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'बैलेट' के बाद अब बरसेगा 'बारूद', अमेरिका-ईरान के बीच 'केमिकल' जंग की तैयारी, होर्मुज पर पड़ा रहेगा 'ताला'

अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शन के बाद ईरान पर ताबड़तोड़ हमले की संभावना जताई जा रही है. इस बीच इजरायल ने वॉशिंगटन को सूचना दी है कि तेहरान जंग में केमिकल वेपन का इस्तेमाल कर सकता है. इसको लेकर अमेरिका असमंजस की स्थिति में है.

'बैलेट' के बाद अब बरसेगा 'बारूद', अमेरिका-ईरान के बीच 'केमिकल' जंग की तैयारी, होर्मुज पर पड़ा रहेगा 'ताला'

West Asia War: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बाद एक बार फिर जंग की आहट सुनाई दे रही है. बताया जा रहा है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका में मिड टर्म चुनावों के बाद ईरान पर नए हमलों को मंजूरी देने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बना रहे हैं, जबकि अमेरिका इसके लिए डिप्लोमैटिक समाधान तलाश रहा है. ट्रंप भी लगातार ईरान पर मिलिट्री एक्शन की धमकी देते रहे हैं और तेहरान के साथ समझौता करने में दिलचस्पी दिखाते रहे हैं.  

'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने मंगलवार ( 3 नवंबर 2026) को अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड के पास ईरान के खिलाफ हमले शुरू करने की योजना है और ये हमले बुधवार ( 4 नवंबर2 206) तक शुरू हो सकते हैं. यानी अमेरिका ईरान पर मिडटर्म इलेक्शन के बाद हमले कर सकता है. 

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इस बीच अमेरिकी सेना का कार्गो एयरक्राफ्ट इजरायल और मिडिल ईस्ट के लिए कुछ टूल्स के साथ उड़ान भरते हुए भी देखा गया साथ ही ईरान में आर्टिलरी यूनिट की एक्टिविटी भी देखी गई है. ये सभी स्थिति ऐसे समय पर देखने को मिली है, जब ईरान ने अमेरिका के शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है.

केमिकल वेपन का इस्तेमाल करेगा ईरान? 


'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, जंग की आहट के बीच इजरायल ने अमेरिका के साथ खुफिया जानकारी शेयर की है, जिसमें दावा किया गया है कि ईरान अपने विरोधियों के खिलाफ केमिकल वेपन का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहा है, जिसको लेकर अमेरिकी अधिकारी चिंता में है. कई ऑफिसर्स का मानना है कि यह नेतन्याहू की साजिश है, जिसके तहत वह अमेरिका को ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर जंग भड़काने के लिए राजी करना चाहता है. वहीं, कुछ अन्य अधिकारियों का मानना ​​है कि हाल ही में ईरान की ओर से अमेरिका में हमलों की चेतावनियों को देखते हुए इन खतरों को गंभीरता से लेना चाहिए.

सत्ता बचाने के लिए नेतन्याहू की साजिश? 


इजरायल ने मिडिल ईस्ट के कई देशों के साथ भी केमिकल वेपन से जुड़ी जानकारी शेयर की है. हालांकि, उनका मानना है कि यह इजरायल की जंग को और तेजी से अगले चरण में बढ़ाने की कोशिश है. अमेरिका दशकों से ईरान के पास केमिकल वेपन होने के दावे कर रहा है. 

साल 2003 में ईरान ने स्वीकार किया था कि उसने 1980 के दशक में ईरान-इराक जंग के दौरान केमिकल वेपन बनाने की क्षमता विकसित कर ली थी, लेकिन बाद में उसने इन्हें नष्ट कर दिया. वहीं,अमेरिका ने अपनी एनुअल इंटेलिजेंस रिपोर्ट में दावा किया है कि ईरान केमिकल वेपन के रिसर्च और डेवलपमेंट को जारी रख रहा है. हालांकि, ईरान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये इजरायल और नेतन्याहू की साइकोलॉजिकल वॉर का हिस्सा है.  

ईरान पर न्यूक्लियर वेपन रखने का आरोप 


इस नई खुफिया जानकारी से पता चलता है कि मौजूदा स्थिति बेहद तनावपूर्ण है और किसी भी गलतफहमी से गलत फैसला लिया जा सकता है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप का प्रशासन न्यूक्लियर वेपन का इस्तेमाल करने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन ईरानी अधिकारियों को इस पर पूरा भरोसा नहीं है. वहीं, नेतन्याहू भी चुनाव में सरकार बनाने का स्पष्ट रास्ता न मिल पाने के बाद अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने की जंग लड़ रहे हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि वह इमरजेंसी की स्थिति खड़ी कर  विपक्षी नेताओं को अपने साथ गठबंधन में शामिल होने के लिए मजबूर कर सकते हैं.

'शर्तें न मानने तक बंद रहेगा होर्मुज...'


जंग की स्थिति के बीच ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट तब तक बंद रहेगा, जबतक अमेरिका तेहरान की सातों शर्तों को पूरी तरह से मान नहीं लेता. IRGC ने फुटेज भी जारी की है, जिसमें दक्षिणी ईरान में नेवी को सीक्रेट मिसाइल सुरंगों का निरीक्षण दिखाया गया है. 

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इस फुटेज में IRGC के लिए सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि को उन अंडरग्राउंड सुविधाओं का दौरा करते हुए देखा जा सकता है, जहां एंटी-शिप मिसाइलें और तेज हमला करने वाली बोट्स रखी गई हैं. ये सुविधाएं ईरान के नवल डिफेंस फोर्स का हिस्सा हैं, जिन्हें सैन्य संपत्तियों की सुरक्षा करने और समुद्र में जहाजों के खिलाफ अभियानों में मदद देने के लिए बनाया गया है.

इजरायल की फंडिंग रोकेगा अमेरिका


अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार ( 3 नवंबर 2026) को कहा कि उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत इस साल के बाद वाशिंगटन इजरायल को दी जाने वाली सालाना 4 अरब डॉलर की फंडिंग बंद कर देगा. हालांकि, वह अपने इस करीबी सहयोगी को हथियार बेचना जारी रखेगा. ट्रंप ने कहा कि वामपंथी डेमोक्रेट्स इजरायल को दी जाने वाली सैन्य सहायता के मुद्दे पर रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ इसी बात का इस्तेमाल कर रहे थे. 

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About the Author

Shruti Kaul

Shruti Kaul

ज़ी न्यूज में सब एडिटर. वनस्थली विद्यापीठ यूनिवर्सिटी, राजस्थान से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन. ये राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुद्दो से जुड़े विषयों पर लिखती हैं. लिखने के अलावा श्रुति को नई जगहों पर घूमना, संगीत सुनना, फिल्में देखना और फूड एक्सप्लोर करने का बेहद शौक है. 
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