अरब जगत में फिलहाल कमजोर पड़े सऊदी और मजबूत होते हूती के बीच गृहयुद्ध में फंसे यमन के राष्ट्रपति ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं. यमन में हूतियों के खिलाफ जारी लड़ाई के बीच राष्ट्रपति रशीद अल अलीमी ने देश की जनता से भारी संख्या में सरकारी सशस्त्र बलों के साथ जुड़ने की अपील की है. इसके साथ ही उन्होंने हूती समर्थकों को अल्टीमेटम देते हुए मुख्यधारा में लौटने की अपील की है. यमन की सऊदी समर्थित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के रियाद में रह रहे राष्ट्रपति रशीद अल अलीमी ने जुमे की नमाज के दौरान यमन के लोगों से एकजुट होकर सशस्त्र बलों में शामिल होकर हूतियों को भगाने का आह्वान किया है.
यमनी राष्ट्रपति के इस बयान को गृहयुद्ध के बीच 'दबाव' और 'समझौता' दोनों तरीके एक साथ अपनाने से जोड़कर देखा जा रहा है. उनका ये ऑफर उस समय आया है, जब हाल ही में हूती नेता मोहम्मद अल-बुखैती ने सऊदी अरब का साथ देने वाले देशों को कई मोर्चों पर युद्ध की चेतावनी देते हुए कहा था कि अमेरिका को निशाना नहीं बनाया जाएगा, लेकिन सऊदी अरब और उसके सहयोगियों को नहीं बख्शा जाएगा. इस मौजूदा घटनाक्रम ने 2022 के संघर्षविराम के बाद यमन में फिर बड़े संघर्ष का खतरा बढ़ा दिया है.
रशीद अल अमीनी ने रणनीतिक फैसला लेते हुए उन सभी हूती लड़ाकों और उनसे जुड़े लोगों के लिए भविष्य में आम माफी का प्रस्ताव भी दिया है, जो 26 सितंबर से इस समूह को छोड़ देंगे. राष्ट्रपति अमीनी की यह अपील उस समय आई है जब बीते सवा महीने से ईरान स्पॉन्सर्ड प्रॉक्सी और अमेरिका इजरायल द्वारा घोषित आतंकी संगठन हूती के हथियारबंद लड़ाकों ने यमन में सऊदी समर्थित सरकार पर हमले तेज करते हुए सऊदी अरब पर हमले तेज कर दिए हैं.
अमीनी ने इस ऐलान के साथ हूती की टॉप लीडरशिप को चेतावनी देते हुए कहा है कि मौजूदा वक्त में भले ही हूती निर्णायक स्थिति में हैं, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होगा. यमन की धरती पर नापाक साजिशें रचने वालों का अंजाम बहुत बुरा होगा. ऐसे में उन्हें भी हद में रहने की हिदायत दी जाती है.
न्यूज़ एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक यमन के ईरान समर्थित हूती जो खुद को 'अंसार अल्लाह' कहते हैं, उनके पास करीब 3,50,000 हथियारबंद लड़ाके हैं. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में इसमें 2,000,000 नियमित सैनिक हैं, जबकि रिजर्व बलों और नए रंगरूटों की भर्ती मिलाकर इनका आंकड़ा 3.5 लाख हो जाता है. हूती, ईरान द्वारा समर्थित संगठन है, जिसने इनको हथियार और फंड मुहैया कराकर अपने प्रॉक्सी के तौर पर खड़ा कर दिया है. ये संगठन सऊदी के गले की फांस बन गया है.
पिछले हफ्ते हूती के पॉलिटिकल ब्यूरो के मेंबर मोहम्मद अल-बुखैती ने एसोसिएटेड प्रेस से बातचीत में कहा था कि अगर कोई देश यमन के खिलाफ सऊदी अरब के साथ सैन्य कार्रवाई में शामिल होता है तो हूती कई मोर्चों पर युद्ध लड़ सकते हैं. आज हमारी फौज केवल आंतरिक संघर्ष नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय युद्ध लड़ने में सक्षम है.'

माना जा रहा है हूतियों ने इस तरह सीधे-सीधे पाकिस्तान और तुर्किये को चेतावनी दी थी कि जो भी उन्हें बचाने आएगा, उस पर रहम नहीं किया जाएगा.
इससे दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल निर्यातक देश से तेल की सप्लाई में रुकावट आई है, जबकि मध्य पूर्व में चल रहा व्यापक युद्ध अब आठवें महीने में प्रवेश कर चुका है. जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को ईरान के ऊपर अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों से हुई थी. पहले दिन ही अमेरिका-इजरायल की फौजों ने चंद घंटों में ईरान के पूर्व सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत ईरानी फौज की टॉप लीडरशिप को मार दिया था.
हूती अब सऊदी के गले की फांस बन चुके हैं. कुछ समय पहले अमेरिका, पाकिस्तान और तुर्किये तीनों ने सऊदी अरब की हूती पर हमलों की अपील ठुकराते हुए सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को हैरान कर दिया था. इसके बाद हूती ने होर्मुज की तरह अहम समुद्री कारोबारी रास्ते बाब अल-मंदेब से सटे अहम मोखा पोर्ट पर कब्जा कर लिया था. इससे 'मक्का पैक्ट' यानी 'मुस्लिम नाटो' की अवधारण पर सवाल उठा था.