों का पूरी ताकत के साथ जवाब दिया. उन्होंने दावा किया कि ईरान ने आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाया, जबकि उनके मुताबिक ईरान के आसपास के इलाकों में विश्वविद्यालयों, अस्पतालों, स्कूलों और अन्य बुनियादी ढांचे पर हमले किए गए. ईरानी राष्ट्रपति ने कहा,'हमारे बेकसूर लोगों को हमलों का निशाना बनाया गया और हमने पूरी ताकत से अपना बचाव किया.' उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल के पास आधुनिक तकनीक और अत्याधुनिक हथियार हैं, लेकिन इसके बावजूद ईरानी लोगों ने मजबूती से मुकाबला किया.
पेजेशकियान ने आगे कहा कि ईरान ने करीब 200 साल से किसी देश पर हमला नहीं किया है, फिर भी उसे क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने वाला और आतंकवाद का स्रोत बताया जाता है. उन्होंने कहा कि ईरान हथियारों के जरिए दूसरे देशों को धमकाने के लिए शक्ति नहीं चाहता, बल्कि तरक्की के लिए ऊर्जा चाहता है. उन्होंने कहा कि ईरान की रक्षा व्यवस्था इस तरह तैयार की गई है कि ईरानी शहरों पर किसी भी हमले का जवाब दिया जा सके. पेजेशकियान ने साफ कहा कि अपने देश की हिफाजत के लिए ईरान को किसी की इजाजत या मंजूरी की जरूरत नहीं है.

ईरानी राष्ट्रपति ने एक बार फिर कहा कि उनका देश परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहा है. हालांकि, उन्होंने शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक हासिल करने के ईरान के अधिकार पर जोर दिया. पेजेशकियान ने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक का इस्तेमाल करना ईरान का 'स्वाभाविक अधिकार' है और उनका देश इस अधिकार को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है.
उन्होंने कहा कि इजरायल के पास परमाणु हथियार हैं, लेकिन वहां अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को नहीं भेजा जाता, जबकि ईरान से लगातार निरीक्षण की मांग की जाती है. उन्होंने गाजा का जिक्र करते हुए कहा कि इजरायल ने वहां 70 हजार से ज्यादा निर्दोष लोगों को मार डाला, जबकि ईरान बातचीत की मेज पर था और उस पर हमला किया गया. पेजेशकियान ने कहा,'परमाणु हथियार इजरायल के पास हैं, लेकिन निरीक्षक ईरान में हैं. वे मारते हैं, हम पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं और हमें सजा दी जाती है.'
पेजेशकियान ने आगे कहा कि अमेरिका के प्रतिबंधों का असर आम और गरीब लोगों पर पड़ रहा है. इन पाबंदियों का निशाना बीमार, मासूम, गरीब और समाज के सबसे कमजोर लोग बन रहे हैं. अमेरिका अपने कथित गलत लक्ष्यों को हासिल करने के लिए किसी देश की पूरी आबादी को नुकसान पहुंचाना चाहता है.