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ईरान सरकार ने यह साफ कर दिया है कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय जहाजों की आवाजाही पर लगे प्रतिबंधों से पूरी छूट दे दी है. इस फैसले के तहत भारतीय व्यापारिक जहाजों को बिना किसी रोक-टोक के इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति रहेगी. ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अहमद हयात-मुकद्दम ने इस फैसले की जानकारी दी.
अहमद हयात-मुकद्दम ने एक आर्थिक और सुरक्षा समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि ईरान ने चार देशों-भारत, चीन, इराक और कतर को इस जलमार्ग के इस्तेमाल की विशेष छूट दी है. हयात-मुकद्दम के अनुसार, इन चार देशों के जहाज ईरानी दृष्टिकोण से पूरी तरह स्वतंत्र होकर आवाजाही कर सकते हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका को भी इन देशों के जहाजों की आवाजाही से कोई आपत्ति नहीं है.
ईरानी अधिकारी ने बहुत स्पष्ट शब्दों में बताया कि इन देशों को छूट देने के पीछे ईरान के व्यावसायिक और कूटनीतिक हित जुड़े हैं.
एक तरफ जहां व्यापारिक जहाजों को छूट दी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के साथ बढ़ते सैन्य तनाव को लेकर भी ईरान के भीतर हलचल तेज है. 'अल अरबिया' की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के आंतरिक सुरक्षा आकलनों में अमेरिका के साथ सीधे युद्ध की संभावना को सबसे प्रमुख माना जा रहा है. सैन्य संघर्ष की इस गंभीर आशंका के बावजूद ईरान का शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व कूटनीतिक रास्ता तलाशने की कोशिश कर रहा है.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची मिलकर देश के सैन्य नेतृत्व पर दबाव बना रहे हैं. ये सभी नेता कतर द्वारा पेश किए गए शांति प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाने की सलाह दे रहे हैं ताकि संभावित युद्ध को टाला जा सके. हाल ही में कतर के प्रतिनिधिमंडल ने सीधे तेहरान की यात्रा की थी. उनका मकसद किसी लंबी बातचीत में उलझना नहीं, बल्कि शांति प्रस्ताव के ढांचे पर ईरान का अंतिम और आधिकारिक जवाब हासिल करना था.
इस पूरे घटनाक्रम में ईरान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के बीच सोच का अंतर साफ दिखाई दे रहा है. एक तरफ जहां राजनीतिक हस्तियां शांति और बातचीत के जरिए कूटनीतिक हल निकालने की पुरजोर वकालत कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सैन्य रणनीतिकार शांति की संभावनाओं को लेकर काफी आशंकित हैं. ईरानी सेना का मानना है कि आने वाले समय में अमेरिकी सेना के साथ सीधा टकराव होना लगभग तय है.