Iran Distributes Nuclear Safety Kits its Army: अमेरिका और ईरान की ओर से इन दिनों तनाव भरी शांति पसरी हुई है. दोनों ओर से कोई बड़ा हमला नहीं हो रहा. इसके बावजूद ईरान को डर सता रहा है कि अमेरिका उस पर अचानक कोई बड़ा हमला करने की साजिश रच रहा है. यह हमला न्यूक्लियर बम से भी हो सकता है. इसे देखते हुए ईरान ने अपने 46 अहम ठिकानों पर सैन्य तैयारी का स्तर बढ़ा दिया है. अमेरिका की ओर से परमाणु हमले की आशंका को देखते हुए सैनिकों को न्यूक्लियर सेफ्टी किट भी बांटी जा रही है, जिससे वे ऐसा अटैक होने पर खुद को बचा सकें.
ईरान में सेना के हाई अलर्ट और ज़मीनी स्तर पर तैयारी बढ़ाने के बीच, तेहरान ने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर पर अमेरिका के अचानक सैन्य हमले की आशंका को देखते हुए दर्जनों अहम संस्थानों और ठिकानों की ऑपरेशनल और डिफेंसिव तैयारी का स्तर बढ़ा दिया है.
इसी बीच ईरान के कुछ हिस्सों में धमाके की खबर है. ईरानी समाचार एजेंसी 'फार्स' ने खबर दी कि दक्षिण-पूर्वी ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी ज़ाहेदान में जम्हूरी स्ट्रीट के पास एक ज़ोरदार धमाका सुना गया. अभी तक पता नहीं चल पाया है कि यह धमाका कैसे हुआ और इसका जिम्मेदार कौन है. घटना में किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान का भी पता नहीं चला है. सुरक्षा अधिकारियों ने इस घटना पर मीडिया कवरेज पर रोक लगा दी है.
अमेरिका की ओर से बड़े हमले की आशंका को देखते हुए ईरानी सेना ने युद्धकालीन योजनाओं पर तेजी से काम शुरू कर दिया है. ईरानी नागरिक सुरक्षा संगठन के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल गुलाम रज़ा जलाली ने घोषणा की कि लगभग 46 कार्यकारी और ऑपरेशनल निकाय अब संभावित युद्ध से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने वाले किसी भी हमले के असर का तुरंत जवाब दिया जाएगा.
जलाली ने बताया कि लागू की गई आपातकालीन योजनाओं में सेवाओं की निरंतरता शामिल है. सभी पक्षों को ज़रूरी कामकाज बनाए रखने, सामान्य स्थिति बहाल करने और बिना रुकावट कामकाज के लिए ज़रूरी चीज़ों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए खास योजनाएं बनाने के लिए बाध्य किया जाएगा.
सीधे हमले के कारण ठिकानों को होने वाले विनाश या नुकसान से निपटने के लिए तुरंत बचाव उपाय सक्रिय किया जाएगा. तेल रिफाइनरियां, बिजली उत्पादन संयंत्र, जल उपचार नेटवर्क और संयंत्र, बंदरगाह, पुल, मुख्य सड़कें, हवाई अड्डे और राष्ट्रीय एयरलाइंस को नुकसान होने पर उन्हें जल्द से जल्द चालू किया जाएगा.
दक्षिणी इलाकों में तैनात ईरानी सैनिकों को केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर खतरों से बचाव के लिए सुरक्षा उपकरण दिए गए हैं. वहीं फारस की खाड़ी के मोर्चे पर तैनात सैनिकों को नर्व एजेंट के विषनाशक दिए जा रहे हैं, जिससे उन्हें रासायनिक युद्ध की संभावना के लिए तैयार किया जा सके.
इस किट में गैस मास्क, एट्रोपिन और ऑक्सीम इंजेक्टर के साथ-साथ त्वचा व कपड़ों को कीटाणुरहित करने के लिए पाउडर भी शामिल हैं. ये सामान्य फर्स्ट एड नहीं हैं. इन्हें नर्व एजेंट के संपर्क में आने की स्थिति के लिए बनाया गया है.
ये किट कब के हैं, इस बारे में सवाल उठ रहे हैं. कहा जा रहा है कि ये सेफ्टी किट पुराने स्टॉक के हो सकते हैं. हालांकि इनके वितरण से यह स्पष्ट है कि ईरान परमाणु या रासायनिक हमले की आशंका से डरा हुआ है. इसीलिए अपने सैनिकों को बचाने के लिए वह अभी से उपाय करने में जुटा है.
बताते चलें कि ईरान और यूएस के बीच इस साल 28 फरवरी से जंग चल रही है. यह जंग कभी तेज हो जाती है तो कभी रुक जाती है. पहले यूएस हमला करता है, जिसका ईरान जवाब देता है. फिलहाल दोनों के बीच संघर्ष थमा हुआ है. हालांकि, यूएस ने होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी कर रखी है. जिसके बाद से ईरान अपना तेल दुनिया को नहीं बेच पा रहा है. इससे उसकी बदहाल अर्थव्यवस्था और सिकुड़ती जा रही है.