डिजिटल अखाड़ा बना उत्तराखंड: चुनावी दंगल से पहले एआई की जंग, कांग्रेस के आरोपों पर BJP का 'जैसे को तैसा' पलटवार
उत्तराखंड की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले एक नए और हाई-टेक 'डिजिटल वॉर' का आगाज हो चुका है. पारंपरिक रैलियों, भाषणों और बयानों से आगे बढ़कर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI राजनीति का सबसे नया और धारदार हथियार बन गया है.
देहरादून, राम अनुज: जैसे-जैसे 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं. राज्य में एआई की जंग तेज होती जा रही है. सत्ताधारी भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल एक दूसरे पर एआई के जरिए हमला कर रहे हैं. कांग्रेस पार्टी ने सत्ताधारी दल पर हमलावर रुख अपनाते हुए तीखे आरोप लगाए हैं. कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल बिष्ट का कहना है कि भाजपा एआई टूल्स का धड़ल्ले से दुरुपयोग कर रही है.
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता का संगीन आरोप
उनका आरोप है कि भाजपा के कई प्रायोजित सोशल मीडिया हैंडल्स का इस्तेमाल सुनियोजित तरीके से ऐसे एआई-जनरेटेड वीडियो और भ्रामक कंटेंट तैयार करने के लिए किया जा रहा है, जिनका एकमात्र उद्देश्य कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं की छवि को धूमिल करना है. शीशपाल बिष्ट का कहना है कि चुनावी वैतरणी पार करने के लिए भाजपा अब डिजिटल और वर्चुअल हथकंडों का सहारा ले रही है.
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बीजेपी ने कांग्रेस पर किया पलटवार
दूसरी ओर, भाजपा ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कांग्रेस पर ही पलटवार किया है. भाजपा प्रदेश प्रवक्ता और प्रदेश महामंत्री नेहा जोशी का कहना है कि एआई आज के दौर में युवाओं और आधुनिक तकनीक का एक बेहतरीन टूल है, जिसका पॉजीटिव उपयोग में होना चाहिए.
'डिजिटल हमले का माकूल जवाब देंगे'
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता कमलेश रमन ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी खुद एआई टूल्स का सहारा लेकर राज्य सरकार की साख को नुकसान पहुंचाने और जनता को गुमराह करने वाले भ्रामक कंटेंट बना रही है, लेकिन पार्टी इसका मुंहतोड़ जवाब दे रही है. भाजपा साफ कर चुकी है कि 'जैसे को तैसा' की तर्ज पर कांग्रेस के हर डिजिटल हमले का माकूल जवाब दिया जाएगा.
वर्चुअल दुनिया में भी लड़े जाएंगे चुनाव
उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम हो गई है कि आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि वर्चुअल दुनिया में भी लड़े जाएंगे. रोजाना सोशल मीडिया पर दोनों दलों के पक्ष-विपक्ष में एआई-जनरेटेड वीडियो, ऑडियो और ग्राफिक्स की बाढ़-सी आ गई है. यह साफ है कि जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आएंगी, यह 'डिजिटल और एआई वॉर' और अधिक आक्रामक रूप लेगी. अब देखना यह है दोनों ही दल इस दोधारी तलवार का किस हद तक और कैसे उपयोग करते हैं.
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